
नारी डेस्क : गाजियाबाद में तीन सगी बहनों की आत्महत्या की दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक मामले पर बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद ने गहरी संवेदना जताते हुए एक बार फिर ऑनलाइन गेमिंग पर कड़े प्रतिबंध की मांग की है। उन्होंने कहा कि डिजिटल एडिक्शन और ऑनलाइन गेम्स मासूम दिमागों को ऐसे जाल में फंसा रहे हैं, जहां से बाहर निकलने का रास्ता उन्हें दिखाई ही नहीं देता।
ऑनलाइन गेमिंग की लत बनी मौत की वजह
बताया जा रहा है कि 12, 14 और 15 साल की तीनों बहनों को कोरियन ऑनलाइन गेम्स की गंभीर लत थी। आधी रात को तीनों बेटियां उठीं, मां को प्यार किया, पिता से माफी मांगी और फिर 9वीं मंजिल से एक-एक करके कूद गईं। मौके से मिली 18 पन्नों की डायरी में लिखा था “कोरिया ही जिंदगी है।” यह पंक्तियां उस मानसिक दबाव और डिजिटल लत की भयावह तस्वीर पेश करती हैं, जिसमें आज के बच्चे फंसते जा रहे हैं।
सोनू सूद बोले कलेजा फट गया है
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए सोनू सूद ने कहा, कलेजा फट गया है। फिर कह रहा हूं। ऑनलाइन गेम्स पर पूरे तरीके से बैन लगना चाहिए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बिना निगरानी और जिम्मेदारी के चल रहे ऑनलाइन गेम्स कई परिवारों को तबाह कर चुके हैं। मासूम दिमाग इस डिजिटल दुनिया में उलझकर ऐसी मानसिक स्थिति में पहुंच जाते हैं, जहां उन्हें कोई रास्ता नजर नहीं आता।
बच्चों को चाहिए निगरानी और मार्गदर्शन
अभिनेता ने इस बात पर भी जोर दिया कि आज के दौर में मोबाइल फोन बच्चों और युवाओं के हाथ में सबसे खतरनाक हथियार बनता जा रहा है। अगर माता-पिता और घर के बड़े सही निगरानी और मार्गदर्शन न दें, तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। सोनू सूद ने कहा कि बच्चों को सिर्फ डांटने या रोकने की नहीं, बल्कि समझाने, सुनने और सही दिशा दिखाने की जरूरत है।

पहले भी उठा चुके हैं बैन की मांग
गौरतलब है कि सोनू सूद दिसंबर 2025 से ही 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग पर पूरी तरह से बैन लगाने की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि कम उम्र में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का अनियंत्रित इस्तेमाल बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है।
नजरअंदाज करना अब अपराध जैसा
सोनू सूद ने गाजियाबाद की इस घटना को एक कड़वी सच्चाई बताते हुए कहा कि इसे नजरअंदाज करना अब अपराध जैसा है। समाज, सरकार और परिवार सभी को मिलकर इस डिजिटल खतरे को गंभीरता से लेना होगा, ताकि भविष्य में किसी और घर का चिराग इस तरह बुझ न जाए।