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खुद के साथ बात करने से बच्चों का दिमाग होगा तेज, जानें Self Talk के फायदे

  • Edited By palak,
  • Updated: 16 Mar, 2024 06:14 PM
खुद के साथ बात करने से बच्चों का दिमाग होगा तेज, जानें Self Talk के फायदे

छोटे बच्चों में कुछ ऐसी आदतें होती है जिन्हें पेरेंट्स भी नहीं समझ पाते। इन्हीं आदतों में से एक है खुद से बात करना। कुछ बच्चे खुद के साथ ही बातें करते रहते हैं। अपने मन में आ रहे सवालों का खुद ही जवाब देते हैं। बच्चों की यह आदत कई बार पेरेंट्स को परेशान भी कर देती है लेकिन शोधकर्ताओं की मानें तो जो बच्चे खुद से बातें करते हैं उनके दिमागी विकास बेहतर तरीके से होता है। खुद के साथ बात करने की आदत को सेल्फ टॉक कहते हैं। तो चलिए आज आपको इस आर्टिकल के जरिए बताते हैं कि सेल्फ टॉक करने से बच्चों को क्या-क्या होते हैं। 

सोचने की क्षमता होगी बेहतर

जब बच्चे खुद से बातें करते हैं तो इससे कई तरह के फायदे होते हैं। इससे बच्चे के मन के विचारों को और भी मजबूत बनाने में मदद मिलती है। इससे उनकी सोचने की क्षमता बेहतर होती है। जब बच्चे खुद से बात करके कोई निर्णय लेते हैं तो और इससे उनका विचार और भी क्लियर होता हैं। बच्चों का खुद से बात करना उनकी सोच को सुधारता है जिससे उनकी पर्सनेलिटी का विकास होता है। 

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भाषा के विकास में मिलेगा योगदान 

पेरेंट्स कई बार बच्चों को खुद के साथ बात करते हुए देख घबरा जाते हैं लेकिन यह उनकी इंटेलिजेंस का हिस्सा माना जाता है। खुद से बात करने से बच्चों की बात करने से बच्चों की स्पीच क्वालिटी सुधरती है जिससे उन्हें भाषा के विकास में योगदान मिलता है। इसके अलावा सेल्फ टॉक से बच्चों को अपने व्यवहार को भी कंट्रोल करने में मदद मिलती है।

अपने लक्ष्य को समझ पाएंगे 

खुद से बातें करने से बच्चे अपने आप पर कंट्रोल रखना भी सीख लेते हैं। इससे उन्हें किसी भी विषय के अलग-अलग पहलुओं को समझने में भी मदद मिलती है जिससे उनकी सोच में भी बदलाव आता है। जब बच्चे अपने साथ बात करके विचारों और भावनाओं को शेयर करते हैं तो पहले वह खुद इस बात को समझने की कोशिश करते हैं। इसके बाद वह अपनी बात किसी से कहते हैं। ऐसे में इसी आदत के जरिए उन्हें अपने लक्ष्य को सही दिशा में रखने और उसे सही तरीके से काम करने में मदद करता है। 

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खुद को कर पाएंगे व्यक्त

जो बच्चे खुद से बात करते हैं वह अपने विचारों को दूसरों के सामने अच्छी तरह से बता पाते हैं। मन में अपने विचार बोलकर उन्हें साफ शब्दों में बिना डरे हुए कहना सीखते हैं। इसके अलावा अपने आप से बात करते हुए बच्चे मिलनसार बनते हैं जिससे वह भविष्य में भी किसी के साथ आसानी से बात कर सकते हैं। 

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