नारी डेस्क: उस उम्र में जब बच्चे अभी अक्षर सीख रहे होते हैं और पहली बार किताबों से दोस्ती कर रहे होते हैं, 3 साल के सर्वज्ञ सिंह कुशवाहा दुनिया भर में अपनी शतरंज प्रतिभा से इतिहास रच रहे हैं। इतना छोटा सा बच्चा, इतना बड़ा सपना पूरा कर, सबसे कम उम्र का FIDE-रेटेड खिलाड़ी बनकर साबित कर रहा है कि जिज्ञासा, लगन और सही मार्गदर्शन किसी भी उम्र में असाधारण उपलब्धियों की नींव रख सकते हैं।
प्रारंभिक शुरुआत
सर्वज्ञ ने लगभग 30 महीने की उम्र में शतरंज खेलना शुरू किया। उनके पिता सिद्धार्थ सिंह बताते हैं कि उन्होंने देखा कि उनका बच्चा बहुत तेज़ दिमाग वाला है और चीज़ें जल्दी सीख लेता है। “सिर्फ एक सप्ताह में वह सभी शतरंज के मोहरों के नाम और उनकी चालें सही-सही जानने लगा,” उन्होंने बताया।
तेज़ प्रगति और राज्य व राष्ट्रीय स्तर की जीत
सर्वज्ञ प्रतिदिन 4-5 घंटे शतरंज खेलते हैं, जिसमें एक घंटा प्रशिक्षण केंद्र में भी शामिल है। उन्होंने अपने उम्र से कई साल बड़े खिलाड़ियों को हराया, जैसे योगेश नामदेव, 20 साल, रेटिंग 1696 अभिजीत अवस्थी, 22 साल, रेटिंग 1542 शुभम चौरसिया, 29 साल, रेटिंग 1559 इससे पहले, अनीश सरकार नामक भारतीय बच्चे ने 3 साल, 8 महीने और 19 दिन की उम्र में 1550 रेटिंग हासिल की थी। अब सर्वज्ञ ने उनका रिकॉर्ड तोड़ दिया।
FIDE रेटिंग कैसे मिलती है?
अंतर्राष्ट्रीय शतरंज महासंघ की रेटिंग पाने के लिए, खिलाड़ी को कम से कम पांच रेटेड खिलाड़ियों के खिलाफ आधिकारिक प्रतियोगिताओं में अंक अर्जित करने होते हैं। सर्वज्ञ ने यह लक्ष्य पूरा कर लिया और न्यूनतम आवश्यक रेटिंग 1400 से बहुत अधिक 1572 की रेटिंग पाई।
भारत में शतरंज की बढ़ती ताकत
सर्वज्ञ उन युवा भारतीय खिलाड़ियों की बढ़ती सूची में शामिल हो गए हैं जिन्होंने हाल के वर्षों में शतरंज में दबदबा बनाया है। जून 2026 में 19 वर्षीय गुकेश डोम्माराजू ने 35 वर्षीय मैग्नस कार्लसन को हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। 2021 में अमेरिकी अभिमन्यु मिश्रा 12 साल, 4 महीने और 25 दिन की उम्र में सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर बने थे। सर्वज्ञ के पिता के अनुसार, उनका बेटा विश्वनाथन आनंद और गुकेश डोम्माराजू जैसे भारतीय सितारों की राह पर ग्रैंडमास्टर बनने के लिए प्रशिक्षण ले सकता है।
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युवा सपनों के लिए संदेश
“जिज्ञासा, मेहनत और सही मार्गदर्शन से कोई भी सपना असंभव नहीं। अपने अंदर की प्रतिभा को पहचानो, सीखते रहो और कभी हार मत मानो। आज का छोटा कदम कल की बड़ी उपलब्धि बन सकता है।”