नारी डेस्क : बारिश का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन अपने साथ कई तरह के संक्रमणों का खतरा भी लेकर आता है। इन्हीं में से एक है यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI), जो मानसून के दौरान तेजी से बढ़ने वाली समस्याओं में शामिल है। अगर इस संक्रमण का समय रहते इलाज न कराया जाए या यह बार-बार होने लगे, तो यह किडनी तक पहुंचकर गंभीर नुकसान भी पहुंचा सकता है। आइए जानते हैं डॉक्टर से कि मानसून में यूटीआई क्यों बढ़ता है, इसके लक्षण क्या हैं और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है।
आखिर क्या होता है UTI?
यूटीआई (Urinary Tract Infection) मूत्र मार्ग में होने वाला बैक्टीरियल संक्रमण है। यह संक्रमण आमतौर पर मूत्राशय (ब्लैडर) से शुरू होता है और समय पर इलाज मिलने पर आसानी से ठीक हो जाता है। लेकिन यदि इसे नजरअंदाज किया जाए, तो बैक्टीरिया ऊपर की ओर बढ़कर किडनी तक पहुंच सकते हैं, जिससे गंभीर संक्रमण हो सकता है।
मानसून में क्यों बढ़ जाता है UTI का खतरा?
डॉक्टर के मुताबिक, बारिश के मौसम में कुछ आदतें यूटीआई का जोखिम बढ़ा देती हैं। ठंडे मौसम के कारण लोग कम पानी पीते हैं, जिससे पेशाब गाढ़ा हो जाता है और बैक्टीरिया को पनपने का मौका मिल जाता है। इसके अलावा लंबे समय तक गीले कपड़े पहनना, यात्रा के दौरान पेशाब रोककर रखना और निजी स्वच्छता का ध्यान न रखना भी संक्रमण का खतरा बढ़ाता है।
UTI के शुरुआती लक्षण
अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो इन्हें नजरअंदाज न करें
पेशाब करते समय जलन या दर्द होना।
बार-बार पेशाब आने की इच्छा होना।
थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार पेशाब आना।
पेशाब से तेज बदबू आना।
धुंधला या गंदला पेशाब आना।
पेट के निचले हिस्से या पेल्विक एरिया में दर्द।
कुछ मामलों में पेशाब में खून आना।
कब बन सकता है यह किडनी के लिए खतरा?
अगर यूटीआई का इलाज समय पर नहीं कराया जाता, तो संक्रमण मूत्राशय से ऊपर चढ़कर किडनी तक पहुंच सकता है। इस स्थिति को पायलोनेफ्राइटिस (Pyelonephritis) कहा जाता है। यह किडनी का गंभीर संक्रमण है, जिसका इलाज तुरंत कराना बेहद जरूरी होता है। लंबे समय तक संक्रमण रहने पर किडनी की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है।
किडनी तक संक्रमण पहुंचने पर दिखते हैं ये लक्षण
यदि यूटीआई के साथ नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए
तेज बुखार आना।
ठंड लगना और कंपकंपी होना।
कमर या पसलियों के नीचे एक तरफ तेज दर्द।
मतली और उल्टी होना।
लगातार पेशाब में जलन या दर्द बने रहना।
अत्यधिक कमजोरी और थकान महसूस होना।
किन लोगों में ज्यादा रहता है खतरा?
कुछ लोगों में यूटीआई बार-बार होने और किडनी तक संक्रमण फैलने का जोखिम अधिक होता है।
जैसे, महिलाएं।
डायबिटीज के मरीज।
किडनी स्टोन की समस्या वाले लोग।
बढ़े हुए प्रोस्टेट से पीड़ित पुरुष।
मूत्र मार्ग की संरचनात्मक समस्या वाले मरीज।
गर्भवती महिलाएं।
जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।
मानसून में UTI से बचने के आसान उपाय
बारिश के मौसम में कुछ छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर यूटीआई के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
गीले कपड़े या अंडरगारमेंट्स तुरंत बदलें।
पेशाब को लंबे समय तक बिल्कुल न रोकें।
टॉयलेट इस्तेमाल करने के बाद अच्छी तरह सफाई रखें।
कॉटन के साफ और ढीले अंडरगारमेंट्स पहनें।
बार-बार यूटीआई होने पर स्वयं दवा लेने की बजाय डॉक्टर से जांच कराएं।
एंटीबायोटिक दवाएं केवल डॉक्टर की सलाह पर ही लें।
कब तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए?
यदि यूटीआई के साथ तेज बुखार, कमर में दर्द, पेशाब में खून, बार-बार उल्टी या पेशाब करने में गंभीर परेशानी हो रही है, तो इसे सामान्य संक्रमण समझकर नजरअंदाज न करें। ये संकेत हो सकते हैं कि संक्रमण किडनी तक पहुंच चुका है और तत्काल इलाज की जरूरत है।