
नारी डेस्क: भारत 15 अगस्त को अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। लाल किले की प्राचीर पर प्रधानमंत्री द्वारा झंडा फहराने से लेकर हर घर, स्कूल और दफ्तर तक हर जगह हमारा सम्मानित राष्ट्रीय ध्वज दिखाई देता है। तिरंगे को फहराना भारत की एकता और अंग्रेजों से मिली उस मुश्किल से हासिल हुई आज़ादी का प्रतीक है, जो 1947 में लगभग 200 साल के ब्रिटिश शासन के बाद मिली थी। क्या आप जानते हैं कि हमारा यह प्यारा राष्ट्रीय ध्वज कैसे बना?

रंगों का मतलब
झंडे के रंगों का खास महत्व है केसरिया रंग भारत की ताकत और हिम्मत का प्रतीक है। बीच की पट्टी सफ़ेद है, जो शांति और सच्चाई को दिखाती है, जबकि नीचे की गहरे हरे रंग की पट्टी उपजाऊ ज़मीन से हमारे गहरे जुड़ाव को दर्शाती है, जो विकास और शुभता का प्रतीक है। बीच की सफ़ेद पट्टी पर अशोक चक्र भी बना है, जो गति और प्रगति का प्रतीक है। आज हम जिस तिरंगे को सलाम करते हैं उसके पीछे एक व्यक्ति का हाथ था। वे थे पिंगली वेंकय्या, जिन्होंने 1921 में इसका पहला डिज़ाइन तैयार किया था। सिस्टर निवेदिता द्वारा डिज़ाइन किया गया पहला राष्ट्रीय ध्वज कलकत्ता के पारसी बागान स्क्वायर में फहराया गया था। यह स्वदेशी आंदोलन के दौरान ब्रिटिश सामान के विरोध का प्रतीक था। इस झंडे में तीन रंग और खास निशान थे: सबसे ऊपर हरी पट्टी जिसमें आठ कमल बने थे, बीच में पीली पट्टी जिस पर 'वंदे मातरम' लिखा था, और सबसे नीचे लाल पट्टी जिसमें अर्धचंद्र और सूरज बने थे।
पहले बने थे ये डिजाइन
राष्ट्रीय ध्वज का दूसरा रूप 1906 में तब देखने को मिला, जब मैडम भीकाजी कामा ने जर्मनी के स्टटगार्ट में इंटरनेशनल सोशलिस्ट कांग्रेस में इसे फहराया। वह भारत की आज़ादी के लिए समर्थन जुटा रही थीं। इस झंडे को 'बर्लिन कमिटी फ़्लैग' भी कहा जाता है। इस झंडे में सबसे ऊपर नारंगी पट्टी पर आठ तारे थे, बीच में पीली पट्टी पर 'वंदे मातरम' लिखा था और सबसे नीचे हरी पट्टी थी, जिसके कोने में अर्धचंद्र और तारा बना हुआ था।होम रूल आंदोलन के दौरान 1917 में तीसरा झंडा सामने आया। एनी बेसेंट और बाल गंगाधर तिलक ने इस नए झंडे को फहराया, जो भारत की ज़्यादा स्वायत्तता की मांग को दिखाता था। इस झंडे में नौ आड़ी पट्टियां थीं पांच लाल और चार हरी और कोने में ब्रिटिश झंडा बना था। इसमें सात तिरछे तारे, एक अर्धचंद्र और तारा, और बाईं ओर एक काला खड़ा त्रिकोण भी बना हुआ था। यह झंडा पिंगली वेंकय्या का पहला डिज़ाइन था। उन्होंने इसे महात्मा गांधी को दिखाया था।

पहले चरखे की जगह था धर्म चक्र
इस झंडे में सफ़ेद, हरे और लाल रंग की पट्टियां थीं और बीच में एक चरखा बना था, जो भारत की एकता और तरक्की का प्रतीक था। लेकिन इंडियन कांग्रेस कमिटी ने इसे आधिकारिक झंडे के तौर पर नहीं अपनाया। यह दूसरा डिज़ाइन था जिसे पिंगली वेंकैया ने दोबारा पेश किया। यह मौजूदा डिजाइन जैसा ही था, इसे कांग्रेस कमेटी की बैठक में मंजूरी मिली और आधिकारिक तौर पर कमेटी के झंडे के रूप में अपनाया गया। मौजूदा डिजाइन के रंग पिंगली के दूसरे डिजाइन जैसे ही रहे, बस उसमें थोड़ा सा बदलाव किया गया चरखे की जगह धर्म चक्र को शामिल किया गया।