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किसान की बेटी: कभी किताब खरीदने के भी नहीं थे पैसे, बिना कोचिंग क्रैक की UPSC परीक्षा

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 29 Jun, 2020 01:34 PM
किसान की बेटी: कभी किताब खरीदने के भी नहीं थे पैसे, बिना कोचिंग क्रैक की UPSC परीक्षा

कुछ कर दिखाने का जज्बा व हौंसला हो तो मुसीबत भी डरकर घुटने टेक देती है। इसकी जीती जाती मिसाल है एनीस कनमनी जॉय (Annies Kanmani Joy), जिन्होंने कोचिंग दूसरे अटैंप्ट में ही UPSC परीक्षा क्रैक कर ली। मगर, यहां तर पहुंचने का उनका सफर काफी संघर्ष भरा था लेकिन उनकी हिम्मत और मेहनत के आगे कोई भी मुसीबत टिक नहीं पाई। चलिए आपको बताते हैं एक किसान की बेटी के यूपीएससी परीक्षा पास करने की संघर्ष और प्रेरणा से भरपूर कहानी...

मजदूर मां और पिता किसान

केरल के छोटे से गांव पिरवोम की रहने वाली जॉय गरीबी में पली-बढ़ी। उनके पिता किसान और मां खेत में मजदूरी करती हैं। घर की हालात ठीक ना होने की वजह से कभी उनके पास किताबें खरीदने के भी पैसे नहीं हुआ करते थे। मगर, सभी बाधाओं को पीछे छोड़ UPSC परीक्षा पास कर वह हर किसी के लिए मिसाल बन गई हैं। यूपीएससी सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं में से एक है और जॉय ने राष्ट्रीय स्तर पर 65 वीं रैंक हासिल की है।

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बचपन से बनना चाहती थीं डॉक्टर

जॉय बचपन से ही पढ़ाई में होशियार थी और डॉक्टर बनना चाहती थी। उन्होंने गांव से केरल SSLC की परीक्षा और एर्नाकुलम जिले से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने MBBS की परीक्षा की तैयारी शुरू की लेकिन उनका पहला अटैंप्ट असफल रहा। इसके बाद उन्होंने B.Sc. नर्सिंग कोर्स किया और नर्स बन गई।

रेल यात्रा के दौरान जाना आईएएस परीक्षा के बारे में

मगर, कहीं ना कहीं जॉय अपनी नौकरी से खुश नहीं थी। एक बार जब वह ट्रेन में सफर कर रही थी तो उन्होंने 2 लोगों को यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के बारे में बात करते हुए सुना। इसके बाद उन्होंने इसकी परीक्षा देने की ठान ली। फिर क्या था जॉय परीक्षा की तैयारी में लग गई।

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न किताबें थी, न प्रतियोगी मैग्जीन्स

मगर, जॉय के सामने सबसे बड़ी परेशानी थी किताबें। तंगी के चलते उनके पास किताबें व प्रतियोगी मैग्जीन्स खरीदने के पैसे नहीं थे। ऐसे में उन्होंने अखबार का सहारा लिया। वह कई घंटे तक अखबार पढ़ती थी, खासकर एडिटोरियल पेज और करंट अफेयर्स। तमाम योजनाओं और सुविधाओं के साथ उन्हें कई और जानकारी भी मिलती रही।

पहले प्रयास से हुई नाखुश

अपने पहले प्रयास में, उन्होंने 580 वीं रैंक हासिल की लेकिन अपने परिणाम से निराश होकर उन्होंने दोबारा परीक्षा दी। फिर क्या था दूसरे अटैंप्ट में उन्होंने 65 वीं रैंकिंग हासिल कर ली।

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एनीस कनमनी जॉय की कहानी हर उसकी लड़की के लिए मिसाल है जो बाधाओं से डरकर अपना सपना छोड़ देती है। जॉय ने साबित कर दिखाया कि कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ, कुछ भी संभव है।

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