नारी डेस्क: एक नई स्टडी के अनुसार देश में दिल्ली के निवासियों की त्वचा की कसावट सबसे तेज़ी से कम हो रही है। प्रदूषण, खारा पानी और लंबे समय तक UV रेडिएशन के संपर्क में रहना त्वचा के समय से पहले बूढ़े होने के मुख्य कारण हैं। 'निंजेन स्किन साइंसेज' ने 'ऑरिगा रिसर्च' के साथ मिलकर यह स्टडी की। इसे भारत की सबसे बड़ी AI-आधारित स्किन स्टडी में से एक माना जा रहा है। इसमें देश भर में त्वचा की सेहत के पैटर्न को समझने के लिए 725 शहरों के 21,373 वयस्कों का विश्लेषण किया गया।
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त्वचा के साथ हो रही है ये दिक्कतें
शोधकर्ताओं ने त्वचा की सेहत से जुड़े 12 पैमानों - जैसे झुर्रियां, डार्क सर्कल, कसावट, लचीलापन, डिहाइड्रेशन और पिगमेंटेशन का मूल्यांकन करने के लिए SkinSensAI प्लेटफॉर्म के ज़रिए AI-आधारित फेशियल स्कैन का इस्तेमाल किया। नतीजों के अनुसार भारत में त्वचा की कसावट में कमी की गंभीरता का स्कोर दिल्ली में सबसे ज़्यादा (5 में से 4.11) दर्ज किया गया, जबकि कोलकाता में यह 3.49 और राष्ट्रीय औसत 3.62 था। शोधकर्ताओं का कहना है कि इसका मतलब है कि कोलकाता के निवासियों की तुलना में दिल्ली के निवासियों की त्वचा की कसावट में कमी की गंभीरता लगभग 18 प्रतिशत ज़्यादा थी। यह नतीजा औसत कसावट स्कोर की तुलना पर आधारित है और बताता है कि राजधानी में त्वचा के समय से पहले बूढ़े होने में पर्यावरणीय कारक भूमिका निभा सकते हैं।
डार्क सर्कल्स सबसे आम समस्या
शोधकर्ताओं ने कहा कि ये नतीजे क्षेत्र-विशेष के अनुसार स्किनकेयर तरीकों की जरूरत को उजागर करते हैं और दिल्ली के लिए एंटी-पॉल्यूशन स्किनकेयर समाधानों को एक मुख्य आवश्यकता के रूप में चिह्नित करते हैं। नेशनल लेवल पर, स्टडी में पाया गया कि 79 प्रतिशत भारतीय कम से कम एक मध्यम स्तर की स्किन समस्या से जूझ रहे हैं, जबकि लगभग 70 प्रतिशत लोग डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) से परेशान हैं। रिसर्चर्स ने ऑयली और डिहाइड्रेटेड स्किन के बीच के ओवरलैप को देश के स्किनकेयर मार्केट में सबसे ज़्यादा नजरअंदाज किए गए गैप में से एक माना है। डार्क सर्कल्स सबसे आम समस्याओं में से एक के रूप में सामने आए, जिनसे 66.6 प्रतिशत पार्टिसिपेंट्स प्रभावित थे; इसमें नींद की कमी के बजाय जेनेटिक्स, पिगमेंटेशन और लाइफस्टाइल से जुड़े कारण ज़्यादा बड़ी भूमिका निभाते पाए गए।
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पुरुषों में 22 प्रतिशत तेज़ी से हाे रही एजिंग
स्टडी में यह भी पाया गया कि झुर्रियां 40 की उम्र के बजाय 20 की उम्र में ही बनने लगती हैं, जिससे उम्र बढ़ने (एजिंग) के बारे में आम धारणा पर सवाल उठता है। पुरुषों में महिलाओं की तुलना में 22 प्रतिशत तेज़ी से एजिंग देखी गई और उनमें 23.5 प्रतिशत ज़्यादा UV स्पॉट्स पाए गए। यह स्टडी में देखा गया सबसे बड़ा जेंडर गैप था जिसे रिसर्चर्स ने सनस्क्रीन के कम इस्तेमाल और लंबे समय तक धूप के संपर्क में रहने से जोड़ा। स्किन की कसावट (फर्मनेस), लचीलेपन (इलास्टिसिटी), झुर्रियों और UV-संबंधी पिगमेंटेशन के मामले में उनके स्कोर खराब पाए गए। नतीजों से यह भी पता चला कि स्किन हेल्थ के नतीजों में जेनेटिक्स की भूमिका लगभग 45 प्रतिशत होती है, जबकि बाकी 55 प्रतिशत हिस्सा लाइफस्टाइल की आदतों और स्किनकेयर रूटीन जैसे बदले जा सकने वाले कारकों से प्रभावित होता है।
दिल्ली में सबसे ज्यादा बुरा हाल
रिसर्चर्स ने यह भी बताया कि AI-गाइडेड स्किनकेयर रूटीन से आठ से 12 हफ़्तों के भीतर साफ सुधार दिखाई दिया, जो लंबे समय तक स्किन हेल्थ को बेहतर बनाने में पर्सनलाइज़्ड तरीकों की क्षमता को दिखाता है। पूरे देश में क्षेत्रीय अंतर भी साफ़ तौर पर देखे गए। जहां दिल्ली में स्किन की कसावट में सबसे ज़्यादा कमी दर्ज की गई, वहीं कोलकाता में सबसे ज़्यादा ऑयलीनेस का स्तर देखा गया, और पुणे में डार्क-सर्कल की गंभीरता का स्कोर सबसे ज़्यादा पाया गया। इस स्टडी में 18 साल और उससे ज़्यादा उम्र के वयस्कों को शामिल किया गया था और इसे भारतीय स्किन के लिए आबादी-विशिष्ट बेंचमार्क स्थापित करने के मकसद से डिज़ाइन किया गया था।
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