
नारी डेस्क : भारत में अमावस्या की रात को लेकर कई धार्मिक और पारंपरिक मान्यताएं प्रचलित हैं। खासकर इस दिन छोटे बच्चों की नजर उतारने की परंपरा आज भी कई घरों में निभाई जाती है। माना जाता है कि इस काली रात में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, जिसका असर सबसे ज्यादा बच्चों पर पड़ सकता है।
अमावस्या की रात क्यों मानी जाती है खास?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, साल को दो अयन, उत्तरायण और दक्षिणायन में बांटा जाता है, वहीं चंद्रमा के आधार पर महीने को शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में विभाजित किया जाता है। शुक्ल पक्ष में सकारात्मक ऊर्जा और देव शक्तियों का प्रभाव माना जाता है। जबकि कृष्ण पक्ष, खासकर अमावस्या की रात में नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बढ़ने की मान्यता है।

बच्चों की नजर क्यों उतारी जाती है?
मान्यता के अनुसार, अमावस्या की रात में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है और चंद्रमा के दिखाई न देने से वातावरण में मानसिक व भावनात्मक असंतुलन की संभावना भी बढ़ सकती है। ऐसे में छोटे बच्चे, जो स्वभाव से अधिक कोमल और संवेदनशील होते हैं, बाहरी प्रभावों की चपेट में जल्दी आ सकते हैं। यही कारण है कि बड़े-बुजुर्ग बच्चों को नजर दोष और नकारात्मकता से बचाने के लिए इस दिन उनकी नजर उतारने की सलाह देते हैं।
कैसे उतारी जाती है नजर?
नजर उतारने के लिए परंपरागत रूप से कई तरीके अपनाए जाते हैं। आमतौर पर लाल मिर्च, राई (सरसों) या नमक लेकर बच्चे के सिर के ऊपर से सात बार घुमाया जाता है और फिर इन्हें आग में जला दिया जाता है। इसके अलावा, कई लोग बच्चों को बुरी नजर से बचाने के लिए काला टीका भी लगाते हैं। ये तरीके भले ही पारंपरिक हों, लेकिन आज भी लोग इन्हें आस्था और विश्वास के साथ अपनाते हैं।
क्या है वैज्ञानिक नजरिया?
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नजर उतारने की परंपरा का कोई ठोस प्रमाण नहीं है, लेकिन यह लोगों की आस्था और मानसिक संतोष से जुड़ी हुई है। अमावस्या की रात से जुड़ी ये परंपराएं सदियों से चली आ रही हैं। भले ही इनके पीछे वैज्ञानिक आधार न हो, लेकिन आज भी लोग इन्हें विश्वास और परंपरा के रूप में निभाते हैं, खासकर बच्चों की सुरक्षा और भलाई के लिए।