
नारी डेस्क: हाल के रिसर्च और न्यूरोलॉजिस्ट्स के अनुसार दृष्टि (vision) कमजोर होना और डिमेंशिया (Dementia) के बीच गहरा संबंध हो सकता है। इसलिए आंखों की जांच सिर्फ आंखों के लिए नहीं, बल्कि दिमाग की सेहत (brain health) के लिए भी जरूरी मानी जा रही है। इसलिए आंखों के सहारे आप अपने दिमाग का भी ख्याल रख सकते हैं।
कैसे जुड़े हैं vision loss और डिमेंशिया?
जब आंखें ठीक से नहीं देख पातीं, तो दिमाग को चीजों को समझने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे दिमाग जल्दी थकता है और समय के साथ याददाश्त कमजोर हो सकती है। कम दिखाई देने पर व्यक्ति पढ़ना, टीवी देखना, लोगों से मिलना कम कर देता है, इससे दिमाग की एक्टिविटी घटती है, जो डिमेंशिया का जोखिम बढ़ा सकती है।
सामाजिक दूरी (Social Isolation)
Vision loss के कारण लोग बाहर जाना या बातचीत कम कर देते हैं, अकेलापन और डिप्रेशन बढ़ता है, जो डिमेंशिया से जुड़ा है। कुछ बीमारियां जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर ये आंखों और दिमाग दोनों को नुकसान पहुंचाती हैं। न्यूरोलॉजिस्ट्स कहते हैं कि नियमित eye check-up से कई समस्याएं जल्दी पकड़ में आ सकती हैं, सही समय पर इलाज से vision loss रोका जा सकता है। इससे डिमेंशिया का खतरा भी कम किया जा सकता है
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
-धुंधला दिखना
-रात में कम दिखाई देना
-बार-बार सिरदर्द
-पढ़ने में परेशानी
ये संकेत हो सकते हैं कि आंखों की जांच जरूरी है
इन बातों का रखें ख्याल
साल में कम से कम 1 बार आंखों की जांच कराएं, स्क्रीन टाइम सीमित रखें। हेल्दी डाइट (हरी सब्जियां, फल) लें। डायबिटीज और BP को कंट्रोल रखें। आंखों की रोशनी का कम होना सिर्फ आंखों की समस्या नहीं है, यह दिमाग की सेहत से भी जुड़ा हो सकता है। इसलिए समय-समय पर आंखों की जांच करवाना एक स्मार्ट ब्रेन हेल्थ डिसीजन है। सरल शब्दों में “अच्छी नजर = स्वस्थ दिमाग”।