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13 साल से जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ये बड़ा फैसला

  • Edited By Monika,
  • Updated: 12 Mar, 2026 01:06 PM
13 साल से जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ये बड़ा फैसला

नारी डेस्क : जिंदगी और मौत का फैसला आमतौर पर इंसान के हाथ में नहीं होता। हर व्यक्ति को उतनी ही जिंदगी जीनी पड़ती है जितनी किस्मत में लिखी होती है। हालांकि कई बार लोग निराशा में आकर अपनी जिंदगी खुद खत्म कर लेते हैं, लेकिन इच्छामृत्यु जैसे मामलों में कानून और अदालत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी बीच भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक ऐतिहासिक मामला सामने आया है। Supreme Court of India ने गाजियाबाद के रहने वाले 32 वर्षीय हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी है। अदालत ने All India Institute of Medical Sciences, नई दिल्ली को निर्देश दिया है कि हरीश राणा को अस्पताल में भर्ती कर उनके लाइफ सपोर्ट सिस्टम को हटाने की प्रक्रिया पूरी की जाए। यह भारत के इतिहास में पहली बार है जब एम्स में किसी मरीज को अदालत के आदेश पर पैसिव यूथनेसिया देने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

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सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हरीश राणा की स्थिति को देखते हुए उन्हें निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी जा सकती है। अदालत ने एम्स नई दिल्ली को निर्देश दिया कि मरीज को भर्ती कर सभी मेडिकल प्रोटोकॉल के साथ लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने की प्रक्रिया पूरी की जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि अस्पताल को इस प्रक्रिया के लिए जरूरी सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

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एम्स ने क्या कहा

इस फैसले पर अस्पताल की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। एम्स की पीआईसी (PIEC) मीडिया सेल की इंचार्ज प्रोफेसर रीमा दादा ने इस मामले पर ज्यादा टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि अस्पताल माननीय अदालत के आदेशों का पालन करेगा। इससे साफ है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार एम्स में ही यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

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13 साल से कोमा में हैं हरीश राणा

हरीश राणा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले हैं। साल 2013 में Panjab University में पढ़ाई के दौरान चंडीगढ़ में एक पीजी हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के कारण उन्हें गंभीर ब्रेन इंजरी हो गई थी। इलाज के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और वे कोमा में चले गए। पिछले 13 वर्षों से वे मशीनों के सहारे सांस ले रहे हैं और उनकी स्थिति को डॉक्टरों ने परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट बताया है।

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माता-पिता ने लगाई थी इच्छामृत्यु की याचिका

लंबे समय से बेटे की गंभीर स्थिति और सुधार की उम्मीद न होने के कारण हरीश राणा के माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति के लिए याचिका दायर की थी। अब अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।
 

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