नारी डेस्क: अक्सर महिलाएं पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं से परेशान रहती है। कई महिलाओं का पीरियड्स अनियमित होता है, कुछ को तो हीने में दो बार पीरियड्स आते हैं (Period twice a month)। वहीं कुछ महिलाओं में पीरियड्स के 10 से 15 दिन के बाद असामान्य ब्लीडिंग होती है। एक महीने में दो बार पीरियड्स आना शरीर का संकेत है कि कुछ गड़बड़ है। यह हार्मोनल बदलाव से लेकर थायरॉयड, तनाव, या गर्भाशय से जुड़ी समस्याओं तक का संकेत हो सकता है, जिसे हल्के में बिल्कुल ना लें।
महीने में दो बार पीरियड्स आने के कारण
-हार्मोनल असंतुलन
- ज्यादा तनाव या नींद की कमी
- थायरॉयड की समस्या
-पीसीओडी (PCOD)
-वजन का अचानक बढ़ना या घटना
- गर्भनिरोधक दवाइयों का असर
एक महीने में दो बार पीरियड्स आने से शरीर पर होता है ये असर
बार-बार ब्लीडिंग होने से शरीर में आयरन की कमी होने लगती है, जिससे कमजोरी, चक्कर आना और थकान महसूस होती है। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो एनीमिया हो सकता है। दो बार पीरियड्स आने से शरीर को रिकवर होने का पूरा समय नहीं मिलता। इस वजह से हर समय थकान, सुस्ती और एनर्जी की कमी महसूस होती है। बार-बार पीरियड्स आना इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का संतुलन बिगड़ गया है। इससे मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ापन और तनाव बढ़ सकता है। जब पीरियड्स बार-बार आते हैं, तो पेट में दर्द, कमर दर्द और क्रैम्प्स भी ज्यादा होने लगते हैं। यह शरीर के लिए काफी असहज स्थिति बना सकता है।
देसी उपाय (जो हल्की समस्या में मदद कर सकते हैं)
अशोक की छाल का काढ़ा: आयुर्वेद में इसे महिलाओं की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। अशोक की छाल को पानी में उबालकर दिन में 1 बार पिएं। इससे ब्लीडिंग कंट्रोल में मदद मिलती है।
मेथी दाना: मेथी हार्मोन संतुलन में सहायक मानी जाती है। रात में 1 चम्मच मेथी भिगो दें और सुबह खाली पेट खाएं।
गुड़ और जीरा: यह उपाय शरीर में खून की कमी को भी दूर करता है। गुड़ और जीरा उबालकर उसका पानी पिएं।
एलोवेरा जूस: एलोवेरा हार्मोन को संतुलित करने में मदद कर सकता है। सुबह खाली पेट 20–30 ml एलोवेरा जूस लें।
दालचीनी: दालचीनी पीरियड्स को रेगुलर करने में सहायक होती है। दालचीनी पाउडर को गुनगुने पानी या दूध में मिलाकर लें।
नोट: देसी नुस्खे केवल हल्के मामलों में मदद करते हैं। अगर समस्या लगातार बनी रहती है, तो डॉक्टर से जांच (जैसे हार्मोन टेस्ट या अल्ट्रासाउंड) जरूर कराएं।