
नारी डेस्क: ज़्यादातर लोग जानते हैं कि भारत में पुरुषों में बांझपन की समस्या कुछ सर्जिकल प्रक्रियाओं, शरीर के एंडोक्राइन सिस्टम में हार्मोनल असंतुलन और कीमोथेरेपी से जुड़ी हो सकती है। हालांकि फर्टिलिटी कम होने के कुछ अन्य आम कारण काफी चौंकाने वाले हैं। महिलाओं की फर्टिलिटी (प्रजनन क्षमता) से जुड़ी कोशिशों, टाइमिंग और प्लानिंग पर बहुत ज़्यादा ध्यान दिया जाता है, जबकि असल में पुरुषों के लिए भी फर्टिलिटी बनाए रखने की प्रक्रिया काफी जटिल होती है।

इन कारणों से पैदा होती है समस्या
इसके कारणों में जीवनशैली, मेडिकल और पर्यावरण से जुड़े कारक शामिल हैं। जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं, जैसे धूम्रपान, शराब का सेवन, मोटापा, तनाव और सेहत से जुड़ी खराब आदतें इसमें अहम भूमिका निभाती हैं। इनके अलावा, शहरी जीवन का तनाव, काम के लंबे घंटे और बदलती जीवनशैली पुरुषों की फर्टिलिटी पर तेज़ी से असर डाल रही हैं, और अक्सर इसके शुरुआती लक्षण भी दिखाई नहीं देते। मेडिकल कारणों में हार्मोन का असंतुलन, इन्फेक्शन और दूसरी ऐसी स्थितियां शामिल हैं जो स्पर्म के बनने या उसकी क्वालिटी पर असर डाल सकती हैं। हालांकि, इन स्थितियों के बारे में जानकारी कम है, जिससे बीमारी का पता देर से चलता है। डॉक्टर बताते हैं- पर्यावरण से जुड़े कारण भी चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। शहरीकरण, प्रदूषण के संपर्क में आना और बदलती जीवनशैली पुरुषों की प्रजनन क्षमता (रिप्रोडक्टिव हेल्थ) में धीरे-धीरे गिरावट का कारण बन रहे हैं। कई पुरुषों को यह पता नहीं होता कि रोज़मर्रा की जीवनशैली से जुड़ी आदतें सीधे तौर पर फर्टिलिटी पर असर डाल सकती हैं।
मर्दानगी से जुड़ी गलतफहमी
डॉक्टर बताते हैं- पर्यावरण से जुड़े कारण भी चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। शहरीकरण, प्रदूषण के संपर्क में आना और बदलती जीवनशैली पुरुषों की प्रजनन क्षमता (रिप्रोडक्टिव हेल्थ) में धीरे-धीरे गिरावट का कारण बन रहे हैं। कई पुरुषों को यह पता नहीं होता कि रोज़मर्रा की जीवनशैली से जुड़ी आदतें सीधे तौर पर फर्टिलिटी पर असर डाल सकती हैं। पीढ़ियों से, पुरुषों ने फर्टिलिटी को मर्दानगी से जोड़कर देखा है। इनफर्टिलिटी को स्वीकार करने का मतलब था अपनी हार मानना। इस सोच ने शादियों, आत्मविश्वास और शांति को खत्म कर दिया। लेकिन सच सीधा-सा है इनफर्टिलिटी एक बायोलॉजिकल स्थिति है, न कि पहचान। इसके कारण भी हैं और इलाज भी।

बांझपन का ये है इलाज
भारत में पुरुषों में बांझपन एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। जोड़ों में बांझपन के कुल मामलों में से 40 से 50 प्रतिशत मामले पुरुषों से जुड़े होते हैं। हालांकि, मेडिकल साइंस में हुई तरक्की की वजह से पुरुषों में बांझपन की समस्या को दूर करने और गर्भधारण की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए कई सफल इलाज के तरीके विकसित किए गए हैं। आज भारत में पुरुषों में बांझपन के इलाज के लिए कई तरह के विकल्प मौजूद हैं, जिनमें बेसिक लाइफ़स्टाइल और मेडिकल मैनेजमेंट से लेकर एडवांस्ड असिस्टेड रिप्रोडक्टिव तकनीकें शामिल हैं। कई मामलों में, पहला कदम लाइफ़स्टाइल और मेडिकल मैनेजमेंट होता है, जिसमें न्यूट्रिशनल काउंसलिंग, तनाव कम करना और सेहत में सुधार करना शामिल है।