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क्या गले की गांठ का मतलब हमेशा कैंसर ही होता है? जानिए कब होती है ये समस्या और कैसे करें इसकी जांच

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 16 Jun, 2026 06:20 PM
क्या गले की गांठ का मतलब हमेशा कैंसर ही होता है? जानिए कब होती है ये समस्या और कैसे करें इसकी जांच

नारी डेस्क: गर्दन में गांठ या सूजन कई लोगों के लिए चिंता की बात हो सकती है। अक्सर इसका पता अचानक चलता है जैसे शीशे में देखते समय, शेविंग करते समय, या किसी दोस्त या परिवार के सदस्य के जरिए। इसे देखकर मन में कई सवाल उठते हैं जैसे- "क्या यह गंभीर है? क्या यह कैंसर है? क्या मुझे इसकी जांच करवानी चाहिए?" अच्छी बात यह है कि गर्दन की ज़्यादातर गांठें कैंसर वाली नहीं होतीं और उनका पूरी तरह से इलाज किया जा सकता है, खासकर अगर शुरुआती स्टेज में ही इनका पता चल जाए। 

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गर्दन में गांठ कैसी होती है

गर्दन में गांठ का मतलब है जबड़े और कॉलरबोन के बीच के हिस्से में कोई असामान्य सूजन या उभार। जैसे सामने की तरफ (थायरॉयड ग्रंथि के पास), जबड़े के नीचे, किनारे पर (लिम्फ नोड्स के पास) या अंदर गहराई में, जो दिखाई न दे लेकिन छूने पर महसूस हो गर्दन की गांठों का आकार, बनावट (नरम या सख्त) और हिलने-डुलने की क्षमता (एक जगह स्थिर या हिलने वाली) अलग-अलग हो सकती है। हालांकि कुछ गांठें अपने आप ठीक हो सकती हैं, लेकिन लगातार बनी रहने वाली या बड़ी होती गांठों को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।


 गर्दन में गांठ के आम कारण

लिम्फ नोड्स में सूजन: ये सबसे आम कारण हैं, खासकर बच्चों और युवा वयस्कों में। आमतौर पर संक्रमण (गले, दांत, वायरल) के कारण होता है। ये बुखार या गले में खराश के साथ होती है, आमतौर पर कुछ हफ़्तों में ठीक हो जाता है। 

थायरॉयड ग्रंथि में सूजन: गर्दन के सामने स्थित थायरॉयड में ये समस्याएं हो सकती हैं जैसे घेंघा (Goiter): ग्रंथि का सामान्य रूप से बड़ा होना या थायरॉयड नोड्यूल्स: ग्रंथि के अंदर छोटी गांठें। ये आमतौर पर दर्द रहित होती हैं और धीरे-धीरे बढ़ती हैं।

सिस्ट या लिपोमा: सिस्ट होता है तरल पदार्थ से भरी थैलियां। लिपोमा होता है वसा (fat) से भरे बिनाइन ट्यूमर (जो कैंसर नहीं होते)। दोनों नुकसानदायक नहीं होते और आमतौर पर नरम और हिलने-डुलने वाले होते हैं।

लार ग्रंथियों (Salivary Gland) की समस्याएं: लार ग्रंथियों में रुकावट या संक्रमण के कारण जबड़े के पास दर्दनाक सूजन हो सकती है।

ट्यूमर: बहुत कम मामलों में, गर्दन में गांठ इन कारणों से हो सकती है: थायरॉयड कैंसर, लिम्फोमा, मेटास्टैटिक कैंसर (शरीर के अन्य हिस्सों से फैला हुआ कैंसर) हालांकि यह सुनने में डरावना लग सकता है, लेकिन याद रखें कि गर्दन की बहुत कम गांठें ही कैंसर वाली (malignant) होती हैं, और शुरुआती जांच से बहुत फ़र्क पड़ सकता है।

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डॉक्टर को कब दिखाएं?

अचानक दिखाई देने वाली गर्दन की गांठ चिंताजनक हो सकती है। अगर यह 2–3 हफ़्ते से ज़्यादा समय तक रहे, साइज़ में बढ़ने लगे, सख्त या कड़ा होने लगे। त्वचा के नीचे आसानी से न हिलना, दर्द होना या निगलने/बोलने में परेशानी होना, वज़न कम होना, बुखार या रात में पसीना आना, गर्दन के सामने बिना दर्द वाली गांठ दिखना अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखे, तो इंतज़ार न करें और इसकी जांच करवाएं।

जांच के दौरान क्या होगा?

जांच ​​की प्रक्रिया आसान, सुरक्षित और आमतौर पर बिना चीर-फाड़ वाली (non-invasive) होती है।

शारीरिक जांच (Physical Examination): आपके डॉक्टर सबसे पहले गांठ को छूकर देखेंगे और उसके साइज़, बनावट और दर्द की जाँच करेंगे। वे गले, कान और आस-पास के हिस्सों की भी जांच कर सकते हैं।

गर्दन का अल्ट्रासाउंड: अक्सर सबसे पहले यही इमेजिंग टेस्ट किया जाता है। यह दर्द रहित होता है और इसमें लगभग 10–15 मिनट लगते हैं। इससे पता चलता है कि गांठ ठोस है, सिस्टिक (तरल पदार्थ से भरी) है या मिश्रित है। इससे थायरॉयड नोड्यूल्स, लिम्फ नोड का बढ़ना या सिस्ट का पता लगाने में मदद मिलती है।

FNAC (फाइन नीडल एस्पिरेशन साइटोलॉजी): अगर ज़रूरत हो, तो जांच के लिए सेल्स (कोशिकाओं) को निकालने के लिए गांठ में एक पतली सुई डाली जाती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि गांठ बिनाइन (कैंसर-रहित) है या संदिग्ध

 बायोप्सी या एडवांस्ड इमेजिंग (अगर ज़रूरत हो): बहुत कम मामलों में, अगर गांठ गहरी या जटिल हो, या शुरुआती जांच से पता न चलें तो कोर बायोप्सी, CT स्कैन या गर्दन का MRI करवाने की सलाह दी जा सकती है।


थायरॉयड नोड्यूल्स क्या हैं ?

गर्दन में बिना दर्द वाली और धीरे-धीरे बढ़ने वाली गांठ का एक सबसे आम कारण थायरॉयड नोड्यूल है। ये थायरॉयड ग्रंथि के अंदर की गांठें होती हैं, जिनका पता आमतौर पर स्कैन या शारीरिक जांच के दौरान चलता है। 90% से ज़्यादा मामले बिनाइन (कैंसर-रहित) होते हैं। बहुत से लोग बिना किसी लक्षण के सालों तक इनके साथ रहते हैं। हालांकि, कुछ नोड्यूल्स की वजह से: दिखावट (कॉस्मेटिक) से जुड़ी चिंताएं हो सकती हैं, आस-पास के अंगों पर दबाव पड़ सकता है और निगलने में दिक्कत हो सकती है। गले में गांठ का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता। ज़्यादातर गांठें नुकसानदायक नहीं होतीं और आसानी से ठीक हो जाती हैं। लेकिन बहुत ज़्यादा इंतज़ार करने, खुद से दवा लेने या लक्षणों को नजरअंदाज करने से तनाव बढ़ सकता है और शुरुआती इलाज का मौका हाथ से निकल सकता है।

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