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बच्चा फोन पर दोस्तों से करता है लंबी बातें? ऐसे कंट्रोल करें फोन टाइम

  • Edited By Monika,
  • Updated: 11 Apr, 2026 03:15 PM
बच्चा फोन पर दोस्तों से करता है लंबी बातें? ऐसे कंट्रोल करें फोन टाइम

नारी डेस्क : आज के डिजिटल दौर में बच्चों के लिए मोबाइल सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि उनकी सोशल लाइफ का अहम हिस्सा बन गया है। लेकिन जब यही आदत जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है, तो पढ़ाई, नींद और सेहत पर असर पड़ने लगता है। ऐसे में बच्चों को डांटने के बजाय समझदारी से उनकी आदत को कंट्रोल करना ज्यादा जरूरी है।

पाबंदी नहीं, समझदारी से करें बात

विशेषज्ञों जैसे Dr. Chandni Tugnait के अनुसार, बच्चों पर सीधे रोक लगाने से वे जिद्दी या विद्रोही हो सकते हैं। बेहतर है कि पहले समझें कि वह इतना समय फोन पर क्यों बिताता है। क्या वह अकेलापन महसूस कर रहा है या दोस्तों से दूर होने का डर है? प्यार से समझाएं कि ज्यादा फोन इस्तेमाल करने से उसकी आंखों, नींद और फोकस पर क्या असर पड़ता है।

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तय करें ‘फोन टाइम लिमिट’

डिसिप्लिन विकसित करने के लिए बच्चों के लिए फोन इस्तेमाल का समय तय करना बेहद जरूरी है। आप रोज एक निश्चित समय निर्धारित करें, जैसे शाम 5 से 6 बजे, जब बच्चा अपने दोस्तों से बात कर सके। इस समय के अलावा फोन का इस्तेमाल सीमित रखें और बातचीत खत्म होने के बाद फोन को एक तय जगह पर रखने की आदत डालें। इससे बच्चे धीरे-धीरे समय का सही इस्तेमाल करना सीखते हैं और फोन पर निर्भरता कम होने लगती है।

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बनाएं ‘नो-फोन जोन’

घर में ‘नो-फोन जोन’ बनाना बच्चों में अच्छी आदतें विकसित करने का आसान और असरदार तरीका है। इसके लिए कुछ जगहों और समय को पूरी तरह फोन-फ्री रखें, जैसे डाइनिंग टेबल पर फोन का इस्तेमाल बिल्कुल न हो, सोने से पहले फोन से दूरी बनाए रखें और फैमिली टाइम के दौरान सभी लोग फोन दूर रखें। इससे बच्चों को समझ आता है कि कब टेक्नोलॉजी से दूरी बनानी है और वे धीरे-धीरे अपनी लाइफ में सही संतुलन बनाना सीखते हैं।

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बच्चों को दें बेहतर विकल्प

बच्चों को फोन की आदत से दूर रखने के लिए उन्हें बेहतर और रोचक विकल्प देना बहुत जरूरी है। अक्सर बच्चे बोरियत के कारण मोबाइल की ओर आकर्षित होते हैं, इसलिए उन्हें आउटडोर गेम्स में शामिल करें, नियमित रूप से पार्क या स्पोर्ट्स क्लब भेजें और पेंटिंग, म्यूजिक या डांस जैसी क्रिएटिव एक्टिविटी में व्यस्त रखें। जब बच्चा शारीरिक और मानसिक रूप से एक्टिव रहेगा, तो धीरे-धीरे उसका फोन पर निर्भर रहना कम हो जाएगा और वह हेल्दी रूटीन अपनाने लगेगा।

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बच्चों की फोन आदत को कंट्रोल करने के लिए सख्ती नहीं, बल्कि समझदारी और संतुलन जरूरी है। सही टाइम लिमिट और अच्छी एक्टिविटी के साथ आप बच्चे की डिजिटल लाइफ को हेल्दी बना सकते हैं।

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