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श्राद्ध के दौरान इन 5 सब्जियों से रहें दूर, वरना हो सकता है भारी नुकसान!

  • Edited By Monika,
  • Updated: 09 Sep, 2025 06:33 PM
श्राद्ध के दौरान इन 5 सब्जियों से रहें दूर, वरना हो सकता है भारी नुकसान!

नारी डेस्क : पितृपक्ष हिंदू धर्म में एक पवित्र समय माना जाता है, जो पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। इसे श्राद्ध पक्ष भी कहते हैं। यह 16 दिनों का काल होता है, जिसमें लोग अपने पूर्वजों की आत्माओं की शांति और आशीर्वाद के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करते हैं। इस दौरान यह माना जाता है कि पूर्वजों की आत्माएं पृथ्वी पर आती हैं और अपने वंशजों से तर्पण प्राप्त करती हैं। इसलिए इस समय खान-पान और आचरण में शुद्धता बनाए रखना बहुत जरूरी है। जैसे मांस, शराब, और प्याज-लहसुन का सेवन वर्जित है, वैसे ही कुछ सब्जियों का सेवन भी पितृपक्ष में नहीं करना चाहिए। 

बैंगन

पितृपक्ष के समय बैंगन का सेवन अशुद्ध माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें अक्सर कीड़े-मकोड़े पाए जा सकते हैं और इसे तामसिक भोजन माना जाता है। तामसिक भोजन शरीर और मन में नकारात्मकता और आध्यात्मिक ऊर्जा में कमी ला सकता है। इसलिए पितृपक्ष में बैंगन का उपयोग श्राद्ध और तर्पण के भोजन में नहीं किया जाता। 

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क्यों न खाएं:

यह अनुष्ठानिक तर्पण के लिए अशुद्ध माना जाता है।

इसका सेवन पाचन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है।

यह सात्विक भोजन में उपयुक्त नहीं है।

मूली

मूली पौष्टिक होने के बावजूद पितृपक्ष में इसका सेवन उचित नहीं माना जाता है। इसकी तीखी गंध और गर्म गुण उपवास और अनुष्ठानों के दौरान शरीर में असंतुलन पैदा कर सकते हैं। इसलिए पितृपक्ष में मूली का प्रयोग श्राद्ध या तर्पण के भोजन में नहीं किया जाता।

क्यों न खाएं।

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इसकी तीखी और तेज़ गंध होती है।

यह आध्यात्मिक शुद्धता को प्रभावित कर सकती है।

सात्विक भोजन में इसका प्रयोग नहीं किया जाता।

करेला

करेला स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हुए भी पितृपक्ष में इसका सेवन शुभ नहीं माना जाता। इसका कड़वा स्वाद श्राद्ध तर्पण के लिए उपयुक्त नहीं है, क्योंकि इस दौरान बनाए जाने वाले भोजन में सादगी और हल्का मीठापन होना जरूरी माना जाता है।

क्यों न खाएं

यह कड़वाहट और नकारात्मकता से जुड़ा माना जाता है।

श्राद्ध भोग के लिए अशुभ है।

पूर्वजों को अर्पित करने के लिए अनुपयुक्त है।

कद्दू

कद्दू आमतौर पर नवरात्रि जैसे त्योहारों पर खाया जाता है, लेकिन पितृपक्ष में इसका सेवन परहेज़ योग्य माना जाता है। परंपरा के अनुसार, कद्दू का संबंध कुछ मृत्यु-संबंधी अनुष्ठानों से जुड़ा होता है, इसलिए पितृपक्ष में इसे खाने से बचना चाहिए। 

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क्यों न खाएं

इसका प्रतीकात्मक संबंध मृत्यु के अनुष्ठानों से है।

यह पितृपक्ष में अशुभ माना जाता है।

पितरों को अर्पित करने के लिए उपयुक्त नहीं है। 

प्याज और लहसुन

प्याज और लहसुन का सेवन पितृपक्ष सहित सभी पवित्र अनुष्ठानों में वर्जित है। ये तामसिक और राजसिक खाद्य पदार्थ माने जाते हैं, जो क्रोध, वासना और नकारात्मकता को बढ़ाते हैं। 

क्यों न खाएं

यह तामसिक और आध्यात्मिक रूप से अशुद्ध माना जाता है।

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इसका सेवन मानसिक शांति को भंग कर सकता है।

श्राद्ध अनुष्ठानों में इसका सख्त निषेध है।

पितृपक्ष में सात्विक भोजन का महत्व

पितरों को अर्पित किए जाने वाले भोजन को शुद्ध, सादा और सात्विक होना चाहिए। इसमें मुख्य रूप से चावल, दाल, खीर, मौसमी सब्जियां, फल और मिठाइयां शामिल होती हैं। सात्विक भोजन न केवल पूर्वजों का सम्मान करता है, बल्कि भक्त के मन और शरीर को भी शुद्ध करता है। अशुभ या निषिद्ध भोजन अर्पित करने से पितरों की नाराज़गी हो सकती है, जिससे परिवार की समृद्धि और सद्भाव प्रभावित होता है।
 

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