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Ganesh Chaturthi: ज्ञान की पाठशाला है गणेश जी का हर अंग, जानिए किससे मिलती है क्या शिक्षा?

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 05 Sep, 2019 02:53 PM
Ganesh Chaturthi: ज्ञान की पाठशाला है गणेश जी का हर अंग, जानिए किससे मिलती है क्या शिक्षा?

भगवान गणेश को सभी देवी-देवताओं में सबसे श्रेष्ठ माना जाता। यही कारण है कि कोई भी शुभ कार्य करने से पहले गणपति बप्पा का ही ध्यान किया जाता है। शिव के गणों के अध्यक्ष होने के कारण इन्हें गणेश और गणाध्यक्ष भी कहा जाता है। मोटे पेट, लंबे कान और चौड़े माथे वाले गणेश भगवान भले ही शरारती और नटखट थे लेकिन बुद्धि में वह सबके गुरू थे और उनका हर अंग ज्ञान की पाठशाला है।

चलिए जानते हैं गणपति के हर अंग आपको क्या सीख देते हैं...

बड़ा मस्तक

गणेश का चौड़ा माथा नेतृत्व का प्रतीक है। शास्त्रों के अनुसार, जिस व्यक्ति का सिर बड़ा होता है उनमें नेतृत्व के गुण होते हैं। इतना ही नहीं, उनका बड़ी सिर यह ज्ञान भी देता है कि अपने सोच को छोटा नहीं बल्कि बड़ा बनाए।

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छोटी आंखें

बप्पा की छोटी-छोटी आंखें यह ज्ञान देती हैं कि हर चीज को देख परख कर ही लें क्योंकि ऐसा करने वाले कभी धोखा नहीं खाते। वहीं शास्त्रों के मुताबिक, छोटी आंखों वाले व्यक्ति चिंतनशील और गंभीर प्रकृति के होते हैं।

सूप जैसे लंबे कान

लंबे कानों के कारण बप्पा को गजकर्ण एवं सूपकर्ण भी कहा जाता है। गणेश जी के लंबे कान से यह शिक्षा मिलती है कि जो भी बुरी बातें आपके कान तक पहुंचती हैं उसे बाहर ही छोड़ दें। बुरी बातों को अपने अंदर न आने दें। वहीं गणेश जी के लंबे कानों का एक रहस्य यह भी है कि वह सबकी सुनते हैं फिर अपनी बुद्धि और विवेक से निर्णय लेते हैं। शास्त्रों के मुताबिक, लंबे कान वाले व्यक्ति भाग्यशाली और दीर्घायु होते हैं।

गणपति की सूंड

गणपति भगवान की सूंड हमेशा हिलती डुलती रहती है जो उनके हर पल सक्रिय रहने का संकेत है।इ,से हमें ज्ञान मिलता है कि जीवन में सदैव सक्रिय रहना चाहिए। जो व्यक्ति ऐसा करता है उसे कभी दुखः और गरीबी का सामना नहीं करना पड़ता है। शास्त्रों में गणेश जी की सूंड की दिशा का भी अलग-अलग महत्व बताया गया है।

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बड़ा पेट

बड़े हुए पेट के कारण गणेश भगवान को लंबोदर कहा जाता है। उनके बड़े पेट का रहस्य है कि वे हर अच्छी और बुरी बात को पचा जाते हैं और किसी भी बात का निर्णय सूझबूझ के साथ लेते हैं। इससे हमें भी यही शिक्षा मिलती है कि कभी भी किसी की बातें इधर-उधर नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने वाला व्यक्ति हमेशा खुशहाल रहता है।

एकदंत

बाल्यकाल में भगवान गणेश का परशुराम जी से युद्घ के दौरान भगवान गणेश का एक दांत कट गया था। इस समय से ही गणेश जी एकदंत कहलाने लगे। उनका एक दांत बुद्घिमत्ता का परिचय है। गणेश जी अपने टूटे हुए दांत से यह सीख देते हैं कि चीजों का सदुपयोग किस प्रकार से किया जाना चाहिए।

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