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टैटू बनवाने के शौकीन इन बातों पर दें जरा ध्यान

  • Edited By Sunita Rajput,
  • Updated: 19 Feb, 2019 12:41 PM
टैटू बनवाने के शौकीन इन बातों पर दें जरा ध्यान

मॉडर्न समय में नए-नए फैशन का क्रेज युवाओं के सर चढ़ बोल रहा है। आजकल टैटू बनवाना फैशन स्टेटमेंट बन गया है लेकिन इसे बनवाते समय आपको कुछ बातों का ध्यान भी रखना पड़ता है। नहीं तो आपका यह शौक सेहत पर भारी पड़ सकता है। जी हां, फैशन के लिए बनाए गए टैटू आपके लिए खतरनाक भी हो सकते हैं। चलिए आपको बताते हैं टैटू बनवाते समय आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

 

बीमारियों से बचें

कॉस्मैटिक एक्सपर्ट्स की मानें तो टैटू से कई प्रकार के संक्रमण का खतरा होता है। इससे हैपेटाइटिस, एच.आई.वी, ग्रैनूलौम्स और कैल्यॉड जैसी बीमारियां फैल सकती हैं। एच.आई.वी और बैपेटाइटिस ए,बी,सी खून के इंफैक्शन से होने वाली बीमारियां है, जो टैटू की एक ही सुई के कई लोगों पर बार-बार इस्तेमाल होने से हो सकती हैं। ग्रैनूलोम्स टैटू से त्वचा लाल और उसमें एलर्जी हो जाती है।

 

इंक की क्वालिटी

बहुत से टैटू आर्टिस्ट इन दिनों चाइनीज इंक का इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन यह काफी खतरनाक है। यही कारण है कि टैटू हमेशा किसी अच्छे आर्टिस्ट से ही बनवाना चाहिए। इसके अलावा खुद की साफ-सफाई का ख्याल रखना भी बेहद जरूरी है।

टैटू बनवाने से पहले हैपेटाइटिस बी का टीका लगवा लेना चाहिए। इसके अलावा किसी स्पैशलिस्ट से ही टैटू बनवाना चाहिए जो इस कला में माहिर हो क्योंकि स्पैशलिस्ट उपकरण और साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखते हैं। जिस जगह पर टैटू बनवाएं वहां पर रोजाना एंटीबॉयोटिक क्रीम जरूर लगाते रहें।

 

इन बातों का भी ध्यान रखें

आपको यह भी देखना है कि टैटू आर्टिस्ट के पास टैटू से जुड़े जरूरी उपकरण जैसे दस्ताने, मास्क, सुई हो और ये सभी स्टर्लाइज्ड होने भी जरूरी हैं। यदि आपको किसी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, जैसे दिल के रोग, एलर्जी, डायबिटीज तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

 

स्थायी या अस्थायी टैटू

जो युवा फैशन या स्टाइल के लिए टैटू बनवाने का शौक रखते हैं। उन्हें अस्थायी टैटू ही बनवाने का शौक रखते हैं उन्हें अस्थायी टैटू ही बनवाने चाहिए। ये आपकी त्वचा को नुकसान भी नहीं पहुंचाते और इन्हें आप अपने मूड़ के मुताबिक बदल भी सकते हैं। इसी के साथ यह बात भी ध्यान रहे कि पर्मानेंट टैंटू बनवाना जितना आसान लगता है इसे हटाना उतना ही मुश्किल होता है।

 

जब रिमूव करवाना हो टैटू

पर्मानेंट टैटू को रिमूव करना मुश्किल होता है और इसे मिटाने वाली कोई भी प्रक्रिया पूरी तरह कामयाब नहीं होती। इसके अपने साइड इफैक्ट्स होते हैं। यहां हम कुछ ट्रीटमेंट्स लेकर आए हैं जो टैटू रिमूव करने के लिए इस्तेमाल होते हैं हालांकि इसे पूरी तरह मिटाना मुश्किल है और दाग रह जाने का खतरा भी रहता है। इसके साथ इंफैक्शन और पिगमैंटेंशन की समस्याएं भी हो सकती हैं।

 

लेजर ट्रीटमेंट

लेजर ट्रीटमेंट का सहारा लिया जा सकता है क्योंकि इसमें लेजर बीम द्वारा पिगमैंट या डाई को तेड़ते हुए टैटू को फेज किया जाता है। इसमें प्रभावित हिस्से की स्किन ट्रीटमेंट के बाद सफेद रंग सी हो जाती है। टैटू को मिटाने के लिए अनेक सिटिंग करनी होती है, जो काफी महंगी है। कई बार तो टैटू पूरी तरह मिटने की बजाए फेड हो जाता है। साथ ही इससे एलर्जिक रिएक्शन का रिस्क भी है क्योंकि लेजर टैटू पिगमैंट को तेड़ता है, जो पूरे शरीर में फैलता है।

 

डर्माब्रेसन

यह एक मैडीकल प्रक्रिया है, जिसमें त्वचा की एपिडर्मिस को एब्रेसन या सैंडिग से हटाना शामिल है। इसके बाद नई स्किन लेयर आ जाती है लेकिन इसमें दाग रह सकता है। बैलून्स का प्रयोग करते हुए टैटूज का सर्जिकल रिमूवल जो स्किन में इन्सर्ट कराए जाते हैं और उनके फूलने से टिश्यू एक्सपैंशन होता है। टैटू वाली स्किन हट जाती है और टिश्यूज के फैल जाने के कारण दाग रहने के चांस कम हो जाते हैं।

 

कैमूफ्लाजिंग टैटू

इस विधि में पुरान टैटू को ढंकने के लिए दूसरा टैटू बनाया जाता है। स्किन कलर से मिलते-जुलते पिगमैंट्स को टैटू पर नेचुरल स्किन उभारने के लिए इंजैक्ट कराते हैं लेकिन इसमें फर्क साफ देखा जा सकता है क्योंकि इसमें त्वचा की नैचुरल चमक नहीं होती।

 

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