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नई मांओं के लिए 9 जरूरी बातें

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 08 May, 2019 06:35 PM
नई मांओं के लिए 9 जरूरी बातें

मां बनने की खबर सुनने के बाद हर औरत मन में ढेरों सपने बुनने लगती है। इसके साथ ही नन्हे-मुन्ने की देखभाल को लेकर भी औरतो के मन में ढेरों सवाल उठते हैं। हालांकि हर महिला की यही कोशिश होती है कि वह अपने बच्चे के लिए बेस्ट चुने लेकिन जब डिलीवरी के बाद आप घर आती हैं तो रिश्तेदार व पड़ोसी ढेरों सलाह देने लग जाते हैं। कोई कहता है कि दूध, मलाई लगाना तो कोई दही लगाने की सलाह देता है। मगर बच्चे की स्किन सेंसटिव होती है इसलिए इस बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि बच्चे को कोई नुकसान ना हो।

 

पहली बार मां बनने के समय आपको यह पता नहीं होता है कि बच्चे की देखभाल कैसे करें। कैसे उसे गोद में लें, कैसे उसे दूध पिलाएं, कैसे उसे नहलाएं। अगर आप भी नई-नई मां बनी है और पहली बार इन सभी चीजों को अनुभव कर रही है तो आज हम आपको कुछ टिप्स देंगे, जिससे आप अपने शिशु की देखभाल बेहतर तरीके से कर सकती हैं।

 

बच्चे को नहलाना

पहली बार बच्चे को स्नान करवाते समय हर महिला को डर लगता है लेकिन सावधानी और सही तरीके से नहलाने पर किसी भी काम को आसान किया जा सकता है। बच्चे को नहलाने के लिए टब का यूज करें। हालांकि इस बात का ध्यान रखें कि वह ज्यादा गहरा ना हो। इसके अलावा बच्चे को गुनगुने पानी से ही स्नान करवाएं।

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बच्चे की स्किन कोमल, सेंसटिव और नाजुक होती है। ऐसे में बेहतर होगा कि आप उनके लिए हर चीज सोच-समझकर चुनें। शिशु को नहलाने के लिए आप बेबी डव सोप का यूज कर सकती हैं। यह स्किन पर मॉइश्चराइजर की तरह काम करती है और त्वचा में नमी बनाए रखता है।

जन्म-घुट्टी भी है जरूरी

नवजात शिशु को घुट्टी पिलाने की प्रथा आयुर्वेद में बताई गई है और हमारे देश में पारंपरिक रूप से चली आ रही है। ज्यादातर लोग बच्चे के पैदा होते जन्म-घुट्टी में शहद ही देते हैं। लेकिन आप उसे अजवाईन और हरड़ में गुनगुना पानी मिलाकर भी घुट्टी के रूप में दे सकते हैं। जिससे बच्चे का स्वस्थ ठीक रहेगा।

बेबी डव वाइप्स

बच्चे की संवेदनशील व मुलायम त्वचा के लिए बेबी डव वाइप्स भी बेहतरीन उपाय है। इन वाइप्स में सॉफ्ट फेब्रिक होता है, जिससे त्वचा में खाज-खुजली नहीं होती और ना ही इससे किसी तरह के लाल निशान होते हैं। यह पूरी तरह से हाइजीन होने के साथ चेहरे, हाथ व निचले हिस्से को साफ करने के लिए बेहतरीन उपाय है। इतना ही नहीं, यह वाइप्स अल्कोहल फ्री होते हैं, जिससे शरीर में पसीना और गंदगी को अच्छे से साफ किया जा सकता है।

सही समय पर करवाएं स्तनपान

नवजात शिशु को लगभग 3-4 घंटे में एक बार दूध पिलाना जरूरी होता है। अगर आपको दिखे की बच्चा सही तरीके से दूध नहीं पी रहा है या पीने की इच्छा नहीं कर रहा है तो जल्द से जल्द अपने डॉक्टर से संपर्क करें। साथ ही हर बार स्तनपान के बाद शिशु को ऊपर की ओर पकड़ कर पीठ को 5-10 मिनट के लिए थपथपाएं। इससे बच्चे के पेट में जमा गैस निकल जाएगी। डकार दिलवाने के भी कुछ तरीके है जैसे शिशु को कांधे पर लेकर उसकी पीठ थप-थपाए या अपनी गोद में उल्टा लेटाकर हलके हाथों से पीठ थप-थपाए या अपनी गोद में सीधा बैठाकर शिशु की पीठ सहलाए।

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शिशु को गोद में लेने से पहले धोएं हाथ

दिनभर आपके हाथ ना जाने किन-किन चीजों को छूते हैं, जिससे वो बैक्टीरिया के संपर्क में आ जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप शिशु को गोद में लेने से पहले अपने हाथ धोएं। शिशु का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है इसलिए उनमें इंफैक्शन का खतरा ज्यादा होता है। ऐसे में बेहतर होगा कि आप अपने हाइजीन का भी पूरा ख्याल रखे, ताकि वो इंफैक्शन से बचा रहे।

शिशु के कपड़ों का रखें खास ख्याल

शिशु को हमेशा कॉटन, सूखे और साफ-सुथरे कपड़े पहनाएं। कई बार दूध पीते समय शिशु के कपड़े दूध से गीले हो जाते हैं तो उसके कपड़े तुरंत ही बदल दें। अगर शिशु दूध बाहर निकालें तो उसके मुंह को कॉटन के साफ कपड़े से साफ करें ताकि उसके चेहरे पर रैशेज न पड़े।

साफ करके लगाएं डाइपर

चाहे आप डाइपर का इस्तेमाल करे या कपड़े का, सफाई सबसे ज्यादा अहम है। डाइपर वाली जगह को साफ रखें। रैशेस हो या न हो, डाइपर क्रीम का इस्तेमाल करे। चाहे जितनी बार भी डाइपर या कपड़ा शिशु खराब करे लेकिन डाइपर वाली जगह को साफ करके ही दूसरा डाइपर या कपड़े का प्रयोग करे।

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बच्चों को गोद में उठाते समय

नवजात शिशु के शरीर के अंग बहुत कमजोर होते है। उनको उठाते समय या सुलाते समय उनकी गर्दन के पीछे हाथ जरूर रखें। इसके साथ ही बच्चे को कभी भी हिलाए न एेसा करने से उसके मस्तिष्‍क में रक्‍तस्राव हो सकता है जो कभी कभी जानलेवा भी साबित होता 

सुलाने का तरीका

शिशु को करवट या पेट के बल नहीं सुलाना चाहिेए। ऐसें सुलाने से उनके शरीर के वायुमार्ग बाधित हो सकते है जो उनके लिए जानलेवा साबित हो सकते है। इसलिए बेहतर यही होगा उन्हे पीठ के बल ही सुलाया जाए।

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