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इस साल सावन में लगेंगे सूर्य और चंद्र ग्रहण दोनों, क्या ये है बड़े संकट की निशानी?

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 11 Jun, 2026 06:19 PM
इस साल सावन में लगेंगे सूर्य और चंद्र ग्रहण दोनों, क्या ये है बड़े संकट की निशानी?

नारी डेस्क: सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। इस महीने में शिवलिंग की पूजा का बहुत महत्व होता है। सावन में श्रद्धा और सही विधि से शिवलिंग की पूजा करने से भगवान भोलेनाथ जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।  वैदिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में सावन मास की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से होगी और यह 28 अगस्त 2026 को समाप्त होगा। सावन के महीने में ही इस साल का आखिरी चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण लगने जा रहा है।


15 दिनों में लगेंगे दो ग्रहण

महज 15 दिनों के अंतराल में दो ग्रहण लगने को धार्मिक और ज्योतिष दृष्टि से खतरनाक माना जा रहा है। सावन की पूर्णिमा और अमावस्या तिथि पर यह ग्रहण लगने जा रहा है। पूर्णिमा और अमावस्या तिथि को दान पुण्य और पूजा पाठ के लिहाज से खास माना गया है।  पंचांग के अनुसार, सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को अमावस्या तिथि पर लगेगा, जबकि 28 अगस्त को पूर्णिमा तिथि के दिन चंद्रग्रहण लगेगा। हालांकि यह दोनों ही ग्रहण भारत में अदृश्य रहेंगे। 


12 अगस्त को लगेगा सूर्य ग्रहण

12 अगस्त को सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार, रात में 8 बजकर 4 मिनट पर आरंभ होगा और मध्य रात्रि रात में 1 बजकर 7 मिनट पर समाप्त होगा। वहीं चंद्रग्रहण 28 अगस्त को भारतीय समय अनुसार, सुबह में 8 बजकर 4 मिनट पर आरंभ होगा और सुबह में 11 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगा। खगोलीय दृष्टि से भले ही यह एक सामान्य घटना है, लेकिन ज्योतिष और पौराणिक मान्यताओं में ग्रहण की घटना को राशि, विश्व, मौसम और राजनीति के लिए बड़े बदलावों, उठापटक या संकट का सूचक माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, अगर दो ग्रहण 15 दिनों के भीतर लगते हैं, तो यह जनमानस के लिए आर्थिक परेशानी, महंगाई, प्राकृतिक आपदाओं या युद्ध जैसी परिस्थितियां पैदा कर सकता है।


महाभारत युद्ध से पहले भी 15 दिनों में लगे थे दो ग्रहण

बताया जा रहा है कि महाभारत युद्ध से पहले भी 15 दिनों के भीतर दो ग्रहण का संयोग बना था।. वहीं अगस्त में लगने वाले दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे, ऐसे में इसका अधिक नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा. लेकिन देश-दुनिया के लिए यह महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी समय हो सकता है।  वहीं सावन महीने की बात करें तो माना जाता है कि जो व्यक्ति सावन में सच्चे मन से शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है।

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