
नारी डेस्क : एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को दर्द अधिक महसूस हो सकता है। हालांकि, देखा जाए तो महिलाएं अक्सर पुरुषों के बराबर या उससे ज्यादा शारीरिक और घरेलू काम करती हैं, जिससे उनका शरीर ज्यादा थक जाता है और दर्द की संभावना भी बढ़ जाती है। वहीं कुछ मामलों में, खासकर ऑफिस या सिटिंग जॉब में पुरुषों पर भी मानसिक और शारीरिक दबाव अधिक माना जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार यह अंतर केवल कामकाज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मस्तिष्क की कार्यप्रणाली, हार्मोनल बदलाव, उम्र और जैविक कारण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
क्या कहता है नया अध्ययन?
रिसर्च में Journal of Pain में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पुरुषों और महिलाओं के मस्तिष्क की प्रतिक्रिया को समझने के लिए fMRI स्कैनिंग तकनीक का उपयोग किया। इस दौरान प्रतिभागियों को बढ़ती गर्मी (heat stimulus) के संपर्क में रखा गया, ताकि यह देखा जा सके कि दर्द के अलग-अलग स्तरों पर मस्तिष्क कैसे प्रतिक्रिया देता है।

दर्द को नियंत्रित करने वाले मस्तिष्क नेटवर्क में अंतर
शोध में पाया गया कि मस्तिष्क का वह नेटवर्क, जो दर्द को नियंत्रित करने में मदद करता है, उम्र के साथ बदलता रहता है। इसी प्रक्रिया में पुरुषों और महिलाओं के बीच दर्द अनुभव करने की क्षमता में अंतर देखा गया, जिससे संकेत मिलता है कि महिलाओं में दर्द की संवेदनशीलता अधिक हो सकती है।
उम्र और दर्द का गहरा संबंध
अध्ययन में यह भी सामने आया कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर में दर्द महसूस करने की क्षमता बढ़ सकती है। इस रिसर्च में 30 से 86 वर्ष की उम्र के 59 लोगों (27 महिलाएं और 32 पुरुष) को शामिल किया गया, जिन्हें अलग-अलग स्तर की गर्मी देकर उनके दर्द की तीव्रता का आकलन कराया गया।

क्यों होता है यह अंतर?
वैज्ञानिकों के अनुसार इसके पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं
जैसे, हार्मोनल अंतर
मस्तिष्क के दर्द प्रोसेसिंग सिस्टम में भिन्नता
न्यूरल गतिविधियों में बदलाव
उम्र के साथ दर्द सहन करने की क्षमता में कमी
हालांकि, शोधकर्ता यह भी मानते हैं कि इस विषय पर अभी और गहराई से अध्ययन की आवश्यकता है।
यह रिसर्च इस बात की ओर इशारा करता है कि दर्द सिर्फ एक शारीरिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि मस्तिष्क, उम्र और जैविक संरचना से जुड़ा एक जटिल अनुभव है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस क्षेत्र में अभी और शोध की जरूरत है, ताकि दर्द प्रबंधन को बेहतर तरीके से समझा जा सके।