
नारी डेस्क: आजकल बाजार में मिलने वाला हर घी शुद्ध नहीं होता। नकली या मिलावटी घी स्वाद में भले ठीक लगे, लेकिन यह धीरे-धीरे शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचा सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार ऐसा घी लिवर, हार्ट और दिमाग के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। मिलावटी घी में अक्सर हाइड्रोजेनेटेड ऑयल (वनस्पति घी), पाम ऑयल या रिफाइंड तेल, सिंथेटिक फ्लेवर और रंग मिलाए जाते हैं, जो शरीर में खराब फैट (ट्रांस फैट) बढ़ाते हैं।
नकली घी से होने वाला नुकसान
लिवर डैमेज का खतरा: नकली घी में मौजूद ट्रांस फैट लिवर में फैट जमा करता है, फैटी लिवरकी समस्या बढ़ाता है। लंबे समय तक सेवन से लिवर फंक्शन कमजोर हो सकता है
स्ट्रोक और हार्ट अटैक का जोखिम: खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ता है, ब्लड वेसल्स में ब्लॉकेज हो सकता है। इससे स्ट्रोक और हार्ट अटैकका खतरा बढ़ जाता है
ब्लड प्रेशर और डायबिटीज: नकली घी इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ा सकता है। हाई ब्लड प्रेशर और टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ाता है
पाचन और इम्युनिटी पर असर: इससे गैस, अपच और एसिडिटी की समस्या बढ़ती है, आंतों की सेहत खराब होती है और इम्युनिटी कमजोर पड़ सकती है
नकली घी पहचानने के आसान तरीके
खुशबू: शुद्ध घी में प्राकृतिक खुशबू होती है, नकली में केमिकल स्मेल
जमने का टेस्ट: ठंड में शुद्ध घी समान रूप से जमता है
हथेली टेस्ट: हथेली पर रखने से शुद्ध घी धीरे-धीरे पिघलता है
आयोडीन टेस्ट: नीला रंग आए तो मिलावट की संभावना है।
सुरक्षित रहने के उपाय
भरोसेमंद ब्रांड या देसी घी लें, बहुत सस्ता घी खरीदने से बचें। सीमित मात्रा में सेवन करें घर का बना घी सबसे सुरक्षित विकल्प है। नकली घी स्वाद का धोखा देकर सेहत से बड़ा खिलवाड़ करता है। सेहत बचानी है तो घी की शुद्धता पर समझौता न करें।