
नारी डेस्क: अगर आप मुंबई, बेंगलुरु, पुणे या दिल्ली-NCR में रहते हैं तो इस गर्मी में आपको Diet Coke का कैन मिलना मुश्किल हो जाएगा। मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध ने तेल की सप्ला दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं और कई सेक्टरों को पहले ही हिलाकर रख दिया है अब इसका असर हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़ी एक और चीज़ पर पड़ रहा है वह है Diet Coke। यह ड्रिंक मुंबई, बेंगलुरु, पुणे और दिल्ली-NCR के कुछ हिस्सों जैसे शहरों में दुकानों से तेज़ी से गायब हो रही है।
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Diet Coke की उपलब्धता पर असर एल्युमिनियम कैन की कमी की वजह से पड़ा है। यह कमी ईरान युद्ध के कारण सप्लाई में आई रुकावटों की वजह से हुई है, और अब इसका असर पूरे देश की दुकानों की शेल्फ पर दिखाई दे रहा है। मुंबई, बेंगलुरु, पुणे और दिल्ली-NCR के कुछ हिस्सों समेत कई शहरों में यह शुगर-फ्री ड्रिंक स्टॉक से बाहर हो गई है, जबकि गर्मियों के पीक सीज़न में इसकी मांग तेज़ी से बढ़ रही है। रिटेलर्स का कहना है कि वीकेंड पर हालात और भी खराब हो गए, और जो थोड़ा-बहुत स्टॉक आया, वह लगभग तुरंत ही बिक गया।
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हालांकि कैन की कमी का असर कई तरह के ड्रिंक्स पर पड़ रहा है, लेकिन इंडस्ट्री के अधिकारियों ने बताया कि Diet Coke की पैकेजिंग का तरीका और इसकी तेज़ी से बढ़ती लोकप्रियता ने इसे इस समस्या के प्रति और भी ज़्यादा संवेदनशील बना दिया है। एक बड़ा फैक्टर यह है कि डाइट कोक लगभग पूरी तरह से कैन में ही बिकता है, जबकि कोक, थम्स अप और पेप्सी जैसे दूसरे एरेटेड ड्रिंक्स PET बोतलों और वापस की जा सकने वाली कांच की बोतलों में भी मिलते हैं। एल्युमीनियम कैन पर निर्भरता ने कंपनी को मौजूदा सप्लाई की कमी के प्रति ज़्यादा कमज़ोर बना दिया है। इस कमी को पूरा करने के लिए, बेवरेज कंपनियां एल्युमीनियम कैन के लिए UAE, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों जैसे विदेशी बाज़ारों की ओर रुख कर रही हैं।