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हर बार सिरदर्द को माइग्रेन न समझें, इन संकेतों से पहचानें कब है चिंता की बात

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 15 Jul, 2026 12:59 PM
हर बार सिरदर्द को माइग्रेन न समझें, इन संकेतों से पहचानें कब है चिंता की बात

नारी डेस्क:  सिरदर्द एक आम समस्या है, जिससे ज्यादातर लोग कभी न कभी परेशान होते हैं। कई बार लोग बार-बार होने वाले सिरदर्द को बिना जांच के माइग्रेन मान लेते हैं, जबकि हर सिरदर्द माइग्रेन नहीं होता। सिर में दर्द होने के पीछे तनाव, नींद की कमी, शरीर में पानी की कमी, साइनस, आंखों पर ज्यादा दबाव या कई अन्य कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सिरदर्द के प्रकार और उसके लक्षणों को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि कुछ स्थितियों में यह किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि सामान्य सिरदर्द और माइग्रेन में क्या अंतर होता है और कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

माइग्रेन और सामान्य सिरदर्द में क्या अंतर होता है

माइग्रेन केवल सिर में दर्द होने की समस्या नहीं है, बल्कि यह एक न्यूरोलॉजिकल कंडीशन है। इसमें अक्सर सिर के एक हिस्से में तेज धड़कन जैसा दर्द महसूस होता है। इसके साथ मतली, उल्टी, तेज रोशनी या तेज आवाज से परेशानी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। वहीं, सामान्य सिरदर्द जैसे टेंशन हेडेक में पूरे सिर में दबाव या कसाव जैसा महसूस होता है। इसमें दर्द आमतौर पर हल्का या मध्यम होता है और माइग्रेन की तरह रोशनी या आवाज के प्रति ज्यादा संवेदनशीलता नहीं होती। अमेरिकन माइग्रेन फाउंडेशन के अनुसार, माइग्रेन का दर्द 4 से 72 घंटे तक रह सकता है और कई बार शारीरिक गतिविधि करने से बढ़ सकता है। जबकि सामान्य सिरदर्द अक्सर कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो जाता है।

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बार-बार सिरदर्द होने के पीछे क्या हो सकते हैं कारण

हर बार सिरदर्द का कारण माइग्रेन नहीं होता। कई बार हमारी रोजमर्रा की आदतें भी सिरदर्द की वजह बन जाती हैं।

तनाव और मानसिक दबाव

लंबे समय तक तनाव में रहने से शरीर की मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ सकता है, जिससे सिर में दर्द शुरू हो सकता है। काम का दबाव, चिंता और मानसिक थकान टेंशन हेडेक का बड़ा कारण बन सकते हैं।

नींद की कमी

अगर आप पर्याप्त नींद नहीं लेते या आपकी नींद की गुणवत्ता खराब है, तो इसका असर सीधे दिमाग पर पड़ सकता है। कम सोने की वजह से सिरदर्द के एपिसोड बढ़ सकते हैं।

शरीर में पानी की कमी

कम पानी पीने से डिहाइड्रेशन हो सकता है, जिससे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बिगड़ सकता है और सिरदर्द की समस्या हो सकती है।

लंबे समय तक स्क्रीन देखना

मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने से आंखों पर दबाव पड़ता है। इससे आंखों की थकान के साथ सिर में दर्द भी महसूस हो सकता है।

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साइनस की समस्या

साइनस संक्रमण या एलर्जी के कारण भी बार-बार सिरदर्द हो सकता है। इसमें अक्सर माथे, आंखों के आसपास या चेहरे के हिस्से में दबाव महसूस होता है।

कब सिरदर्द बन सकता है मेडिकल इमरजेंसी का संकेत

ज्यादातर सिरदर्द गंभीर नहीं होते, लेकिन कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर सिरदर्द के साथ नीचे दिए गए संकेत दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए अचानक बहुत तेज सिरदर्द होना, जैसा पहले कभी महसूस न हुआ हो। सिरदर्द के साथ बोलने या समझने में परेशानी होना। शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन महसूस होना। लगातार उल्टी होना। सिर में चोट लगने के बाद दर्द शुरू होना। बुखार के साथ गर्दन में अकड़न होना। आंखों से धुंधला दिखाई देना या डबल विजन की समस्या होना।

टेंशन हेडेक और माइग्रेन में कैसे करें पहचान

कई लोग टेंशन हेडेक और माइग्रेन को एक जैसा समझ लेते हैं, लेकिन दोनों के लक्षण अलग होते हैं।

टेंशन हेडेक में

पूरे सिर में दबाव या कसाव महसूस होता है। दर्द हल्का से मध्यम हो सकता है। आमतौर पर मतली या उल्टी नहीं होती। व्यक्ति सामान्य काम कर सकता है।

माइग्रेन में

सिर के एक हिस्से में धड़कन जैसा दर्द हो सकता है। मतली और उल्टी की समस्या हो सकती है। तेज रोशनी और आवाज से परेशानी बढ़ सकती है। दर्द इतना ज्यादा हो सकता है कि रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगते हैं। बार-बार होने वाले सिरदर्द से बचने के आसान तरीके सिरदर्द की समस्या को कम करने के लिए जीवनशैली में कुछ छोटे बदलाव मददगार साबित हो सकते हैं।

पर्याप्त पानी पिएं: दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। इससे डिहाइड्रेशन से होने वाले सिरदर्द से बचने में मदद मिल सकती है।

नींद का रखें ध्यान: हर दिन 7 से 9 घंटे की अच्छी नींद लेने की कोशिश करें। सोने और जागने का समय नियमित रखना भी फायदेमंद हो सकता है।

तनाव कम करने की कोशिश करें: योग, मेडिटेशन, गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज और थोड़ी देर आराम करने से तनाव कम किया जा सकता है।

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स्क्रीन टाइम सीमित करें: लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बचें। हर कुछ समय बाद आंखों को आराम देना जरूरी है।

माइग्रेन के ट्रिगर पहचानें: कुछ लोगों में चॉकलेट, प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा कैफीन या कुछ खास खाद्य पदार्थ माइग्रेन को ट्रिगर कर सकते हैं। अपने ट्रिगर पहचानकर उनसे दूरी बनाना मददगार हो सकता है।

सही समय पर जांच है जरूरी: बार-बार होने वाला सिरदर्द हमेशा माइग्रेन नहीं होता। इसके पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। दर्द का सही कारण समझना ही बेहतर इलाज की पहली सीढ़ी है।

अगर सिरदर्द लगातार बढ़ रहा है, बार-बार हो रहा है या उसके साथ कमजोरी, बोलने में परेशानी, देखने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर डॉक्टर की सलाह लेने से गंभीर समस्याओं के खतरे को कम किया जा सकता है।
  
 
 

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