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भारत में फिर लौटा कोरोना से भी भयानक वायरस, इसका नहीं है इलाज और ना ही कोई वैक्सीन

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 30 Jan, 2026 02:09 PM
भारत में फिर लौटा कोरोना से भी भयानक वायरस, इसका नहीं है इलाज और ना ही कोई वैक्सीन

नारी डेस्क:  निपाह वायरस ने एक बार फिर देश को डराना शुरू कर दिया है। पश्चिम बंगाल में निपाह के मामले सामने आने के बाद यह फिर से चर्चा में है। निपाह वायरस एक ज़ूनोटिक वायरस है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलता है। इसका मुख्य स्रोत फल खाने वाले चमगादड़ माने जाते हैं। संक्रमित जानवरों या उनके संपर्क में आई चीज़ों से यह इंसानों तक पहुंच सकता है। इसके अलावा, संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी यह फैल सकता है, जिससे इसका खतरा और बढ़ जाता है।

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निपाह वायरस की नहीं है कोई वैक्सीन

अब तक निपाह वायरस के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। कोई एंटीवायरल दवा नहीं है जो इसे पूरी तरह खत्म कर सके। इलाज केवल सपोर्टिव ट्रीटमेंट तक सीमित है, यानी बुखार और दर्द को नियंत्रित करना, सांस लेने में दिक्कत हो तो वेंटिलेटर सपोर्ट, दिमाग में सूजन होने पर ICU में इलाज साफ शब्दों में कहें तो डॉक्टर केवल लक्षणों को संभालते हैं, वायरस को मारने की दवा नहीं है।  विशेषज्ञों के अनुसार इसकी मृत्यु दर 40 से 75 फीसदी तक हो सकती है। 


इसके लक्षण क्या हैं?

निपाह वायरस के शुरुआती लक्षण आम फ्लू जैसे हो सकते हैं, लेकिन जल्दी ही यह गंभीर रूप ले लेता है:

-तेज बुखार
-सिरदर्द
-उल्टी, चक्कर
-सांस लेने में परेशानी
-दिमाग में सूजन (एन्सेफेलाइटिस)
-बेहोशी या कोमा

 कई मामलों में संक्रमण 24–48 घंटे में जानलेवा साबित हो सकता है।

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जब वैक्सीन और इलाज नहीं है, तो सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। बीमार व्यक्ति के संपर्क से बचें, बिना धोए फल न खाएं। चमगादड़ों द्वारा खाए गए फल न खाएं।  संक्रमण के मामलों में आइसोलेशन का पालन करें। हाथों की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। निपाह वायरस का सबसे डरावना पहलू यही है कि इसका कोई इलाज और वैक्सीन नहीं है। ऐसे में समय पर पहचान, तुरंत आइसोलेशन और सतर्कता ही जान बचा सकती है। जब इलाज नहीं हो, तब बचाव ही सबसे बड़ी दवा बन जाता है।
 

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