
नारी डेस्क: कई लोग गर्दन में जकड़न या दर्द होने पर गर्दन चटका लेते हैं, जिससे कुछ पल के लिए राहत मिलती है। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यह आदत हमेशा सुरक्षित नहीं होती और कुछ मामलों में स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा सकती है। गर्दन चटकाने से मिलने वाली राहत अस्थायी होती है, लेकिन इससे होने वाला नुकसान गंभीर हो सकता है। बेहतर है कि दर्द की जड़ को समझें और सुरक्षित तरीकों से राहत लें
गर्दन चटकाने से खतरा क्यों हो सकता है?
फिजिशियन के अनुसार, गर्दन में वर्टिब्रल और कैरोटिड आर्टरी होती हैं, जो दिमाग तक खून पहुंचाती हैं। गलत तरीके से या जोर से गर्दन चटकाने पर आर्टरी की अंदरूनी परत फट सकती है (Artery Dissection), वहां खून का थक्का बन सकता है। दिमाग में ब्लड सप्लाई रुक सकती है। यही स्थिति स्ट्रोक का कारण बन सकती है।
इन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत
हाई ब्लड प्रेशर वाले, माइग्रेन या सर्वाइकल स्पॉन्डिलॉसिस के मरीज, पहले से गर्दन या रीढ़ की समस्या से परेशान लोग और बहुत ज्यादा स्ट्रेस में रहने वाले लोगों को इससे ज्यादा खतरा है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि हर बार गर्दन चटकाने से स्ट्रोक नहीं होता लेकिन बार-बार, जोर से या गलत एंगल पर गर्दन मोड़ना जोखिम बढ़ा सकता है। कुछ दुर्लभ मामलों में युवा और स्वस्थ लोगों में भी स्ट्रोक देखा गया है
सुरक्षित राहत के बेहतर तरीके
हल्की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें, गर्म पानी की सिकाई करें, सही पोश्चर में बैठें और लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप न देखें। जरूरत हो तो फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लें। अगर गर्दन चटकाने के बाद तेज सिरदर्द हो, चक्कर, उलझन या नजर धुंधली हो, हाथ-पैर में कमजोरी या सुन्नपन आए तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।