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Akanksha Chamola ने खुद को बताया As*xual', बोलीं- फिलहाल न पुरुषों से आकर्षण, न महिलाओं से

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 14 Jul, 2026 01:29 PM
Akanksha Chamola ने खुद को बताया As*xual', बोलीं- फिलहाल न पुरुषों से आकर्षण, न महिलाओं से

नारी डेस्क: रियलिटी शो 'लॉक अप' की कंटेस्टेंट और अभिनेत्री आकांक्षा चमोला एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी और यौनिक पहचान (Sexual Orientation) को लेकर चर्चा में हैं। कुछ समय पहले उन्होंने खुद को बायसेक्शुअल बताया था, लेकिन अब उन्होंने कहा है कि फिलहाल वह खुद को 'ए-सेक्शुअल' (Asexual) मानती हैं। उनका कहना है कि जीवन के इस दौर में उन्हें न पुरुषों के साथ और न ही महिलाओं के साथ शारीरिक या यौन संबंध बनाने की इच्छा महसूस होती है।आकांक्षा ने यह भी कहा कि उनकी सोच में यह बदलाव उनके निजी अनुभवों, खासकर वैवाहिक जीवन और चल रहे तलाक की प्रक्रिया के दौरान आया है।

'लॉक अप' में रिश्तों और दोबारा शादी पर खुलकर की बात

रियलिटी शो के हालिया एपिसोड में आकांक्षा चमोला की बातचीत साथी कंटेस्टेंट वरुण यादव के साथ रिश्तों और भविष्य को लेकर हुई। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह दोबारा शादी करने के बारे में सोचेंगी, तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि फिलहाल ऐसा कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि अपने वैवाहिक अनुभवों के बाद उनके मन में शादी को लेकर डर बैठ गया है। इसी बातचीत के दौरान जब उनकी यौनिक पहचान को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने अपनी वर्तमान भावनाओं के बारे में खुलकर बात की।

"अभी किसी के साथ इंटीमेसी की इच्छा नहीं"

आकांक्षा ने कहा कि उनके अनुसार किसी व्यक्ति की सेक्सुअलिटी जीवन के अलग-अलग चरणों में बदल सकती है। उन्होंने बताया कि इस समय उनकी जिंदगी ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां उन्हें न पुरुषों और न ही महिलाओं के साथ यौन संबंध बनाने की इच्छा होती है। उनका कहना था कि फिलहाल वह खुद को ए-सेक्शुअल मानती हैं और यही उनकी वर्तमान मानसिक और भावनात्मक स्थिति है।

गौरव खन्ना से अलग होने की वजह भी बताई

इससे पहले भी आकांक्षा अपने वैवाहिक जीवन को लेकर खुलकर बात कर चुकी हैं। उन्होंने बताया था कि वह कभी मां नहीं बनना चाहती थीं, जबकि उनके पति गौरव खन्ना भविष्य में बच्चे चाहते थे। आकांक्षा के अनुसार, शादी में दोनों की यह सोच एक-दूसरे से बिल्कुल अलग थी। उनका मानना था कि अगर जीवन की इतनी अहम प्राथमिकताओं पर सहमति नहीं है, तो रिश्ते को आगे बढ़ाना दोनों के लिए मुश्किल हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने साथी को ऐसी स्थिति में नहीं रखना चाहती थीं, जहां उनकी इच्छाएं अधूरी रह जाएं।

पहले खुद को बताया था बायसेक्शुअल

आकांक्षा चमोला इससे पहले यह भी साझा कर चुकी हैं कि वह महिलाओं की ओर आकर्षित महसूस करती रही हैं। उन्होंने कहा था कि उन्हें महिलाओं के साथ भावनात्मक रूप से ज्यादा सुरक्षित और सहज महसूस होता है। उनके अनुसार, महिलाओं के साथ उनका जुड़ाव हमेशा सहज रहा है और वह इस सोच से सहमत नहीं हैं कि महिलाएं एक-दूसरे की अच्छी दोस्त नहीं बन सकतीं। उन्होंने कहा था कि महिलाओं के प्रति उनका सम्मान और अपनापन समाज द्वारा लगाए गए कई पारंपरिक नजरियों से अलग है।

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ए-सेक्शुअलिटी क्या होती है?

ए-सेक्शुअल (Asexual) या अलैंगिकता ऐसी यौनिक पहचान है, जिसमें किसी व्यक्ति को दूसरों के प्रति बहुत कम या बिल्कुल भी यौन आकर्षण महसूस नहीं होता। इसका मतलब यह नहीं है कि ऐसा व्यक्ति प्यार, दोस्ती या भावनात्मक रिश्ते नहीं बना सकता। कई ए-सेक्शुअल लोग रोमांटिक रिश्तों में रहते हैं, शादी करते हैं और सामान्य पारिवारिक जीवन भी जीते हैं। यह एक स्वाभाविक यौनिक पहचान मानी जाती है, न कि कोई बीमारी या मानसिक समस्या। ए-सेक्शुअलिटी एक व्यापक स्पेक्ट्रम है। इसमें कुछ लोग, जैसे डेमीसेक्शुअल (Demisexual), केवल गहरा भावनात्मक जुड़ाव बनने के बाद ही यौन आकर्षण महसूस करते हैं।

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सृति झा भी कर चुकी हैं अपनी पहचान पर खुलकर बात

टीवी अभिनेत्री सृति झा भी कुछ वर्ष पहले अपनी यौनिक पहचान को लेकर सार्वजनिक रूप से बात कर चुकी हैं। उन्होंने अपनी कविता 'Confessions of a Romantic Asexual' के माध्यम से बताया था कि उन्हें प्रेम, अपनापन, गले लगना और भावनात्मक रिश्ते पसंद हैं, लेकिन यौन संबंधों को लेकर उन्होंने कभी वैसी उत्सुकता महसूस नहीं की, जैसी आमतौर पर समाज अपेक्षा करता है। सृति ने अपनी कविता में यह भी कहा था कि लंबे समय तक उन्हें लगा कि शायद उनके साथ कुछ अलग है, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी पहचान को स्वीकार किया और उसी के साथ सहज होना सीखा।

यौनिक पहचान प्रत्येक व्यक्ति का व्यक्तिगत अनुभव और जीवन का निजी पहलू होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय के साथ कुछ लोगों की भावनाएं और स्वयं को लेकर समझ बदल सकती है। ऐसे विषयों पर संवेदनशीलता, सम्मान और सही जानकारी के साथ बात करना जरूरी है, ताकि किसी भी व्यक्ति की पहचान या व्यक्तिगत निर्णय को लेकर पूर्वाग्रह न बने। 

 
 

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