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मां ही नहीं, पिता की बढ़ती उम्र का भी पड़ता है प्रेग्नेंसी पर असर

  • Edited By Priya verma,
  • Updated: 09 Nov, 2020 01:54 PM
मां ही नहीं, पिता की बढ़ती उम्र का भी पड़ता है प्रेग्नेंसी पर असर

बच्चों की अच्छी सेहत के लिए हमेशा मां को ही जिम्मेदार माना जाता है। प्रेग्नेंसी में पोषक तत्वों की कमी का असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी पड़ता है। यही कारण है कि महिला को हैल्दी डाइट लेने की सलाह दी जाती है लेकिन नए शोध में यह बात सामने आई है कि सिर्फ मां ही नहीं बल्कि पिता की सेहत और जीवनशैली भी शिशु पर अपना प्रभाव डालती है।

पिता की उम्र का बच्चे की सेहत पर असर

पिता की उम्र ज्यादा होने का असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ता है। इससे शिशु के स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं और इससे प्री मैच्योर डिलीवरी का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। जियोर्जटाउन यूननिवर्सिटी में बायोकैमिस्ट्री एंड मेलीक्यूल एंड सेल्यूलर बायोलॉजी की असिसटेंट प्रोफेसर और पीएचडी का अध्ययन कर चुकी जोआना किटलिंस्का ने इस विषय पर रिसर्च कर कई तरह के गंभीर निष्कर्ष निकाले हैं।

बर्थ डिफेक्ट पैदा करती है पिता की गलत आदतें

शोध में यह बात सामने आई है कि सिर्फ मां ही नहीं बल्कि पिता का आहार, स्मोकिंग की आदत, अल्कोहल का सेवन और खराब लाइफस्टाइल बच्चे में कई तरह के बर्थ डिफेक्ट पैदा कर सकता है।

40 के बाद पड़ता है मर्दानगी पर असर

पुरुषों की शारीरिक बनावट और जरूरतें महिलाओं से बहुत अलग होती हैं। वैसे तो 50 साल की उम्र में भी पुरुष पिता बन सकते हैं लेकिन 40 के बाद उन्हें मर्दानगी से जुड़ी कई परेशानियों का सामना कर ना पड़ सकता है। इसका कारण स्पर्म की क्वालिटी का कम होना है। जिससे स्पर्म द्वारा एग को फर्टिलाइज करने की क्षमता भी कम हो जाती है। अगर गर्भ ठहर भी जाए तो भ्रूण की सेहत पर इसका असर पड़ता है।

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बच्चे को मानसिक बीमारी होने की संभावना

अध्ययन में साबित हुआ है कि जिन बच्चों के पिता की उम्र 40 से ज्यादा थी उन्हें ऑटिज्म की संभावना ज्यादा हो गई। हैल्दी बच्चा चाहते हैं तो सही उम्र में ही प्लानिंग करना शुरू कर दें। इसके अलावा पिता के जीन्स में होने वाले बदलाव भी बच्चे की सेहत पर बुरा असर डालते हैं।

हार्ट प्रोब्लम्स और डाउन सिंड्रोम का खतरा

पिता की बढ़ती उम्र शिशु में दिल से जुड़ी बीमारियां और डाउन सिंड्रोम का रिस्क बढ़ा देती हैं। जबकि कम उम्र वाले पिता के शिशु में इस तरह की दिक्कतें बहुत कम होती हैं। 

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