16 JULTHURSDAY2026 7:18:51 PM
Life Style

भगवान जगन्नाथ की मूर्ति बाकी देवी-देवताओं से अलग क्यों दिखाई देती है?

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 15 Jul, 2026 03:31 PM
भगवान जगन्नाथ की मूर्ति बाकी देवी-देवताओं से अलग क्यों दिखाई देती है?

नारी डेस्क: क्या आपने कभी गौर किया है कि भगवान जगन्नाथ की मूर्ति बाकी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं से इतनी अलग क्यों दिखाई देती है? उनकी बड़ी-बड़ी आंखें, अनोखा चेहरा और बिना पूरे हाथ-पैर का स्वरूप देखकर कई लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि आखिर ऐसा क्यों है। क्या यह मूर्ति अधूरी रह गई थी, या इसके पीछे कोई गहरा आध्यात्मिक रहस्य छिपा है? इस अनोखे स्वरूप के पीछे एक प्राचीन और लोकप्रिय धार्मिक कथा जुड़ी है, जो भगवान की दिव्य लीला और भक्तों की आस्था को दर्शाती है।

राजा इंद्रद्युम्न को मिला दिव्य आदेश

मान्यता है कि भगवान विष्णु ने राजा इंद्रद्युम्न को स्वप्न में दर्शन दिए और उन्हें अपने दिव्य स्वरूप की प्रतिमा स्थापित करने का आदेश दिया। राजा ने इसे ईश्वर की आज्ञा मानकर पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ मंदिर निर्माण और मूर्ति निर्माण की तैयारियां शुरू कर दीं।

PunjabKesari

विश्वकर्मा ने वृद्ध शिल्पकार का रूप धारण किया

कथा के अनुसार, स्वयं देवशिल्पी विश्वकर्मा एक वृद्ध कारीगर का रूप धारण करके राजा के पास पहुंचे और भगवान की प्रतिमा बनाने का दायित्व स्वीकार किया। उन्होंने एक महत्वपूर्ण शर्त रखी जब तक मूर्ति निर्माण पूरा न हो जाए, तब तक कोई भी कमरे का दरवाजा नहीं खोलेगा। यदि शर्त का उल्लंघन हुआ, तो वे तुरंत काम छोड़ देंगे। राजा ने यह शर्त स्वीकार कर ली और मूर्ति निर्माण का कार्य आरंभ हो गया।

अधूरी मूर्तियां और राजा की चिंता

कई दिन बीत गए, लेकिन कमरे के भीतर से कोई आवाज नहीं आई। धीरे-धीरे राजा और रानी को चिंता होने लगी कि कहीं वृद्ध शिल्पकार के साथ कोई अनहोनी तो नहीं हो गई। रानी के आग्रह पर अंततः राजा ने धैर्य खो दिया और कमरे का दरवाजा खुलवा दिया।

ये भी पढ़ें:  भगवान जगन्नाथ का लगाया भोग जिसे आम लोग नहीं खा सकते, बहा दिया जाता जमीन पर

क्यों अधूरे रह गए भगवान के हाथ और पैर?

जैसे ही दरवाजा खोला गया, विश्वकर्मा जी तत्काल वहां से अदृश्य हो गए। उस समय भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की प्रतिमाएं पूरी तरह तैयार नहीं हुई थीं। उनके हाथ और पैर अधूरे दिखाई दे रहे थे। तभी एक दिव्य वाणी सुनाई दी कि यही भगवान का इच्छित और दिव्य स्वरूप है। इसी रूप में उनकी पूजा की जाएगी और यही स्वरूप युगों-युगों तक भक्तों के लिए श्रद्धा का केंद्र रहेगा।

आज भी इसी स्वरूप की होती है पूजा

आज ओडिशा के पुरी धाम में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की इन्हीं अनोखी प्रतिमाओं की पूजा की जाती है। दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए आते हैं और विशेष रूप से प्रसिद्ध रथ यात्रा में शामिल होते हैं।

PunjabKesari

अधूरी होकर भी पूर्ण क्यों मानी जाती है यह प्रतिमा?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा यह संदेश देती है कि ईश्वर किसी बाहरी पूर्णता के मोहताज नहीं हैं। उनका दिव्य स्वरूप मानव कल्पना और सामान्य सौंदर्य की सीमाओं से परे है। इसलिए यह प्रतिमा अधूरी दिखाई देने के बावजूद आध्यात्मिक दृष्टि से पूर्ण मानी जाती है और करोड़ों भक्तों की आस्था का प्रतीक है।

नोट: यह लेख प्रचलित धार्मिक मान्यताओं और लोककथाओं पर आधारित है। विभिन्न परंपराओं और ग्रंथों में इस कथा के अलग-अलग संस्करण भी मिलते हैं।
 

 

Related News