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मेवाड़ घराने की वो खूबसूरत राजकुमारी, जो 5 साल की उम्र से झेल रही इस बीमारी को

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 20 Jan, 2026 04:21 PM
मेवाड़ घराने की वो खूबसूरत राजकुमारी, जो 5 साल की उम्र से झेल रही इस बीमारी को

नारी डेस्क: "टाइप 1 डायबिटीज (T1D) से पीड़ित किसी भी बच्चे को कभी ऐसा महसूस नहीं होना चाहिए कि उसकी ज़िंदगी खत्म हो गई है" यह कहना है उदयपुर के पूर्व शाही परिवार मेवाड़ घराने की बेटी पद्मजा कुमारी परमार जिन्हें बेहद ही छोटी उम्र में बड़ी बीमारी हो गई थी।  पद्मजा कुमारी परमार को अमहाराणा प्रताप की वंशज  के तौर पर जाना जाता है। वह भले ही बेहद संपन्न परिवार से आती हों, लेकिन उनकी पहचान सादगी, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी है।

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पाच साल में हो गई थी टाइप 1 डायबिटीज 

पद्मजा सिर्फ़ पाच साल की थीं जब उन्हें T1D का पता चला था और वह कहती हैं कि इस बीमारी के साथ जीना कोई बड़ी बात नहीं है। वह कहती हैं कि- मैं 40 साल से ज्यादा समय से टाइप 1 डायबिटीज के साथ कॉम्प्लीकेशन के बिना पूरी हेल्दी और एक्टिव लाइफ जी रही हूं। सामान्यतौर पर कोई भी व्यक्ति, जो जागरूकता के साथ स्वस्थ जीना चाहता है, वो इस बीमारी के साथ आराम से जीवन बिता सकता है। टाइप 1 डायबिटीज के किसी भी मरीज की तरह मेरे लिए भी इंसुलिन एक जीवनरक्षक दवा है, जो इसकी गंभीर दिक्कतों से दूर रहने में मदद करती है।


40 साल से लड़ रही है इस बीमारी से

पद्मजा इस बीमारी से लड़ रहे मरीजों को प्रेरित करते हुए कहती हैं- मेरे लिए लाइफ में फिजिकल, इमोशनल या किसी भी तरह का कंट्रोल बनाए रखने के लिए क्लियरिटी होना आवश्यक है।  मेरे लिए शारीरिक रूप से एक्टिव रहने के साथ मानसिक और भावनात्मक रूप से स्वस्थ रहना भी जरूरी है।  वह कहती हैं कि मुझे इस बीमारी के बिना अपनी जिंदगी याद ही नहीं है।

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कौन है पद्मजा 

महाराणा प्रताप के वंशज अरविंद सिंह के तीन बच्चे हैं, जिसमें दो बेटियां और एक बेटा है। देखने में अप्सरा जैसी उनकी छोटी बेटी पद्मजा कुमारी परमार परंपरा और आधुनिकता दोनों की मिसाल हैं। शाही खानदान से होने के बावजूद वो अपने संस्कारों और परंपराओं से जुड़ी हुई हैं। वह भारतीय संस्कृति, इतिहास और विरासत के संरक्षण को अहम मानती हैं। शानो-शौकत से दूर रहकर सरल, अनुशासित और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीना उनकी खासियत मानी जाती है। पद्मजा कुमारी परमार इस बात की मिसाल हैं कि वंश, वैभव और आधुनिकता के बीच संतुलन कैसे बनाया जा सकता है। सादगी, संस्कार और सेवा—यही उनकी पहचान है, जो उन्हें आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बनाती है।

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