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Nari

पाकिस्तान में 80% Gay! ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट हिना बलूच के बयान ने मचाई हलचल

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 04 Apr, 2026 12:23 PM
पाकिस्तान में 80% Gay! ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट हिना बलूच के बयान ने मचाई हलचल

नारी डेस्क: पाकिस्तान की ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट हिना बलूच का एक वायरल इंटरव्यू सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। इस इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया कि “पाकिस्तान में 80% लोग गे हैं और बाकी 20% बाईसेक्सुअल हैं।” इस चौंकाने वाले बयान ने देश और दुनिया में LGBTQ समुदाय और समाज की सोच को लेकर नई बहस खड़ी कर दी है।

हिना बलूच का दावा: सच्चाई या विवाद?

हिना बलूच के अनुसार पाकिस्तान में लोगों की सेक्सुअलिटी को लेकर एक “खुला राज” है। लोग अपने परिवार, समाज और धर्म की इज़्ज़त के डर से अपनी असली पहचान छिपाते हैं। हिना का कहना है कि कई लोग खुले तौर पर अपनी सेक्सुअल ओरिएंटेशन को स्वीकार नहीं कर पाते। हालांकि, इस दावे को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस चल रही है। कुछ लोग इसे सच मान रहे हैं, तो कुछ इसे अतिशयोक्ति कह रहे हैं।

पाकिस्तान में LGBTQ मुद्दों पर चुप्पी के कारण

पाकिस्तान जैसे समाज में LGBTQ मुद्दा बेहद संवेदनशील है। इसके पीछे मुख्य कारण हैं

धार्मिक मान्यताएं – समाज में धार्मिक नियमों के कारण सेक्सुअल ओरिएंटेशन पर खुलकर बात करना मुश्किल है।

सामाजिक दबाव – लोग अपने परिवार और समाज की उम्मीदों को पूरा करने के लिए अपनी पहचान छिपाते हैं।

पारिवारिक प्रतिष्ठा – परिवार की इज़्ज़त बचाने के लिए लोग खुलकर बात नहीं करते।

इन सभी कारणों से हिना बलूच का बयान समाज में बहस और असहजता दोनों पैदा कर रहा है।

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हिना बलूच का संघर्ष

हिना बलूच खुद को ‘ख्वाजा सिरा’ मानती हैं। बचपन में उन्हें ऐसे माहौल में रहना पड़ा, जहां थर्ड जेंडर समुदाय के लिए विकल्प सीमित और अक्सर शोषण से जुड़े हुए थे, जैसे भीख मांगना या नाचना। लेकिन हिना ने इन सीमाओं को तोड़ा और जेंडर और माइनॉरिटी राइट्स के लिए आवाज उठाई। उन्होंने सामाजिक आंदोलनों में हिस्सा लिया और LGBTQ अधिकारों के लिए काम किया। हिना बताती हैं कि उनका सबसे बड़ा डर यह नहीं था कि लोग उनकी पहचान क्या समझेंगे, बल्कि यह था कि वे खुद को कैसे व्यक्त करें।

कौन हैं हिना बलोच ?

Hina Baloch एक पाकिस्तानी ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट (social activist) हैं।  वह LGBTQ+ और खासकर ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों के लिए आवाज उठाती हैं। वह Pakistan के कराची से जुड़ी रही हैं और “ख्वाजा सिरा” (ट्रांसजेंडर) समुदाय की समस्याओं को सामने लाने के लिए जानी जाती हैं।हिना बलोच ने समाज में मौजूद भेदभाव, हिंसा और ट्रांस लोगों के लिए सीमित अवसरों के खिलाफ खुलकर बोलना शुरू किया। उन्होंने Sindh Moorat March जैसे अभियानों में भाग लिया और Aurat March में भी सक्रिय रहीं, जहां उन्होंने gender equality और minority rights की मांग उठाई।हिना बलोच ने यह भी दावा किया है कि उन्हें अपने एक्टिविज्म की वजह से धमकियों, हिंसा और यहां तक कि किडनैपिंग का सामना करना पड़ा। बाद में वह United Kingdom चली गईं, जहां उन्होंने पढ़ाई (SOAS University of London) की और शरण (refugee status) के लिए आवेदन किया। हिना बलूच का यह बयान केवल विवाद नहीं है, बल्कि यह एक बड़े सामाजिक मुद्दे की ओर इशारा करता है। कुछ लोग मानते हैं कि ऐसे बयान जरूरी हैं क्योंकि ये छिपी हुई समस्याओं को सामने लाते हैं। वहीं, आलोचक कहते हैं कि ऐसे बयान समाज में भ्रम और तनाव भी पैदा कर सकते हैं।

पाकिस्तान छोड़ने की वजह

हिना ने बताया कि अपने एक्टिविज़्म के दौरान उन्हें कई बार हिंसा और धमकियों का सामना करना पड़ा। एक विरोध प्रदर्शन में प्राइड फ्लैग उठाने पर उन्हें गंभीर खतरे झेलने पड़े। इसके बाद उन्होंने पाकिस्तान छोड़ना पड़ा। बाद में हिना को लंदन की SOAS यूनिवर्सिटी में स्कॉलरशिप मिली और उन्होंने UK में शरण ली। वहां से उन्होंने अपने अधिकारों और LGBTQ मुद्दों पर काम जारी रखा।

हिना बलूच का बयान पाकिस्तान में LGBTQ समुदाय की जमी हुई समस्याओं को उजागर करता है। यह बहस समाज, धर्म और पहचान के सवालों को सामने लाती है। हालांकि आंकड़ों की सत्यता पर विवाद है, लेकिन यह बयान निश्चित रूप से लोगों को सोचने पर मजबूर कर रहा है और वैश्विक स्तर पर LGBTQ मुद्दों पर चर्चा को बढ़ावा दे रहा है।  

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