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Health Care Tips: अस्थमा अटैक से बचने के लिए ऐसे करें खुद की केयर

Health Care Tips: अस्थमा अटैक से बचने के लिए ऐसे करें खुद की केयर
Views:- Saturday, July 7, 2018-1:14 PM

विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार दुनियाभर के बहुत से लोग दमे यानि अस्थमा से पीड़ित हैं। अकेले भारत में इनकी संख्या डेढ़ करोड़ तक है। अस्थमा बीमारी में सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द, खासी अन्य आदि कई तरह के लक्षण दिखाई देते हैं। वहीं, अस्थमा अटैक का मुख्य कारण शरीर में मौजूद बलगम और संकरी श्वासनली है लेकिन इसके अलावा अन्य कई कारण हैं, जिससे अस्थमा अटैक हो सकता है। आज हम आपको इस बीमारी के कारण, लक्षण और उपचार बताएंगे, जिसे पहचानकर आप अस्थमा अटैक से बच सकते है।
 

अस्थमा के लक्षण
जब अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति किसी ऐसी चीज के संपर्क में आता है, जिससे उससे सांस लेने की नली में बाधा हो और उसकी दीवारों की मांसपेशियां कमजोर हो जाए। इसके साथ ही सांस नली में सूजन और मुंह में बलगम आने लगे तो उनमें ऐसे लक्षण नजर आते हैं।
छाती में कठोरता आना
सांस लेने में मुश्किल
खांसी आना (खासकर कसरत या रात को सोते समय)
सांस कम आना या सांस संबंधी समस्याएं
सांस लेने में मुश्किल आना
नींद न आना या सोते समय सांस की कमी

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क्या नींद के दौरान अस्थमा अटैक हो सकता है?
अस्थमा के ज्यादातर पेशेंट महसूस करते हैं कि रात को सोते समय उनके लक्षण ज्यादा बुरे हो जाते है। यह लक्षण धूल, पालतू जानवरों से एलर्जी या छाती के बल लेटने के कारण होते हैं। ऐसे में रात को सोते समय आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। इससे नींद में आने वाले हार्ट अटैक का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।

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1. इस बात का ख्याल रखें कि आप अपने बैडरूम की सफाई अच्छी तरह और नियमित रूप से करें। इससे कमरे में धूल मिट्टी नहीं रहेगी और आपकी प्रॉब्लम नहीं बढ़ेगी।
 

2. अपने पालतू जानवरों को अपने साथ न सुलाएं। इसके अलावा अस्थमा पेशेंट को जानवरों से थोड़ी दूर रहना चाहिए। क्योंकि उनके शरीर के बालों में मौजूद धूल मिट्टी आपकी सांस नली को बंद कर सकती है।
 

3. अपने सिर को ऊंचा रखकर ही सोएं। अगर आपको जुकाम या साइनस इंफैक्शन है तो पीठ के बल लेटने से अटैक की संभवाना बढ़ सकती है। इसलिए यह प्रॉब्लम होने पर हमेशा करवट लेकर सोएं।
 

अस्थमा के उपचार
अस्थमा का कोई परमानेंट इलाज नही है लेकिन कुछ तरीकों से आप अस्थमा अटैक से बच सकते हैं। इसके लिए आपको इस बात का ख्याल रखना बहुत जरूरी है कि इसके लक्षणों से कैसे निपटें। अगर आपको अस्थमा है तो डॉक्टर से संपर्क करके अपने लिए सही उपचार जानें, फिर चाहे वह डॉक्ट्ररी इलाज हो या घरेलू।
 

इन्हेलर रखें पास

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1. अस्थमा के मरीज को एक ब्ल्यू रिलीवर इन्हेलर दिया जाता है, जिसे उन्हें हमेशा अपने साथ रखना पड़ता है। जब भी आपको अस्थमा के लक्षण महसूस हो तो इन्हेलर का इस्तेमाल करें। इससे आप अस्थमा अटैक से बच सकते हैं। अपने डॉक्टर को यह बताना होगा कि आप रिलीवर का इस्तेमाल हफ्ते में कितनी बार करते हैं।
 

2. अगर आप इसका जरूरत से ज्यादा प्रयोग करने पर आपको एक प्रीवैंटर इन्हेलर दिया जाएगा। इसमें स्टीरॉयड बैक्लोमेटाजोन मौजूद होता है, जो फेफड़ों में सूजन को कम करता है और अस्थमा अटैक को रोकता है।
 

3. काम्बीनेशन इन्हेलर का अस्थमा पेशेंट को तब दिया जाता है, जब रिलीवर प्रीवैंट इन्हेलर से मरीज की अस्थमा कंट्रोल नहीं हो पाती। अस्थमा अटैक से बचने के लिए इस इन्हेलर को नियमित रूप से इस्तेमाल करना पड़ता है।
 

अस्थमा के लिए कसरत और डाइट
अस्थमा पेशेंट ग्लाइसैमिक इंडैक्ट (जी.आई) वाली डाइट लेते हैं। इसके अलावा वह हफ्ते में 3 बार हाई इंटैसिटी एक्सरसाइज क्लासेज अटैंड करते हैं। इससे 8 हफ्तों में ही अस्थमा के लक्षण कम हो जाते है। कुछ पेशेंट को एक्सरसाइज करते समय सांस फूलने की प्रॉब्लम होती है लेकिन इसका मतबल यह नहीं आप शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा न लें। अस्थमा रोगी को हमेशा अच्छी डाइट के साथ एक्सरसाइज करनी भी जरूरी होती है।

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