
नारी डेस्क: विवेक अग्रवाल जो एक निजी कंपनी में डायरेक्टर थे अपने गंभीर रूप से बीमार पिता को मैक्स अस्पताल के ICU में भर्ती कराने के लिए हौज़ रानी में आकर रहने लगे थे। लेकिन बुधवार को लगी भीषण आग में विवेक और उनके परिवार के सात अन्य सदस्यों की जान चली गई। इस दुखद घटना को और भी ज़्यादा दर्दनाक बना दिया उनके अंत के तरीके ने उनके शव इतने ज़्यादा जल चुके थे कि उन्हें पहचानना भी नामुमकिन था। उनकी पहचान सिर्फ़ उनके सोने के गहनोंअंगूठियों, चूड़ियों और चेन से ही हो पाई।
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पूरे परिवार एक साथ ठहरा था होटल में
विवेक के ससुर प्रेम बंसल के मुताबिक वह उनकी पत्नी तरजनी, उनकी बेटियां जिविशा और वार्या, विवेक की मां प्रेमलता और उनके ननिहाल पक्ष के तीन अन्य लोगये सभी जिनकी मौत हो चुकी है 'फ्लोरिश स्टेज़' नाम के गेस्ट हाउस में ठहरे हुए थे। गुरुग्राम के उस परिवार को बताया गया था कि विवेक के पिता राधे श्याम अग्रवाल की मेडिकल हालत गंभीर है। दिल्ली-गुरुग्राम के आम ट्रैफिक से बचने के लिए विवेक ने अपने परिवार को पास के ही एक होटल में ठहराने का फ़ैसला किया था जो अस्पताल से महज़ कुछ ही मीटर की दूरी पर था। मगर उस परिवार को ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि उनके लिए आगे क्या होने वाला है।
दूर- दूर से आए थे रिश्तेदार
उसी दक्षिण दिल्ली के अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के बाहर, विवेक के परिवार वाले बिलख-बिलखकर रो रहे थे और मातम मना रहे थे। उनकी ज़ुबान पर बस एक ही बात थी: “हम विवेक को बचा नहीं पाए।” बंसल ने बताया कि उनके दामाद ने मंगलवार को गेस्टहाउस में दो कमरे किराए पर लिए थे। उन्होंने आगे बताया कि उनकी सुबह राधे श्याम से मिलने की योजना थी। दिल्ली में रहने वाले विवेक के चाचा को सुबह करीब 8 बजे उसका फ़ोन आया। उसने बताया कि परिवार रेस्टोरेंट के बेसमेंट में नाश्ता कर रहा है। कुछ ही मिनटों बाद फिर एक फ़ोन आया, जिसमें विवेक जोर-जोर से चिल्ला रहा था 'आग लग गई है और हम फंस गए हैं'," । इसके बाद विवेक और दूसरों को कई बार फ़ोन किए गए, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया। घबराहट फैल गई, और बाकी रिश्तेदार तुरंत होमस्टे की ओर भागे।
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परिवार में अकेला रह गया बुजुर्ग मरीज
मैक्स अस्पताल में डॉक्टरों ने बताया कि आठों पीड़ितों को मृत अवस्था में लाया गया था। शोक में डूबे परिवार के सदस्यों ने बताया कि विवेक ने अपने पिता से मिलने के लिए परिवार के कई सदस्यों को होटल बुलाया था। उसके मामा और मामी अजमेर से आए थे, जबकि उसके दूसरे चाचा किशनगढ़ से पहुंचे थे। विवेक ने अपनी सबसे बड़ी बेटी को भी बुलाया था, जो बेंगलुरु में इंजीनियरिंग की छात्रा है। उस आग में उनके परिवार में से कोई भी नहीं बच पाया। विवेक ने अपने पिता से कहा था कि वे उम्मीद रखें कि उन्हें जल्द ही अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी। बंसल और दूसरे लोग अब न सिर्फ़ अपने प्रियजनों को खोने के दुख से जूझ रहे हैं, बल्कि परिवार के जीवित सदस्य राधे श्याम को लेकर भी चिंतित हैं, जिनका पूरा परिवार तबाह हो गया