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अचानक चक्कर के साथ घूमने लगता सिर तो ये Vertigo की समस्या, पहले ही गौर कर लें

  • Edited By Vandana,
  • Updated: 18 Aug, 2026 09:11 PM
अचानक चक्कर के साथ घूमने लगता सिर तो ये Vertigo की समस्या, पहले ही गौर कर लें

नारी डेस्कः वर्टिगो  (Vertigo) की समस्या, आजकल ये नाम आप बहुत ही आम सुन रहे होंगे, ऐसी समस्या जिस में ऐसा लगता है कि आपका सिर,कमरा और आसपास की चीजें घूम रही हैं या आपकी बॉडी का बैलेंस खराब हो रहा है। आम भाषा में तो इसे चक्कर आना ही कहा जाता है लेकिन हर तरह का चक्कर वर्टिगो नहीं होता। वर्टिगो में खासतौर पर  चारों तरफ के घूमने जैसा एहसास होता है। इसके साथ मतली, उल्टी, चलने में असंतुलन या सिर हिलाने पर परेशानी भी हो सकती है। वर्टिगो खुद कोई बीमारी नहीं बल्कि किसी दूसरी समस्या का लक्षण हो सकता है। इसका सबसे आम कारण आंतरिक कान की समस्या होती है, हालांकि कुछ मामलों में यह मस्तिष्क या नसों से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है।

चलिए आसान भाषा में वर्टिगो को समझें

हमारे शरीर का संतुलन बनाए रखने में आंखें, दिमाग और कान के अंदर मौजूद वेस्टिब्युलर सिस्टम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आंतरिक कान में मौजूद छोटी-सी संरचना शरीर की स्थिति और सिर की गति के बारे में दिमाग को जानकारी देती है। जब इस सिस्टम में गड़बड़ी होती है, तो दिमाग को शरीर की स्थिति के बारे में मिलने वाले संकेतों में असंतुलन पैदा हो सकता है। इसका नतीजा चक्कर या घूमने जैसा एहसास हो सकता है। यही वजह है कि कुछ लोगों को बिस्तर पर करवट बदलते ही या ऊपर-नीचे देखने पर अचानक कमरा घूमता हुआ महसूस होता है।

वर्टिगो और सामान्य चक्कर में क्या अंतर है?

सामान्य चक्कर में व्यक्ति को कमजोरी, हल्कापन या बेहोशी जैसा महसूस हो सकता है। वहीं वर्टिगो में मुख्य रूप से घूमने या आसपास की चीजों के घूमने का एहसास होता है। उदाहरण के लिए, अगर आपको लगे कि आप स्थिर बैठे हैं लेकिन कमरा गोल-गोल घूम रहा है, तो यह वर्टिगो का लक्षण हो सकता है।

वर्टिगो के मुख्य कारण क्या हैं?

1. BPPV यानी पोजिशन बदलने पर होने वाला वर्टिगो

यह वर्टिगो के आम कारणों में से एक है। इसमें सिर की स्थिति बदलने पर अचानक चक्कर आने लगता है। जैसे बिस्तर पर करवट लेते समय, लेटने के बाद उठते समय या ऊपर देखने पर कुछ सेकंड से लेकर थोड़ी देर तक घूमने जैसा महसूस हो सकता है।

2. कान के अंदर संक्रमण या सूजन

आंतरिक कान में संक्रमण या सूजन होने पर शरीर का संतुलन प्रभावित हो सकता है। इसके कारण चक्कर के साथ कान में भारीपन, सुनाई देने में परेशानी या कान में आवाज आने जैसी समस्या भी हो सकती है।

3. मेनियर डिजीज

Ménière's disease आंतरिक कान से जुड़ी एक स्थिति है। इसमें बार-बार वर्टिगो के दौरे, कान में आवाज यानी टिनिटस, कान में दबाव या सुनने की क्षमता में बदलाव हो सकता है।

4. माइग्रेन

कुछ लोगों में माइग्रेन के साथ भी वर्टिगो हो सकता है। इसमें जरूरी नहीं कि हर बार तेज सिरदर्द हो। चक्कर, रोशनी या आवाज से परेशानी और संतुलन बिगड़ना भी हो सकता है।

5. सिर पर चोट

सिर या कान के आसपास चोट लगने के बाद भी वर्टिगो की समस्या शुरू हो सकती है। अगर चोट के बाद लगातार चक्कर, उल्टी या संतुलन बिगड़ रहा हो तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

6. कुछ दवाओं का असर

कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट के रूप में चक्कर या संतुलन की समस्या हो सकती है। अगर किसी नई दवा को शुरू करने के बाद समस्या शुरू हुई है, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी दें।

7. मस्तिष्क से जुड़ी समस्या

कम मामलों में वर्टिगो स्ट्रोक, मल्टीपल स्केलेरोसिस या मस्तिष्क से जुड़ी दूसरी समस्याओं के कारण भी हो सकता है। इसलिए अचानक और गंभीर वर्टिगो को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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वर्टिगो के लक्षण

वर्टिगो में हर व्यक्ति के लक्षण अलग हो सकते हैं। इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:
आसपास की चीजों के घूमने जैसा महसूस होना
खुद के घूमने या हिलने का एहसास
चलते समय संतुलन बिगड़ना
सिर घुमाने पर चक्कर बढ़ना
मतली या उल्टी
आंखों के सामने चीजों का हिलता या घूमता हुआ दिखना
पसीना आना
कान में आवाज आना
कान में दबाव या भारीपन
कुछ मामलों में सुनने की क्षमता में बदलाव

सुबह उठते ही चक्कर क्यों आते हैं?

अगर बिस्तर से उठते या करवट बदलते समय कुछ सेकंड के लिए अचानक कमरा घूमने लगता है, तो BPPV जैसी समस्या इसकी एक वजह हो सकती है। हालांकि, बार-बार ऐसा होने पर इसे केवल कमजोरी मानकर छोड़ना सही नहीं है। डॉक्टर जरूरत पड़ने पर कान और संतुलन से जुड़ी जांच कर सकते हैं।

वर्टिगो से बचने के लिए क्या करें?

वर्टिगो से बचाव पूरी तरह उसके कारण पर निर्भर करता है। फिर भी कुछ सामान्य सावधानियां मदद कर सकती हैं।

धीरे-धीरे स्थिति बदलें: अचानक बिस्तर से उठने के बजाय पहले कुछ समय बैठें और फिर धीरे से खड़े हों।

सिर को अचानक न घुमाएं: अगर सिर की गति से चक्कर बढ़ता है तो अचानक ऊपर-नीचे या दाएं-बाएं देखने से बचें।

पर्याप्त पानी पिएं: शरीर में पानी की कमी से चक्कर की समस्या बढ़ सकती है, इसलिए पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेते रहें।

शराब और धूम्रपान से बचें: ये कुछ लोगों में चक्कर और संतुलन की समस्या को बढ़ा सकते हैं।

नींद पूरी करें: पर्याप्त नींद और नियमित दिनचर्या शरीर के संतुलन और सामान्य स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

गाड़ी चलाने से बचें: चक्कर या वर्टिगो का दौरा पड़ रहा हो तो वाहन चलाना या ऊंचाई पर काम करना खतरनाक हो सकता है।

वर्टिगो होने पर तुरंत क्या करें?

अगर अचानक चक्कर आने लगे तो तुरंत बैठ जाएं या सुरक्षित जगह पर लेट जाएं। सीढ़ियों, बालकनी या ऐसी जगहों से दूर रहें जहां गिरने का खतरा हो। जब तक चक्कर कम न हो जाए, अचानक खड़े होने या चलने की कोशिश न करें।

बार-बार होने वाले वर्टिगो में डॉक्टर कारण के अनुसार वेस्टिब्युलर रिहैबिलिटेशन, विशेष एक्सरसाइज जैसे Epley maneuver, दवाएं या अन्य उपचार की सलाह दे सकते हैं। BPPV में कुछ विशेष पोजिशनिंग एक्सरसाइज काफी प्रभावी हो सकती हैं, लेकिन इन्हें सही तरीके से करना जरूरी है।

कब वर्टिगो गंभीर हो सकता है?

अगर चक्कर अचानक बहुत तेज शुरू हुआ है और इसके साथ इनमें से कोई लक्षण दिखाई दे, तो इसे सामान्य चक्कर समझकर इंतजार न करें:
चेहरे, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन
बोलने या समझने में परेशानी
चलने में बहुत ज्यादा दिक्कत
अचानक तेज सिरदर्द
दो-दो दिखाई देना
बेहोशी
सीने में दर्द
लगातार उल्टी
अचानक सुनाई देना कम होना
ऐसे लक्षण स्ट्रोक जैसी आपात स्थिति का संकेत हो सकते हैं और तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत होती है।

क्या वर्टिगो हमेशा गंभीर बीमारी का संकेत है?

नहीं। हर वर्टिगो ब्रेन ट्यूमर या स्ट्रोक का संकेत नहीं होता। ज्यादातर मामलों में इसका संबंध आंतरिक कान की समस्या, BPPV, माइग्रेन या दूसरी अपेक्षाकृत सामान्य स्थितियों से हो सकता है। लेकिन अगर चक्कर पहली बार बहुत तेज हुआ है, बार-बार हो रहा है, लंबे समय तक बना रहता है या इसके साथ न्यूरोलॉजिकल लक्षण हैं, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।

नोटः सिर घूमना या आसपास की चीजों के घूमने जैसा महसूस होना वर्टिगो हो सकता है। इसका सबसे आम कारण आंतरिक कान से जुड़ी समस्या है, लेकिन माइग्रेन, सिर की चोट, कुछ दवाएं और कुछ न्यूरोलॉजिकल स्थितियां भी इसकी वजह बन सकती हैं। इसलिए लगातार या बार-बार होने वाले चक्कर को केवल कमजोरी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सही कारण की पहचान होने पर वर्टिगो का इलाज और नियंत्रण संभव है।

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