नारी डेस्क : शरीर को मजबूत और फुर्तीला बनाए रखने के लिए हड्डियों का स्वस्थ होना बेहद जरूरी है। लेकिन बढ़ती उम्र, खराब खानपान और कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। कई बार लोग कहते हैं कि "हड्डियों में छेद हो गए हैं", लेकिन क्या वास्तव में ऐसा होता है? डॉक्टर के अनुसार, यह स्थिति आमतौर पर ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) नामक बीमारी से जुड़ी होती है। इस बीमारी में हड्डियों का घनत्व (Bone Density) कम होने लगता है और उनकी अंदरूनी संरचना में छोटे-छोटे छिद्र (Porous Structure) बढ़ जाते हैं। इससे हड्डियां कमजोर और आसानी से टूटने वाली हो जाती हैं।
ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) क्या है?
ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है। सामान्य रूप से शरीर पुरानी हड्डियों को हटाकर नई हड्डियां बनाता रहता है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ यह संतुलन बिगड़ सकता है। जब नई हड्डियां बनने की गति कम और पुरानी हड्डियों के टूटने की गति अधिक हो जाती है, तब हड्डियां अंदर से खोखली या छिद्रयुक्त दिखाई देने लगती हैं।

हड्डियों में छेद होने के प्रमुख कारण
बढ़ती उम्र: उम्र बढ़ने के साथ बोन डेंसिटी स्वाभाविक रूप से कम होने लगती है। यही कारण है कि बुजुर्गों में ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा अधिक होता है।
कैल्शियम और विटामिन D की कमी: कैल्शियम हड्डियों का मुख्य निर्माण तत्व है, जबकि विटामिन D शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है। इन दोनों की कमी से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं।
हार्मोनल बदलाव: महिलाओं में रजोनिवृत्ति (Menopause) के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने से ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। पुरुषों में भी उम्र के साथ हार्मोन में बदलाव हड्डियों की मजबूती को प्रभावित कर सकता है।
शारीरिक गतिविधि की कमी: लंबे समय तक निष्क्रिय रहने या नियमित व्यायाम न करने से हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। वजन उठाने वाले (Weight-bearing) व्यायाम हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में मदद करते हैं।
कुछ बीमारियां और दवाएं: थायरॉयड की बीमारी, किडनी संबंधी समस्याएं, रूमेटाइड आर्थराइटिस और लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का सेवन भी हड्डियों के कमजोर होने का कारण बन सकता है।

ऑस्टियोपोरोसिस के शुरुआती लक्षण
बार-बार हड्डी टूटना
पीठ या कमर में लगातार दर्द
लंबाई का धीरे-धीरे कम होना
झुककर चलना
मामूली चोट में भी फ्रैक्चर होना।
हड्डियों को मजबूत रखने के लिए क्या करें?
कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर भोजन करें।
रोजाना धूप में 15–20 मिनट बिताएं।
नियमित रूप से वॉक, योग और वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज करें।
धूम्रपान और अत्यधिक शराब के सेवन से बचें।
डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर Bone Mineral Density (BMD) टेस्ट कराएं, खासकर यदि आपकी उम्र 50 वर्ष से अधिक है या ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा अधिक है।

कब डॉक्टर से संपर्क करें?
यदि बिना किसी बड़ी चोट के बार-बार हड्डी टूट रही है, लगातार पीठ दर्द रहता है, लंबाई कम होने लगी है या चलने-फिरने में कठिनाई महसूस हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं। समय पर पहचान और इलाज से ऑस्टियोपोरोसिस को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।