
नारी डेस्क: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक्टर शेखर सुमन और भारती सिंह के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी है। यह FIR 2010 के एक मामले से जुड़ी है, जिसमें एक कॉमेडी शो के दौरान "या अल्लाह! रसगुल्ला! दही भल्ला" जैसे शब्द कहे गए थे। कोर्ट ने कहा कि किसी कॉमेडी एक्ट में खाने की चीज़ों का इस्तेमाल करने भर से किसी धर्म का अपमान नहीं माना जा सकता। यह FIR IPC की धारा 34 के तहत दर्ज की गई थी, जो रज़ा एकेडमी के एक प्रतिनिधि की शिकायत पर आधारित थी।

यह शिकायत नवंबर 2010 में प्रसारित हुए शो 'कॉमेडी सर्कस का जादू' के एक एपिसोड से जुड़ी थी। जस्टिस अमित बोरकर ने शेखर सुमन और भारती सिंह द्वारा दायर उन याचिकाओं को मंजूरी दे दी, जिनमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने की मांग की थी। जस्टिस बोरकर ने कहा कि यह कार्यक्रम एक "हल्का-फुल्का मनोरंजन" वाला शो था और इसे उसके सही संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए। बेंच ने कहा कि धारा 295-A के तहत अपराध साबित होने के लिए धार्मिक भावनाओं का अपमान करने का "जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण इरादा" होना जरूरी है।

कोर्ट ने कहा- "एक कॉमेडी शो को उन ही पैमानों पर नहीं परखा जाता, जिन पर किसी धार्मिक उपदेश या राजनीतिक बयान को परखा जाता है। इस तरह के प्रदर्शन को पूरे संदर्भ में देखा जाना चाहिए, न कि उसमें से कुछ चुनिंदा शब्दों को निकालकर। ये दोनों ही बातें ज़रूरी हैं। अगर इनमें से कोई एक भी मौजूद नहीं है, तो अपराध पूरी तरह से साबित नहीं माना जाएगा।" कोर्ट ने कहा- "जिस शिकायत पर यह FIR दर्ज की गई है, वह एक ऐसे व्यक्ति ने की थी जिसने पहली नज़र में, खुद यह कार्यक्रम नहीं देखा था। उसने रज़ा एकेडमी को कुछ लोगों से मिली कथित शिकायतों के आधार पर यह कदम उठाया था। यह तर्क दिया गया है कि FIR (C.R. No. 265 of 2010) बिना किसी शुरुआती जांच-पड़ताल के ही दर्ज कर ली गई थी कि आरोप सही हैं या नहीं।"