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नवरात्रि में इस नियम से पढ़ें श्री दुर्गा सप्तशती पाठ, समय कम है तो ऐसे करें मां की स्तुति

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 18 Mar, 2026 04:16 PM
नवरात्रि में इस नियम से पढ़ें श्री दुर्गा सप्तशती पाठ, समय कम है तो ऐसे करें मां की स्तुति

नवरात्रि के पावन दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है।  धर्मशास्त्रों के अनुसार दुर्गा सप्तशती का अनुष्ठान पूर्वक पाठ सही विधि और सावधानी के साथ करना जरूरी होता है, क्योंकि इसमें शक्तिशाली मंत्र और बीज मंत्र शामिल होते हैं। गलत उच्चारण या अधूरी विधि से पाठ करने पर अपेक्षित फल नहीं मिल पाता।  आइए जानते हैं इसके नियम और विधि

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दुर्गा सप्तशती पाठ के नियम

पाठ करने से पहले स्नान करके शारीरिक और मानसिक रूप से शुद्ध हो जाएं। स्वच्छ वस्त्र पहनें और अपने आसन तथा पाठ स्थान को भी शुद्ध रखें। पाठ से पहले देवी दुर्गा के सामने संकल्प लें। अपने मन में कोई भी इच्छा हो तो उसे देवी के चरणों में निवेदन करें। पाठ को एक पवित्र और साफ स्थान पर किया जाना चाहिए, जहां शांति हो। पूजा स्थल पर मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर रखें और उसे फूल, अक्षत, दीप और धूप से पूजित करें।  दुर्गा सप्तशती का पाठ उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके करना शुभ माना जाता है। आप कंबल या ऊनी आसन का प्रयोग कर सकते हैं जिससे सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।


जरूरी है सावधानी

दुर्गा सप्तशती में कुल 700 श्लोक होते हैं, जो मां दुर्गा की महिमा का वर्णन करते हैं। इसमें कई गूढ़ और शक्तिशाली मंत्र होते हैं, इसलिए: उच्चारण शुद्ध होना चाहिए, मन और स्थान पवित्र होना चाहिए, नियमों का पालन जरूरी होता है। पाठ की शुरुआत में "अर्गला स्तोत्र", "कीलक स्तोत्र", और "कवच" का पाठ करना चाहिए। इसके बाद दुर्गा सप्तशती के सभी अध्यायों का नियमित रूप से पाठ करें। प्रत्येक अध्याय के अंत में देवी की आरती और पुष्पांजलि अर्पित करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन सबसे शुभ समय सुबह ब्रह्म मुहूर्त (4 से 6 बजे के बीच) माना जाता है। इसके अलावा संध्या समय भी उपयुक्त है।

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 समय कम होने पर करें ये काम 


दुर्गा सप्तशती का पाठ एक बार शुरू करने के बाद नियमित रूप से 7, 9 या 11 दिनों तक करना चाहिए। अगर समय नहीं है, तो आप तीन दिन या नवरात्रि के नौ दिनों तक इसे कर सकते हैं। अगर पूरा सप्तशती पाठ संभव नहीं हो तो आप कुछ विशेष अध्याय भी पढ़ सकते हैं। जैसे-


सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ: यह दुर्गा सप्तशती का सार माना जाता है। मान्यता है कि सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करने से सप्तशती के पूरे पाठ के समान फल मिलता है।

देवी कवच, अर्गला और कीलक स्तोत्र: ये तीनों स्तोत्र मिलकर सुरक्षा और शक्ति प्रदान करते हैं। इन्हें रोजाना पढ़ना बहुत लाभकारी माना जाता है।

“या देवी सर्वभूतेषु…” मंत्र: यह छोटा लेकिन प्रभावशाली मंत्र है। इसे रोज 11 या 21 बार जप सकते हैं।

बीज मंत्र का जाप: “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे” इस मंत्र का जाप करने से भी मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है।


दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के लाभ

दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से जीवन के सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं और देवी दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। यह पाठ व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक, और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है और जीवन में साहस और आत्मविश्वास बढ़ाता है। दुर्गा सप्तशती का पाठ व्यक्ति के जीवन में धन, ऐश्वर्य और समृद्धि लाता है और सभी बाधाओं को समाप्त करता है।  यह पाठ करने से व्यक्ति नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षित रहता है और सभी प्रकार की बुरी नजर और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। दुर्गा सप्तशती का पाठ नियमपूर्वक और श्रद्धा के साथ करने से माता दुर्गा की कृपा बनी रहती है और जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और उन्नति प्राप्त होती है।

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