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महाशिवरात्रि पर भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना नाराज हो सकते हैं भगवान शिव

  • Edited By Monika,
  • Updated: 08 Feb, 2026 05:13 PM
महाशिवरात्रि पर भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना नाराज हो सकते हैं भगवान शिव

नारी डेस्क : महाशिवरात्रि भगवान शिव की आराधना का सबसे पावन और विशेष पर्व माना जाता है। यह दिन भक्ति, तप, संयम और आत्मशुद्धि का प्रतीक है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पूजा के दौरान की गई छोटी-सी गलती भी आपके व्रत और पूजा के फल को प्रभावित कर सकती है? आइए जानते हैं साल 2026 में महाशिवरात्रि की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा से जुड़ी वे अहम सावधानियां, जिनका पालन करना बेहद जरूरी है।

महाशिवरात्रि 2026 की तिथि और शुभ समय

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी 2026 को शाम 05:04 बजे से शुरू होकर 16 फरवरी को शाम 05:34 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार 15 फरवरी 2026, रविवार को महाशिवरात्रि का व्रत और पूजा की जाएगी।

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शिवलिंग पर भूलकर भी न चढ़ाएं ये चीजें

महादेव की पूजा में कुछ वस्तुओं का प्रयोग वर्जित माना गया है।
शिवलिंग पर सिंदूर या कुमकुम अर्पित न करें
शंख से जल अर्पित करना वर्जित है
तुलसी के पत्ते शिवलिंग पर न चढ़ाएं
केतकी फूल का भी प्रयोग न करें
मान्यता है कि ये वस्तुएं शिव की वैराग्य प्रकृति के विपरीत मानी जाती हैं और पूजा का फल घटा सकती हैं।

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अभिषेक करते समय रखें इन बातों का ध्यान

शिवलिंग का अभिषेक तांबे के लोटे से करना श्रेष्ठ माना जाता है
दूध से अभिषेक करते समय तांबे के पात्र का प्रयोग न करें, इसके लिए स्टील या चांदी का बर्तन बेहतर होता है
जलधारा हमेशा धीमी और निरंतर होनी चाहिए
शिवलिंग पर चढ़ाए गए प्रसाद को स्वयं न खाएं, बल्कि जरूरतमंदों में बांट दें
इन नियमों का पालन करने से अभिषेक विधिपूर्वक और फलदायी होता है।

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व्रत के दौरान खान-पान और व्यवहार

महाशिवरात्रि का व्रत केवल भूखा रहने का नहीं, बल्कि मन और विचारों की शुद्धि का भी प्रतीक है।
इस दिन प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन से दूर रहें
केवल सात्विक फलाहार ग्रहण करें
क्रोध, नकारात्मक विचार और अपशब्दों से बचें
किसी का अपमान या मन में द्वेष न रखें
शिव केवल बाहरी पूजा से नहीं, बल्कि शुद्ध मन और सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न होते हैं।

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परिक्रमा और पूजन से जुड़े अन्य जरूरी नियम

शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं की जाती
जलाधारी को कभी लांघना नहीं चाहिए
हमेशा आधी परिक्रमा करके ही लौटें
टूटे या खंडित चावल (अक्षत) न चढ़ाएं
पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का शुद्ध उच्चारण करें
इन नियमों का श्रद्धा से पालन करने पर महादेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन के कष्ट दूर होने लगते हैं।
 

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