नारी डेस्क: बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री रानी मुखर्जी आज भी अपने किरदारों और अभिनय की वजह से दर्शकों के दिलों में खास जगह रखती हैं। 21 मार्च 1978 को मुंबई में जन्मी रानी मुखर्जी ने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा और तीन दशक तक सिनेमा पर राज किया। उनका करियर संघर्ष, मेहनत और सशक्त महिलाओं के किरदारों को जीवंत बनाने की कहानी है।
फिल्मी परिवार के बावजूद पिता का विरोध
रानी मुखर्जी फिल्मी बैकग्राउंड से आती हैं। वह मशहूर निर्देशक राम मुखर्जी की बेटी और अभिनेत्री तनुजा की भतीजी हैं। बावजूद इसके उनके पिता राम मुखर्जी नहीं चाहते थे कि रानी फिल्मों में जाएं। रानी कहती हैं कि पेरेंट्स का पहला फर्ज बच्चों की सुरक्षा करना होता है। उस समय फिल्म इंडस्ट्री का माहौल आसान नहीं था और पिता को डर था कि बेटी इस उद्योग के उतार-चढ़ाव को संभाल नहीं पाएगी।
करियर की शुरुआत और शुरुआती संघर्ष
रानी मुखर्जी ने अपने पिता के निर्देशन में बनी बंगाली फिल्म “बियेर फूल” (1996) से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने हिंदी फिल्म “राजा की आएगी बारात” से बॉलीवुड में कदम रखा। शुरुआत में उन्हें उनके कद-काठी, रंग और आवाज को लेकर मजाक का सामना करना पड़ा। कई लोगों ने कहा कि वह “हीरोइन बनने के लायक नहीं हैं।” रानी ने इस पर कहा, “इंडस्ट्री ने मेरी आवाज को डब कर दिया, लेकिन फैंस ने दिल से सराहा। उनके प्यार और समर्थन ने आलोचकों की बोलती बंद कर दी।”
टर्निंग पॉइंट: “कुछ कुछ होता है”
1998 में रिलीज हुई फिल्म “कुछ कुछ होता है” रानी के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। काजोल और शाहरुख खान के साथ सीमित स्क्रीन टाइम के बावजूद रानी ने टीना मल्होत्रा के किरदार से दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। इसी फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस अवॉर्ड मिला।
चुनौतीपूर्ण और विविध किरदार
रानी मुखर्जी ने खुद को सिर्फ रोमांटिक फिल्मों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने लगातार अलग-अलग और जोखिम भरे किरदार चुने। ब्लैक (2005) – अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया। नो वन किल्ड जेसिका, मर्दानी, साथिया, बंटी और बबली, मिसेस चटर्जी वर्सेस नार्वे जैसी फिल्मों से उन्होंने अपनी बहुआयामी प्रतिभा साबित की। इन फिल्मों के लिए उन्हें 8 फिल्मफेयर अवॉर्ड्स और नेशनल अवॉर्ड भी मिले। नेशनल अवॉर्ड उन्होंने अपने पिता को समर्पित किया, जिन्हें वह हमेशा अपने सबसे बड़े सपोर्ट सिस्टम के रूप में याद करती हैं।
संघर्ष और सशक्त महिला किरदार
रानी ने कभी स्टारडम को अपना लक्ष्य नहीं बनाया। उनका मकसद हमेशा अच्छे और सशक्त किरदारों को दर्शकों तक पहुंचाना था। उन्होंने ऐसे किरदार चुने जो समाज को चुनौती दें, सवाल खड़े करें और महिलाओं की ताकत दिखाएं। रानी कहती हैं, “मुझे कभी एक्ट्रेस बनने का सपना नहीं था। बस मुझे मम्मी-पापा को अच्छी जिंदगी देना थी। फिर अवसर मिला और मैंने अपने इंसानी और औरत वाले इंस्टिंक्ट को फॉलो किया।”

सहयोगियों और सह-कलाकारों के साथ रिश्ते
रानी मुखर्जी ने छोटे उम्र में ही बड़े स्टार्स के साथ काम किया। शाहरुख खान, आमिर खान और सलमान खान जैसे दिग्गजों के साथ उनके संबंध हमेशा ईमानदार और गहरे रहे। आमिर के साथ फिल्म गुलाम में काम करना रोमांचक अनुभव था। सलमान खान हमेशा मासूम और ईमानदार लगते हैं। शाहरुख की मेहनत, अनुशासन और दूसरों के प्रति सम्मान उन्हें स्पेशल बनाता है।
सफलता के मूल मंत्र
अपने 30 साल के करियर में रानी ने ईमानदारी और मेहनत से अपने किरदारों को निभाया। उनके पिता ने उन्हें सिखाया था कि सफलता मिले तो उत्साहित न हों और असफलता आए तो हताश न हों। रानी का कहना है, “मैंने हमेशा सर ऊंचा रखकर ईमानदारी से काम किया और अपने क्राफ्ट और कहानियों के प्रति समर्पित रही।”
रानी मुखर्जी की कहानी यह दिखाती है कि संघर्ष, समर्पण और अपनी राह पर दृढ़ता से चलने से कोई भी बाधा पार की जा सकती है। वह न सिर्फ बॉलीवुड में बल्कि दर्शकों के दिलों में भी हमेशा एक प्रेरक और सशक्त अभिनेत्री के रूप में जिंदा रहेंगी।