नारी डेस्क: डायबिटीज को लेकर लोगों के मन में कई तरह की धारणाएं बनी हुई हैं। सबसे आम धारणा यह है कि यह बीमारी केवल ज्यादा मिठाई या चीनी खाने से होती है और यदि कोई व्यक्ति चीनी खाना पूरी तरह बंद कर दे तो उसका ब्लड शुगर नियंत्रित हो जाएगा। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हकीकत इससे कहीं अधिक जटिल है। टाइप-2 डायबिटीज केवल चीनी खाने का परिणाम नहीं है, बल्कि यह शरीर की मेटाबॉलिक प्रणाली से जुड़ी एक गंभीर स्थिति है, जिसमें मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, असंतुलित खानपान, तनाव, नींद की कमी और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसे कई कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
केवल चीनी छोड़ने से डायबिटीज नियंत्रित हो सकती है
आज के समय में बदलती जीवनशैली और अनियमित खानपान के कारण डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। भारत में भी डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में कई लोग यह मान लेते हैं कि मिठाई या चीनी से दूरी बना लेने से समस्या का समाधान हो जाएगा।
डॉक्टरों के अनुसार, चीनी कम करने से ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में कुछ हद तक मदद मिल सकती है, लेकिन यह अकेला उपाय नहीं है। डायबिटीज को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, स्वस्थ वजन, पर्याप्त नींद और चिकित्सकीय सलाह का पालन करना उतना ही आवश्यक है।

क्या सच में सिर्फ मिठाई खाने से होती है डायबिटीज
कई लोग मानते हैं कि अधिक मिठाई खाने से सीधे डायबिटीज हो जाती है, लेकिन विशेषज्ञ इस धारणा को पूरी तरह सही नहीं मानते। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार टाइप-2 डायबिटीज का मुख्य कारण शरीर में इंसुलिन की कार्यक्षमता का कम हो जाना है, जिसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति सही तरीके से प्रतिक्रिया नहीं देतीं, तो रक्त में ग्लूकोज जमा होने लगता है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर डायबिटीज विकसित हो सकती है। हालांकि अत्यधिक मीठे पेय पदार्थ और अधिक कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ मोटापा बढ़ाते हैं, जो डायबिटीज का बड़ा जोखिम कारक माना जाता है।
इंसुलिन रेजिस्टेंस: डायबिटीज की जड़
इंसुलिन एक महत्वपूर्ण हार्मोन है, जो पैंक्रियाज द्वारा बनाया जाता है। इसका काम रक्त में मौजूद ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाना होता है ताकि शरीर उसे ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल कर सके। जब शरीर इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाता है, तब पैंक्रियाज को ज्यादा मात्रा में इंसुलिन बनाना पड़ता है। समय के साथ पैंक्रियाज की क्षमता प्रभावित होने लगती है और रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। यही स्थिति आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज का कारण बनती है।
बढ़ता वजन भी बढ़ा सकता है खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि मोटापा, खासकर पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी, इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाने का काम करती है। यही कारण है कि अधिक वजन वाले लोगों में डायबिटीज होने का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा होता है। अनेक अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि यदि व्यक्ति अपने वजन को नियंत्रित रखे और कुछ किलो वजन भी कम कर ले, तो डायबिटीज का जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।
शारीरिक गतिविधि की कमी भी है बड़ी वजह
आधुनिक जीवनशैली में शारीरिक गतिविधियां लगातार कम होती जा रही हैं। घंटों बैठे रहना, व्यायाम न करना और निष्क्रिय दिनचर्या शरीर की ग्लूकोज उपयोग करने की क्षमता को प्रभावित करती है। नियमित रूप से व्यायाम करने से शरीर इंसुलिन का बेहतर उपयोग कर पाता है, जिससे ब्लड शुगर नियंत्रण में रहता है। इसलिए रोजाना कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि को स्वास्थ्य विशेषज्ञ जरूरी मानते हैं।

परिवार में डायबिटीज का इतिहास भी बढ़ाता है जोखिम
यदि परिवार में माता-पिता, दादा-दादी या अन्य करीबी रिश्तेदारों को डायबिटीज रही है, तो आने वाली पीढ़ियों में भी इस बीमारी का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि आनुवंशिक जोखिम होने का मतलब यह नहीं कि बीमारी निश्चित रूप से होगी। सही जीवनशैली अपनाकर इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
तनाव और खराब नींद को न करें नजरअंदाज
लगातार मानसिक तनाव और पर्याप्त नींद न लेना भी ब्लड शुगर पर असर डाल सकता है। तनाव के दौरान शरीर में ऐसे हार्मोन बढ़ जाते हैं जो ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं, नींद की कमी से शरीर का हार्मोनल संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे इंसुलिन की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। इसलिए हर व्यक्ति को प्रतिदिन 7 से 8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लेने की सलाह दी जाती है।
डायबिटीज के मरीज किन चीजों से बनाएं दूरी
डायबिटीज को नियंत्रित रखने के लिए केवल चीनी कम करना पर्याप्त नहीं है। कुछ अन्य खाद्य पदार्थ भी ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकते हैं। इनमें शामिल हैं
व्हाइट ब्रेड और रिफाइंड आटे से बने उत्पाद
मैदा और उससे बनी चीजें
प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड
केक, पेस्ट्री, पेटीज और अन्य बेकरी उत्पाद
अत्यधिक नमक वाले खाद्य पदार्थ

कोल्ड ड्रिंक और अन्य शुगरी ड्रिंक्स
यदि आप ब्लड शुगर को Control में रखना चाहते हैं तो संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, स्वस्थ वजन, पर्याप्त नींद और डॉक्टर द्वारा सुझाए गए उपचार को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना जरूरी है। सही समय पर अपनाई गई स्वस्थ आदतें न केवल डायबिटीज को नियंत्रित रख सकती हैं, बल्कि इससे जुड़ी गंभीर जटिलताओं के जोखिम को भी काफी हद तक कम कर सकती हैं।