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जब कर्नल सोफिया कुरैशी का उदाहरण देकर कोर्ट ने महिलाओं के हक में सुनाया था बड़ा फैसला

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 09 May, 2025 12:24 PM
जब कर्नल सोफिया कुरैशी का उदाहरण देकर कोर्ट ने महिलाओं के हक में सुनाया था बड़ा फैसला

नारी डेस्क: उच्चतम न्यायालय ने 2020 में भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन (पीसी) देने के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कर्नल सोफिया कुरैशी की उपलब्धियों को सराहा था, जो ‘ऑपरेशन सिंदूर' पर मीडिया को जानकारी देने वाली दो महिला अधिकारियों में शामिल थीं। अदालत ने कर्नल सोफिया कुरैशी की उपलब्धियों और सेना में उनके योगदान को मिसाल के तौर पर पेश करते हुए परमानेंट कमीशन का रास्ता साफ किया था। उच्चतम न्यायालय ने गत 17 फरवरी, 2020 को अपने फैसले में कहा था कि सेना में ‘स्टाफ असाइनमेंट' को छोड़कर सभी पदों से महिलाओं को पूरी तरह से बाहर रखे जाने का समर्थन नहीं किया जा सकता और बिना किसी औचित्य के कमांड नियुक्तियों के लिए उन पर पूरी तरह से विचार नहीं किया जाना कानून सम्मत नहीं हो सकता।
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कर्नल कुरैशी की उपलब्धियों का दिया था उदाहरण

 सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन (पीसी) की अनुमति देने वाली शीर्ष अदालत ने कहा था कि महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) अधिकारियों को स्टाफ नियुक्तियों के अलावा कुछ भी प्राप्त करने पर पूर्ण प्रतिबंध स्पष्ट रूप से सेना में करियर में उन्नति के साधन के रूप में स्थायी कमीशन दिए जाने के उद्देश्य को पूरा नहीं करता है। शीर्ष अदालत ने महिला अधिकारियों द्वारा हासिल की गई उपलब्धियों का भी उल्लेख किया और कर्नल कुरैशी की उपलब्धियों का उदाहरण दिया। शीर्ष अदालत ने कहा था- ‘‘लेफ्टिनेंट कर्नल सोफिया कुरैशी (आर्मी सिग्नल कोर) ‘एक्सरसाइज फोर्स 18' नामक बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में भारतीय सेना की टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली पहली महिला हैं, जो भारत द्वारा आयोजित अब तक का सबसे बड़ा विदेशी सैन्य अभ्यास है।'' 
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पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं महिलाएं: कोर्ट 

न्यायालय ने कहा था, ‘‘उन्होंने 2006 में कांगो में संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षण अभियान में काम किया है, जहां वह अन्य लोगों के साथ युद्ध विराम की निगरानी और मानवीय गतिविधियों में सहायता मामलों की प्रभारी थीं। उनका काम संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में शांति सुनिश्चित करना था।'' इस मामले में केंद्र के हलफनामे पर गौर करते हुए न्यायालय ने कहा था कि जवाबी हलफनामे में महिला एसएससी अधिकारियों द्वारा राष्ट्र के लिए अपने पुरुष समकक्षों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हुए दी गई सेवाओं का विस्तृत विवरण है। शीर्ष अदालत ने कहा- ‘‘फिर भी, इस भूमिका को इस न्यायालय के समक्ष बार-बार दी जा रहीं इन दलीलों से कमजोर करने की कोशिश की जा रही है कि महिलाओं की जैविक संरचना और सामाजिक परिवेश की प्रकृति के कारण, उनके पुरुष समकक्षों की तुलना में उनकी भूमिका कम महत्वपूर्ण है।'' 
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‘एक्सरसाइज फोर्स 18' का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी हैं सोफिया 

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था- ‘‘इस तरह का रवैया परेशान करने वाला है क्योंकि यह उन संवैधानिक मूल्यों की अनदेखी करता है, जिन्हें बनाए रखना और बढ़ावा देना देश की हर संस्था का कर्तव्य है। भारतीय सेना की महिला अधिकारियों ने सेना को गौरवान्वित किया है।'' बुधवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर मीडिया ब्रीफिंग के दौरान, कर्नल कुरैशी और वायु सेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह विदेश सचिव विक्रम मिसरी के साथ मंच पर थीं। गुजरात के वडोदरा में 1974 में जन्मी कर्नल कुरैशी ने 1997 में मनोनमनियम सुंदरनार विश्वविद्यालय से बायोकेमिस्ट्री में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। महत्वपूर्ण सिग्नल कोर की अधिकारी के रूप में उन्हें 2006 में कांगो में एक सैन्य पर्यवेक्षक की भूमिका के लिए चुना गया था, इसके अलावा वह पूर्वोत्तर क्षेत्र में बाढ़ राहत अभियानों का भी हिस्सा रही थीं। वह 2016 में आसियान देशों के बीच शांति बनाए रखने में अंतर-संचालन के लिए भारत द्वारा आयोजित बहुराष्ट्रीय क्षेत्र प्रशिक्षण अभ्यास, ‘एक्सरसाइज फोर्स 18' में अपने दल का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं।
 

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