नारी डेस्क: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनी सेहत का ध्यान सहीं से नहीं रख पाते। इसकी वजह से उन्हें कई समस्याएं हो जाती है। इसी बीच एक हाई यूरिक एसिड (High Uric Acid) की समस्या भी आम होती जा रही है। यह सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवा और महिलाएं भी इससे प्रभावित हो रही हैं। इतना ही नहीं गर्भवती महिलाएं भी इससे प्रभावित हो रही है। गर्भावस्था एक ऐसा समय होता है जब महिला के शरीर में कई हार्मोनल और शारीरिक बदलाव होते हैं। इस दौरान कुछ स्वास्थ्य समस्याएं भी सामने आ सकती हैं, जिनमें से एक है हाई यूरिक एसिड। आमतौर पर यूरिक एसिड शरीर में बनने वाला एक वेस्ट प्रोडक्ट होता है, जो किडनी के जरिए बाहर निकल जाता है। लेकिन जब इसकी मात्रा ज्यादा बढ़ जाती है, तो यह मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। इसलिए इसका समय पर पता लगाना और सही देखभाल करना बेहद जरूरी है। चलिए आज हम डॉक्टर से जानते है कि इसके कारण क्या होते है।
यूरिक एसिड क्या होता है?
पहले हम जानते है कि आखिर यूरिक एसिड होता क्या है। यूरिक एसिड एक प्रकार का केमिकल है, जो शरीर में प्यूरीन नामक पदार्थ के टूटने से बनता है। सामान्य स्थिति में यह यूरिन के जरिए बाहर निकल जाता है, लेकिन जब यह शरीर में जमा होने लगता है, तो समस्या पैदा होती है। आज के समय में ये गर्भवती महिलाओं को भी हो रहा है। इसके कई कारण हो सकते है।
गर्भावस्था में हाई यूरिक एसिड क्यों होता है?
डॉक्टर नम्रता गुप्ता के अनुसार, यूरिक एसिड एक नेचुरल वेस्ट सब्सटेंस है, जो तब बनता है जब हमारा शरीर प्यूरीन को तोड़ता है, जो कुछ खास खाने की चीजों और शरीर के नॉर्मल प्रोसेस से आते हैं। आम हालात में, किडनी यूरिक एसिड को फिल्टर करके यूरिन के जरिए शरीर से बाहर निकाल देती है, लेकिन, जब शरीर बहुत ज्यादा यूरिक एसिड बनाता है या किडनी इसे ठीक से नहीं निकाल पाती है, तो खून में इसका स्तर बढ़ जाता है। डॉ. के मुताबिक, हाई यूरिक एसिड कभी-कभी सूजन आने, बेचैनी होने या जोड़ों में दर्द होने का कारण बन सकता है और प्रेग्नेंसी के दौरान यह शरीर पर स्ट्रेस के शुरुआती संकेतों के तौर पर काम कर सकता है, खासकर हाई ब्लड प्रेशर या प्री-एक्लेमप्सिया जैसी कंडीशन में।

गर्भावस्था में हाई यूरिक एसिड के कारण
हार्मोनल बदलाव: प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोन में बदलाव के कारण किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे यूरिक एसिड सही से बाहर नहीं निकल पाता और महिलाओं को ये समस्या हो जाती है।
किडनी की कार्यक्षमता में कमी: कुछ मामलों में किडनी यूरिक एसिड को फिल्टर करने में पूरी तरह सक्षम नहीं होती, जिससे इसका स्तर बढ़ सकता है।
प्री-एक्लेम्पसिया (उच्च रक्तचाप): गर्भावस्था में हाई बीपी की समस्या (प्री-एक्लेम्पसिया) यूरिक एसिड बढ़ने का बड़ा कारण बन सकती है।
गलत खानपान: गर्भावस्था में मां और बच्चे की सेहत के लिए अच्छा खानपान बहुत जरूरी होता है। ज्यादा प्रोटीन, रेड मीट, जंक फूड और मीठी चीजों का सेवन यूरिक एसिड बढ़ा सकता है।
पानी की कमी (डिहाइड्रेशन): कम पानी पीने से शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं, जिससे यूरिक एसिड बढ़ सकता है।
मां की सेहत पर असर
यूरिक एसिड बढ़ने से प्रेग्नेंसी में हाई बीपी की समस्या हो सकती है, जो मां के लिए जोखिम भरी होती है। यह किडनी पर अतिरिक्त दबाव डालता है और उनकी कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। यूरिक एसिड बढ़ने से जोड़ों में सूजन और दर्द की समस्या हो सकती है।
बच्चे की सेहत पर क्या असर होता है?
हाई यूरिक एसिड की वजह से बच्चे का विकास धीमा हो सकता है। यह स्थिति समय से पहले प्रसव का कारण बन सकती है। इतना ही नहीं इस समस्या से प्लेसेंटा में ब्लड फ्लो प्रभावित होता है, जिससे बच्चे तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती।