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वास्तु के हिसाब से ऐसे बनवाएं अपनी किचन, सेहत और स्वाद का यूं लगेगा तड़का

  • Edited By PRARTHNA SHARMA,
  • Updated: 13 Jul, 2025 04:43 PM
वास्तु के हिसाब से ऐसे बनवाएं अपनी किचन, सेहत और स्वाद का यूं लगेगा तड़का

नारी डेस्क: वास्तु शास्त्र का नाम तो आप सभी ने जरूर सुना होगा। यह एक पारंपरिक हिंदू वास्तुशिल्प प्रणाली है जो यह बताती है कि किसी भी भवन या संरचना को किस दिशा में बनाया जाना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण की दिशाएं बहुत महत्वपूर्ण होती हैं। माना जाता है कि वास्तु के नियमों के अनुसार बनाई गई इमारत में हमेशा सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, जो घर के सदस्यों के लिए शुभ होती है। इस शास्त्र में पांच तत्वों आग, हवा, पानी, जमीन और अंतरिक्ष को विशेष महत्व दिया गया है। यही कारण है कि हर निर्माण कार्य में इन तत्वों और दिशाओं का ध्यान रखा जाता है ताकि घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहे।

किचन में ऊर्जा का महत्व

घर के सभी हिस्सों में ऊर्जा होती है, लेकिन किचन को घर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। किचन वह जगह है जहां भोजन बनाया जाता है, जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। इसलिए किचन में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार की ऊर्जा मौजूद रहती है। भोजन ही हमारे शरीर को जीवन देने वाली ऊर्जा का मुख्य स्रोत होता है। इसीलिए किचन के डिजाइन और उसकी स्थिति पर खास ध्यान देना जरूरी होता है ताकि वह ऊर्जा खराब न हो और सेहत पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

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वास्तु के अनुसार किचन की सही दिशा

वास्तु शास्त्र के नियमों के मुताबिक, किचन हमेशा घर के दक्षिण-पूर्वी कोने में बनानी चाहिए। यह दिशा आग के तत्व का प्रतीक है, जो किचन के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। अगर आप किचन को घर के उत्तर-पूर्वी कोने में बनाते हैं, तो इससे दुर्घटना और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

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इसके अलावा, वास्तु शास्त्र में यह भी कहा गया है कि किचन और रेस्टरूम को कभी भी एक साथ नहीं बनाना चाहिए। दोनों को एक-दूसरे से अलग-अलग रखना जरूरी है। रसोईघर में पूर्व और उत्तर दिशा को खाली रखना चाहिए। किचन में खाना हमेशा पूर्व दिशा की ओर बनाना चाहिए क्योंकि इसे शुभ माना जाता है। यह भी ध्यान रखें कि किचन कभी भी बेडरूम, पूजा के कमरे या टॉयलेट के ऊपर या नीचे नहीं होना चाहिए।

किचन के दरवाजे और खिड़कियों का वास्तु में महत्व

किचन के दरवाजे भी वास्तु के अनुसार बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। किचन के दरवाजे का फेस पूर्व, उत्तर या पश्चिम दिशा में होना चाहिए। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और परिवार के सदस्य स्वस्थ रहते हैं। अगर किचन का दरवाजा दक्षिण दिशा में है, तो इससे घर के सदस्यों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। खिड़कियों के मामले में भी दिशा का ध्यान रखना जरूरी है। किचन में खिड़कियां ऐसी जगह लगानी चाहिए जहां से सुबह की सूरज की रोशनी सीधे किचन में आ सके। यह किचन में ताजी हवा और सकारात्मक ऊर्जा लाती है।

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वास्तु शास्त्र की मदद से किचन का सही स्थान और डिजाइन निश्चित करना बहुत जरूरी है। इससे न केवल घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, बल्कि परिवार की सेहत और खुशहाली भी बनी रहती है। इसलिए वास्तु शास्त्र के इन नियमों को ध्यान में रखकर अपने घर की रसोई को बनाएं और सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत करें।

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