
नारी डेस्क : हिंदू धर्म में कौवे का महत्व काफी अधिक है। इसे पितरों का संदेशवाहक और अतिथि आगमन का संकेत माना जाता है। वहीं, शनिदेव का वाहन कौवा कैसे बना, इसे लेकर धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक कथाओं में कई रोचक बातें कही गई हैं।
शनिदेव न्याय और कर्म के देवता
भगवान शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है। वे भगवान शिव के परम भक्त थे और व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। इसके साथ ही, अच्छे कर्म करने वाले पर उनकी कृपा भी बरसती है। परंपरा अनुसार शनिदेव को हाथों में तलवार और धनुष के साथ दिखाया जाता है, जो उनके दंड और न्याय लाने की शक्ति का प्रतीक है।
कौवे की खासियत, शनिदेव का प्रिय वाहन
शनिदेव को अक्सर कौवे पर सवार देखा जाता है, लेकिन वास्तव में उनके 9 वाहन हैं। इनमें से हर वाहन का अपना रहस्य है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, कौवा बहुत चालाक और सतर्क प्राणी है। यह न केवल खतरे को भांप सकता है, बल्कि जहां यह रहता है वहां सुख और प्रसन्नता भी रहती है। मान्यता है कि शनिदेव की कृपा से कौवा कभी बीमार नहीं पड़ता।
कौवा कैसे बना शनिदेव का वाहन?
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार कहानी इस प्रकार है। सूर्य की पत्नी संध्या अपने पति का ताप नहीं झेल पा रही थीं। इसलिए उन्होंने अपनी छाया का निर्माण किया और अपने दोनों बच्चों यम और यमुना को छाया के पास छोड़कर तपस्या करने चली गईं। जब संध्या की तपस्या पूरी हुई, तब तक छाया ने सूर्य देव से शनिदेव प्राप्त कर लिया। जब संध्या को यह पता चला, तो वे क्रोधित हुईं। लेकिन तब तक सूर्य देव ने शनिदेव और छाया को छोड़ दिया था। दुखी होकर छाया और शनिदेव वन में चले गए। सूर्य देव ने उन्हें मारने के लिए वन में आग लगा दी। इस आग में फंसे शनिदेव को कौवे ने बचाया। यही वजह है कि कौवा शनिदेव का प्रिय बन गया।
एक दिन, कौवा शनिदेव को लेकर अपने काकलोक पहुंचा। वहां कौए की माता ने शनिदेव को पुत्रवत प्यार दिया। कौवे ने अपनी माता से प्रार्थना की कि शनिदेव को उनके साथ रहने दें। मां ने अनुमति दी और तब से कौवा शनिदेव का वाहन बन गया।
कौवा न केवल शनिदेव का वाहन है, बल्कि यह सतर्कता, बुद्धिमत्ता और शुभ संकेत का प्रतीक भी माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, कौवे की मदद से शनिदेव ने संकट से मुक्ति पाई, जिससे यह उनके लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण बन गया।