नारी डेस्क: कुछ दिन ऐसा होते हैं जब आंखें भारी, सूखी और अजीब सी थकी हुई महसूस होती हैं। ऐसा तब भी होता है जब स्क्रीन पर ज़्यादा समय न बिताया गया हो। यह बात थोड़ी उलझन भरी लग सकती है। आखिर, अक्सर स्क्रीन को ही इसका दोषी माना जाता है। लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज़्यादा सरल और गहरी है। आंखों की थकान हमेशा इस बात पर निर्भर नहीं करती कि कोई व्यक्ति कितनी देर तक किसी डिवाइस को देखता है। बल्कि, यह इस बात पर निर्भर करती है कि पूरे दिन आंखें किस तरह काम करती हैं। इसका संबंध रोशनी, नींद, हवा, बैठने-उठने के तरीके (posture) और यहां तक कि हमारी भावनाओं से भी होता है।
बिना स्क्रीन टाइम के भी आंखें थकने के कारण
नींद की कमी: अगर आप रोज 7–8 घंटे की अच्छी नींद नहीं लेते, तो आंखों को आराम नहीं मिलता और वे थकी हुई लगती हैं। इससे लाल आंखें, भारीपन, बार-बार जम्हाई की समस्या रहती है।
ड्राई आई (आंखों में नमी की कमी): कम पलक झपकाना, ज्यादा AC में रहना या पानी कम पीना इन सब से भी आंखें सूख जाती हैं। इससे आंखों में जलन, खुजली, चुभन होती है।
पोषण की कमी: विटामिन A, C और ओमेगा-3 की कमी आंखों की थकान बढ़ा सकती है। इससे धुंधला दिखता है रात में कम दिखने लगता है।
तनाव और मानसिक थकान: मेंटल स्ट्रेस का असर सीधे आंखों पर भी पड़ता है। इससे सिरदर्द, आंखों में दबाव रहता है।
गलत नंबर का चश्मा: अगर आपका चश्मा सही नहीं है या आप जरूरत होने पर भी नहीं पहनते, तो आंखों पर जोर पड़ता है।
एलर्जी या धूल-मिट्टी: पोल्यूशन, धूल या एलर्जी के कारण भी आंखों में जलन और थकान हो सकती है।
आंखों पर ध्यान देने की जरुरत
अगर लगातार दर्द या जलन बनी रहे, धुंधला दिखना शुरू हो जाए, सिरदर्द बार-बार हो तो डॉक्टर से जांच जरूर कराएं। आंखों की थकान कम करने केलिए 1. 20-20-20 नियम अपनाएं, यानी हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें। आंखों को ऊपर-नीचे, दाएं-बाएं घुमाएं, हथेलियों से हल्का दबाव देकर रिलैक्स करें। ध्यान रखें कि आंखों की थकान सिर्फ स्क्रीन से नहीं, बल्कि आपकी लाइफस्टाइल का आईना होती है इसे समझना और सुधारना जरूरी है।