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चिकन बन सकता है बीमारी की वजह? वैज्ञानिकों ने इस खतरनाक बैक्टीरिया को लेकर दी चेतावनी

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 29 Jul, 2026 11:19 AM
चिकन बन सकता है बीमारी की वजह? वैज्ञानिकों ने इस खतरनाक बैक्टीरिया को लेकर दी चेतावनी

नारी डेस्क: दुनियाभर में चिकन का सेवन बड़े पैमाने पर किया जाता है और इसे प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। लेकिन हाल ही में सामने आई वैज्ञानिक रिसर्च ने चिकन से जुड़े एक ऐसे खतरे की ओर इशारा किया है, जिसे नजरअंदाज करना आपकी सेहत के लिए भारी पड़ सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पोल्ट्री फार्मिंग में तेजी से बढ़ोतरी के चलते कई तरह के बैक्टीरिया पनप रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा चिंता का कारण बना है कैम्पिलोबैक्टर नाम का बैक्टीरिया, जो अब तेजी से फैल रहा है और इंसानों तक पहुंचने का जोखिम बढ़ा रहा है।

क्या है कैम्पिलोबैक्टर और क्यों बढ़ रही है चिंता

कैम्पिलोबैक्टर को दुनियाभर में डायरिया (दस्त) फैलाने वाले प्रमुख बैक्टीरिया में गिना जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि बड़े स्तर पर होने वाली मुर्गी पालन प्रक्रिया इस बैक्टीरिया के बढ़ने के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रही है। ऐसे में इसका इंसानों तक पहुंचना और संक्रमण फैलाना आसान हो जाता है।

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वैज्ञानिकों ने क्यों जारी की चेतावनी

रिसर्च में यह साफ तौर पर कहा गया है कि पोल्ट्री इंडस्ट्री के विस्तार के साथ इस बैक्टीरिया का खतरा लगातार बढ़ रहा है। यह धीरे-धीरे फूड चेन के जरिए इंसानों तक पहुंच सकता है और कई स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर चिकन पूरी तरह से पकाया न जाए तो उसमें मौजूद बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। अधपका या कच्चा चिकन खाना संक्रमण के जोखिम को काफी बढ़ा देता है। इसलिए चिकन को हमेशा अच्छी तरह पकाकर ही खाना चाहिए।

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कैम्पिलोबैक्टर संक्रमण के लक्षण क्या हैं

अगर यह बैक्टीरिया शरीर में पहुंच जाए, तो व्यक्ति को डायरिया, पेट दर्द और आंतों से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। कुछ मामलों में यह इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) जैसी समस्याओं का खतरा भी बढ़ा सकता है। गंभीर स्थिति में मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ सकती है। वैज्ञानिकों ने यह भी चेतावनी दी है कि इस बैक्टीरिया पर कई एंटीबायोटिक्स का असर धीरे-धीरे कम हो रहा है। इसका मतलब है कि भविष्य में इस संक्रमण का इलाज करना पहले से ज्यादा कठिन हो सकता है, क्योंकि दवाएं उतनी प्रभावी नहीं रहेंगी।

30 देशों के डेटा से सामने आई सच्चाई

इस रिसर्च में 1979 से 2024 के बीच 30 देशों के करीब 2800 बैक्टीरियल जीनोम का अध्ययन किया गया। अध्ययन में पाया गया कि 1900 के बाद से मुर्गियों में कैम्पिलोबैक्टर के कुछ स्ट्रेन लगभग 100 गुना तक बढ़ चुके हैं, जो एक गंभीर चेतावनी है। विशेषज्ञों का कहना है कि चिकन को अच्छी तरह पकाकर खाना, कच्चे और पके खाने को अलग रखना और साफ-सफाई का ध्यान रखना इस संक्रमण से बचने के सबसे आसान तरीके हैं। थोड़ी सी सावधानी आपको बड़ी बीमारी से बचा सकती है।

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