07 FEBSATURDAY2026 12:25:46 AM
Nari

Parents की बड़ी अनदेखी! 10 साल के बच्चे Diabetes की चपेट में, वजह सिर्फ एक

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 14 Jan, 2026 05:53 PM
Parents की बड़ी अनदेखी! 10 साल के बच्चे Diabetes की चपेट में, वजह सिर्फ एक

नारी डेस्क: डायबिटीज अब सिर्फ बड़ों की बीमारी नहीं रही। आजकल युवा ही नहीं, बल्कि 10 साल तक के बच्चे भी डायबिटीज के शिकार हो रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है और इसकी सबसे बड़ी वजह है जंक फूड, जरूरत से ज्यादा खाना, देर रात तक जागना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी। बच्चों के डायबिटीज एक्सपर्ट्स बताते हैं कि जहां पहले टाइप-1 डायबिटीज के महीने में 1–2 केस आते थे, वहीं अब हर महीने औसतन 20 केस सामने आ रहे हैं। वहीं, टाइप-2 डायबिटीज जो पहले बच्चों में लगभग नहीं के बराबर थी, अब हर महीने 3–4 बच्चे इसकी चपेट में आ रहे हैं।

टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज में क्या फर्क है?

डॉक्टरों के अनुसार, बच्चे की मेडिकल हिस्ट्री और लाइफस्टाइल देखकर यह पता लगाया जाता है कि उसे टाइप-1 है या टाइप-2 डायबिटीज। टाइप-1 डायबिटीज में बच्चे को इंसुलिन लेना जरूरी होता है। टाइप-2 डायबिटीज को दवाइयों और जीवनशैली में बदलाव से कंट्रोल किया जा सकता है, हालांकि कुछ मामलों में इसमें भी इंसुलिन की जरूरत पड़ सकती है।

PunjabKesari

कुछ ऐसे मामले जिनसे खुली सच्चाई

केस 1: वजन 80 किलो पहुंचा, तब पता चली शुगर 12 साल की बच्ची के माता-पिता नौकरी करते थे। बच्ची बाहर से जंक फूड मंगवाकर खाती थी। धीरे-धीरे उसका वजन 80 किलो तक पहुंच गया। जब उसे ज्यादा प्यास लगने लगी और बार-बार पेशाब आने लगी, तो डॉक्टर को दिखाया गया। जांच में डायबिटीज की पुष्टि हुई।

ये भी पढ़ें: विंटर केयर: सर्दियों में बच्चों को कितनी बार नहलाना चाहिए? जानें सही तरीका

केस 2: थकान और बार-बार वॉशरूम जाने से खुलासा: 15 साल का बच्चा जंक फूड का शौकीन था। उसका वजन 80–85 किलो हो गया था। उसे हर समय थकान महसूस होती थी और बार-बार वॉशरूम जाना पड़ता था। टेस्ट कराने पर वह डायबिटिक निकला और अब उसका इलाज चल रहा है।

PunjabKesari

केस 3: माता-पिता को शक हुआ, जांच में निकली डायबिटीज: 7 साल के बच्चे की शारीरिक गतिविधियां बहुत कम थीं। उसे बार-बार प्यास लगती थी और वह बार-बार टॉयलेट जाने की बात करता था। जांच कराने पर पता चला कि बच्चा डायबिटीज से पीड़ित है।

केस 4: उल्टियां हुईं तो जांच करवाई, शुगर निकली: 10 साल की बच्ची को लगातार उल्टियां हो रही थीं। डॉक्टर के पास ले जाने पर शुगर की जांच की गई, जिसमें डायबिटीज सामने आई। माता-पिता ने पहले प्यास और बार-बार पेशाब जाने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया था।

PunjabKesari

एक्सपर्ट की सलाह: बच्चों की लाइफस्टाइल सुधारना है जरूरी

बच्चों में डायबिटीज के विशेषज्ञ  का कहना है कि टाइप-1 डायबिटीज से बचाव का कोई तरीका नहीं है, क्योंकि इसमें न बच्चा और न ही माता-पिता जिम्मेदार होते हैं। लेकिन टाइप-2 डायबिटीज से बचाव संभव है। बच्चों को डायबिटीज से बचाने के लिए क्या करें? बाहर का खाना और जंक फूड कम से कम दें घर का ताजा और साफ-सुथरा खाना खिलाएं रोजाना कम से कम 60 मिनट तेज चलना या खेलकूद जरूरी है। बच्चे का वजन कंट्रोल में रखें पेट के आसपास चर्बी जमा न होने दें। रोज 7–8 घंटे की नींद जरूरी है। प्रोसेस्ड और पैक्ड फूड से दूरी बनाएं ।अगर परिवार में किसी को डायबिटीज रही हो तो बच्चों का रेगुलर चेकअप करवाएं।

अगर बच्चे को बार-बार प्यास लगती है, वजन तेजी से बढ़ या घट रहा है, थकान रहती है या बार-बार पेशाब जाना पड़ता है, तो इसे नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और सही जीवनशैली अपनाकर बच्चों को डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी से बचाया जा सकता है।  

Related News