नारी डेस्क: डायबिटीज ऐसी बीमारी है जो कई बार शरीर में धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआत में इसके लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि व्यक्ति उन्हें नजरअंदाज कर देता है। खासकर टाइप-2 डायबिटीज के शुरुआती दौर में कई लोगों को कोई स्पष्ट परेशानी महसूस नहीं होती। यही वजह है कि ब्लड शुगर बढ़ने का पता कई बार काफी देर से चलता है। इसी को लेकर Indian Journal of Medical Research में प्रकाशित एक रिपोर्ट में डायबिटीज के कुछ महत्वपूर्ण वॉर्निंग साइन बताए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन संकेतों को समय रहते पहचानना और जरूरत पड़ने पर ब्लड शुगर की जांच कराना बेहद महत्वपूर्ण है। शुरुआती पहचान से डायबिटीज को नियंत्रित करने और आगे होने वाली जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
डायबिटीज में शरीर देता है ये 11 चेतावनी संकेत
डायबिटीज में बढ़ा हुआ ब्लड शुगर शरीर के अलग-अलग हिस्सों को प्रभावित कर सकता है। कुछ संकेत बहुत सामान्य होते हैं, जबकि कुछ ऐसे होते हैं जिन्हें देखकर इंसुलिन रेजिस्टेंस या लंबे समय से बढ़े हुए ब्लड शुगर की आशंका की तरफ ध्यान जाता है। ICMR की मेडिकल जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में निम्न 11 warning signs का उल्लेख किया गया है।

बिना वजह वजन कम होना
अगर किसी व्यक्ति का वजन बिना डाइटिंग या एक्सरसाइज में बदलाव के लगातार कम हो रहा है, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, बिना किसी स्पष्ट वजह के वजन कम होना डायबिटीज का एक चेतावनी संकेत हो सकता है। टाइप-1 डायबिटीज में यह अपेक्षाकृत तेजी से दिखाई दे सकता है, जबकि टाइप-2 डायबिटीज में लंबे समय तक बीमारी का पता न चलने पर भी वजन कम हो सकता है।
हर समय थकान महसूस होना
पर्याप्त नींद लेने के बावजूद लगातार थकान रहना भी ब्लड शुगर से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। जब ग्लूकोज का इस्तेमाल शरीर की कोशिकाएं ठीक तरह से नहीं कर पातीं, तो व्यक्ति को कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है। हालांकि थकान के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं, इसलिए लगातार समस्या रहने पर जांच कराना बेहतर है।
चिड़चिड़ापन और बेचैनी
बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार चिड़चिड़ापन, बेचैनी या मूड में बदलाव महसूस होना भी रिपोर्ट में बताए गए संकेतों में शामिल है। खासकर जब इसके साथ दूसरे लक्षण भी दिखाई दे रहे हों, तो इसे केवल तनाव या व्यस्त दिनचर्या का असर मानकर छोड़ना ठीक नहीं है। रिपोर्ट में थकान और बेचैनी को अनडायग्नोज्ड डायबिटीज के संभावित संकेतों में शामिल किया गया है।
बार-बार इंफेक्शन होना और घाव देर से भरना
अगर व्यक्ति को बार-बार इंफेक्शन हो रहा है, खासकर जननांगों, यूरिनरी ट्रैक्ट, त्वचा या मुंह में, तो यह भी ध्यान देने वाला संकेत है। इसी तरह छोटी चोट या कट लगने के बाद घाव सामान्य से अधिक समय में भरना भी डायबिटीज की तरफ इशारा कर सकता है। ICMR की रिपोर्ट में बार-बार होने वाले संक्रमण और delayed wound healing को प्रमुख warning signs में रखा गया है।

5. मुंह में बार-बार सूखापन महसूस होना
लगातार मुंह सूखना भी डायबिटीज से जुड़ा एक संकेत हो सकता है। शरीर में ब्लड ग्लूकोज का स्तर बढ़ने पर अत्यधिक प्यास और बार-बार पेशाब आने जैसी समस्या हो सकती है, जिससे मुंह सूखने की शिकायत महसूस हो सकती है। अगर यह परेशानी लगातार बनी हुई है और साथ में ज्यादा प्यास या बार-बार पेशाब जैसी समस्या भी है, तो ब्लड शुगर की जांच करवाना उचित है।
पैरों में जलन, दर्द या सुन्नपन
पैरों में लगातार जलन, दर्द या सुन्नपन को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर नसों को प्रभावित कर सकता है और पैरों में इस तरह की परेशानियां महसूस हो सकती हैं। रिपोर्ट में पैरों में burning, pain और numbness को डायबिटीज के warning signs में शामिल किया गया है। बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार खुजली होना भी उन संकेतों में शामिल है जिन पर ध्यान देना चाहिए। खासकर अगर खुजली के साथ त्वचा में संक्रमण, सूखापन या अन्य बदलाव भी नजर आ रहे हों, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहता है।
खाना खाने के 2-3 घंटे बाद ब्लड शुगर गिरना
यह संकेत खास तौर पर प्रीडायबिटीज के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। कुछ लोगों में खाना खाने के करीब 2 से 3 घंटे बाद reactive hypoglycaemia यानी ब्लड शुगर गिरने की स्थिति देखी जा सकती है। ICMR की रिपोर्ट के मुताबिक, यह इंसुलिन मेटाबॉलिज्म में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है और आगे डायबिटीज विकसित होने के जोखिम की तरफ इशारा कर सकता है। ऐसी स्थिति बार-बार हो तो खुद से शुगर की दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच और उचित सलाह लेना जरूरी है।
गर्दन, बगल या जांघों के पास त्वचा का काला पड़ना
गर्दन, बगल या जांघों के पास त्वचा का मोटा और मखमली जैसा काला पड़ना acanthosis nigricans कहलाता है। यह इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हो सकता है। इसलिए अगर त्वचा पर इस तरह के बदलाव दिखाई दें, खासकर वजन बढ़ने या परिवार में डायबिटीज के इतिहास के साथ, तो ब्लड शुगर और मेटाबॉलिक हेल्थ की जांच पर ध्यान देना चाहिए।
नजर धुंधली होना या देखने में परेशानी
ब्लड शुगर में बदलाव का असर आंखों की रोशनी पर भी पड़ सकता है। नजर धुंधली होना या देखने में परेशानी महसूस होना डायबिटीज के warning signs में शामिल है। हालांकि आंखों की रोशनी कम होने के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं, इसलिए अचानक या लगातार नजर में बदलाव होने पर आंखों के डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
पुरुषों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन
पुरुषों में इरेक्शन से जुड़ी समस्या भी डायबिटीज से संबंधित हो सकती है। लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर रक्त वाहिकाओं और नसों को प्रभावित कर सकता है, जिसका असर यौन स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। ICMR की रिपोर्ट में impotence या erectile dysfunction को भी डायबिटीज के 11 warning signs में शामिल किया गया है।
बार-बार पेशाब, ज्यादा प्यास और भूख भी हैं अहम संकेत
इन 11 warning signs के अलावा डायबिटीज के कुछ क्लासिक लक्षण भी हैं, जिनमें बार-बार पेशाब आना, बहुत ज्यादा प्यास लगना और जरूरत से ज्यादा भूख लगना शामिल है। ये लक्षण खास तौर पर तब अधिक स्पष्ट हो सकते हैं जब ब्लड शुगर काफी बढ़ चुका हो।रिपोर्ट के मुताबिक, टाइप-1 डायबिटीज में ये लक्षण तेजी से विकसित हो सकते हैं, जबकि टाइप-2 डायबिटीज में बीमारी लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के भी रह सकती है। इसी वजह से केवल लक्षणों का इंतजार करना पर्याप्त नहीं है।

किन लोगों को डायबिटीज की जांच पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए?
कुछ लोगों में टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम दूसरों की तुलना में अधिक होता है। इनमें परिवार में डायबिटीज का इतिहास रखने वाले लोग, बढ़ती उम्र वाले व्यक्ति, अधिक वजन या मोटापे से जूझ रहे लोग और कम शारीरिक गतिविधि करने वाले लोग शामिल हैं। कमर के आसपास अधिक चर्बी, हाई ब्लड प्रेशर, हाल के समय में वजन बढ़ना और पहले गर्भावस्था के दौरान gestational diabetes होना भी जोखिम को बढ़ा सकता है। ऐसे लोगों को लक्षण आने का इंतजार करने के बजाय डॉक्टर की सलाह से समय-समय पर स्क्रीनिंग करानी चाहिए। ICMR की प्रकाशित रिपोर्ट में एशियाई मूल के 35 वर्ष या उससे अधिक उम्र के ऐसे लोगों में स्क्रीनिंग पर विशेष जोर दिया गया है जिनमें डायबिटीज के दो या उससे अधिक जोखिम कारक मौजूद हों।
सिर्फ लक्षण देखकर डायबिटीज की पुष्टि नहीं होती
यह समझना जरूरी है कि ऊपर बताए गए लक्षण डायबिटीज के संभावित warning signs हैं, लेकिन केवल इनके आधार पर किसी व्यक्ति को डायबिटीज का मरीज नहीं माना जा सकता। इन लक्षणों के पीछे दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। डायबिटीज या प्रीडायबिटीज की पुष्टि के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार fasting blood glucose, post-meal glucose, HbA1c या oral glucose tolerance test जैसी जांच की सलाह दे सकते हैं। ICMR की रिपोर्ट में भी शुरुआती पहचान के लिए उचित स्क्रीनिंग और नियमित जांच के महत्व पर जोर दिया गया है।
समय पर पहचान से कम हो सकता है जोखिम
डायबिटीज की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि टाइप-2 डायबिटीज लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के रह सकती है। इसी दौरान शरीर पर बढ़े हुए ब्लड शुगर का असर पड़ना शुरू हो सकता है। इसलिए लगातार थकान, बिना वजह वजन घटना, बार-बार संक्रमण, पैरों में जलन या सुन्नपन, नजर में बदलाव, त्वचा का असामान्य रूप से काला पड़ना या बार-बार ज्यादा प्यास और पेशाब जैसी समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
समय पर जांच होने से प्रीडायबिटीज या डायबिटीज की स्थिति का पता लगाया जा सकता है और डॉक्टर की सलाह के अनुसार खानपान, शारीरिक गतिविधि, वजन और जरूरत पड़ने पर दवाओं के जरिए इसे नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। ICMR की रिपोर्ट भी इस बात पर जोर देती है कि awareness और समय-समय पर screening से डायबिटीज की शुरुआती अवस्था में हस्तक्षेप का मौका मिलता है।