नारी डेस्क: आजकल एसिडिटी की समस्या बहुत आम हो गई है। गलत खानपान, ज्यादा तनाव और बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल की वजह से लोग बार-बार सीने में जलन, खट्टी डकार और पेट में जलन जैसी परेशानियों से जूझ रहे हैं। कई लोग घरेलू नुस्खों या ओवर-द-काउंटर दवाओं से काम चला लेते हैं, लेकिन सही इलाज कराने से बचते हैं। यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती है।
कभी-कभी एसिडिटी सामान्य, लेकिन रोज़-रोज़ होना खतरे की घंटी
अगर कभी-कभार एसिडिटी हो जाए तो इसे सामान्य माना जा सकता है। लेकिन जब यह समस्या हफ्तों या महीनों तक लगातार बनी रहती है, तो यह इस बात का संकेत है कि आपके पाचन तंत्र में कुछ गड़बड़ है। लंबे समय तक एसिडिटी रहना पेट और खाने की नली को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकता है।

एसिडिटी क्यों बढ़ रही है?
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अनहेल्दी फूड, तली-भुनी और मसालेदार चीजें ज्यादा खाने लगे हैं। इसके साथ ही तनाव, समय पर खाना न खाना, नींद की कमी और फिजिकल एक्टिविटी की कमी भी एसिडिटी को बढ़ा देती है। जब खानपान बिगड़ता है, तो इसका सीधा असर पेट की सेहत पर पड़ता है।
GERD का खतरा बढ़ जाता है
लंबे समय तक एसिडिटी रहने से सबसे पहले गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज यानी GERD होने का खतरा बढ़ जाता है। इस बीमारी में पेट का एसिड बार-बार खाने की नली में ऊपर की ओर आने लगता है। इससे सीने में तेज जलन, खट्टी डकारें और गले में जलन महसूस होती है। अगर समय पर इलाज न हो, तो GERD खाने की नली को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
इसोफैजाइटिस की समस्या हो सकती है
एसिडिटी की वजह से इसोफैजाइटिस नाम की बीमारी भी हो सकती है। इसमें खाने की नली की अंदरूनी परत में सूजन आ जाती है। इस स्थिति में खाना निगलने में दर्द होता है, सीने में जलन बढ़ जाती है और गंभीर मामलों में खून की उल्टी तक हो सकती है।
पेट में अल्सर बनने का खतरा
लगातार एसिड के संपर्क में रहने से पेट की अंदरूनी परत कमजोर हो जाती है। इससे पेट में अल्सर बनने का खतरा बढ़ जाता है। अल्सर होने पर पेट दर्द, उल्टी, मतली और कभी-कभी ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है। अगर अल्सर गंभीर हो जाए, तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है, इसलिए इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
बैरेट्स इसोफैगस और कैंसर का रिस्क
कुछ मामलों में लंबे समय तक एसिडिटी रहने से बैरेट्स इसोफैगस नाम की गंभीर स्थिति विकसित हो सकती है। इसमें खाने की नली की कोशिकाओं की बनावट बदलने लगती है। आगे चलकर इससे इसोफैगस कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि यह समस्या हर मरीज में नहीं होती, लेकिन लंबे समय से एसिडिटी झेल रहे लोगों में इसका जोखिम ज्यादा माना जाता है।
एसिडिटी से बचने के लिए क्या करें?
एसिडिटी को कंट्रोल में रखने के लिए समय पर डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है। संतुलित और हल्का भोजन करें, ज्यादा मसालेदार, तैलीय और जंक फूड से दूरी बनाएं। समय पर खाना खाएं और तनाव कम करने की कोशिश करें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से दवाइयों का सही इस्तेमाल करें।

डॉक्टर से तुरंत कब संपर्क करें?
अगर सीने में लगातार जलन बनी रहे, खाना निगलने में परेशानी हो, वजन तेजी से कम हो रहा हो या उल्टी में खून दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर इलाज कराने से एसिडिटी से जुड़ी गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।
लंबे समय तक रहने वाली एसिडिटी को नजरअंदाज करना आपकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।