
नारी डेस्क: ब्रह्मपुत्र नदी को अक्सर “भारत की अमेजन” कहा जाता है। यह नदी अपनी विशाल चौड़ाई, तेज बहाव और समृद्ध जैव विविधता के लिए जानी जाती है। यह तिब्बत से निकलकर अरुणाचल प्रदेश और असम से होते हुए आगे बांग्लादेश तक जाती है। अपने भारी जल प्रवाह और बार-बार आने वाली बाढ़ के कारण इसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली नदियों में गिना जाता है।
क्यों कहा जाता है इसे ‘भारत की अमेजन’
जिस तरह अमेजन नदी दुनिया की सबसे बड़ी और पानी से भरपूर नदी मानी जाती है, उसी तरह ब्रह्मपुत्र भी भारत की सबसे ज्यादा जल प्रवाह वाली नदियों में शामिल है। इसकी चौड़ाई और पानी की ताकत इसे बेहद खास बनाती है, इसलिए इसे “इंडियन अमेजन” भी कहा जाता है।

मॉनसून में क्यों बदल जाता है पानी का रंग?
हर साल मॉनसून के दौरान ब्रह्मपुत्र नदी का पानी लाल या लाल-भूरा दिखाई देने लगता है। बारिश के मौसम में जब नदी में पानी बढ़ता है, तो इसका बहाव बहुत तेज हो जाता है, जिससे यह दृश्य लोगों को हैरान कर देता है।
क्या सच में खून जैसा हो जाता है पानी?
यह बिल्कुल भी खून नहीं होता। नदी के पानी का रंग बदलना एक प्राकृतिक और वैज्ञानिक प्रक्रिया है। यह बदलाव किसी रहस्य या खतरे की वजह से नहीं, बल्कि प्राकृतिक कारणों से होता है।
असली कारण क्या है?
मॉनसून के दौरान भारी बारिश से मिट्टी और चट्टानों का कटाव बढ़ जाता है। इससे बड़ी मात्रा में आयरन (लौह) युक्त मिट्टी नदी में मिल जाती है। जब यह मिट्टी पानी और हवा के संपर्क में आती है, तो ऑक्सीकरण (oxidation) की प्रक्रिया होती है, जिससे पानी का रंग लाल या भूरा दिखाई देने लगता है।

तेज बहाव और ज्यादा गंदलापन
बरसात के समय नदी का बहाव तेज हो जाता है, जिससे ज्यादा मिट्टी और तलछट (sediment) पानी में मिल जाती है। इसी वजह से पानी गाढ़ा और ज्यादा लाल दिखाई देता है। बारिश की मात्रा के हिसाब से रंग हल्का या गहरा हो सकता है।
हर साल होने वाली प्राकृतिक घटना
यह कोई असामान्य घटना नहीं है। हर साल मॉनसून में यह बदलाव देखा जाता है। हालांकि इसकी तीव्रता मौसम और बारिश की स्थिति पर निर्भर करती है। ब्रह्मपुत्र नदी का लाल होना कोई रहस्य नहीं, बल्कि प्रकृति का एक सामान्य वैज्ञानिक परिणाम है। इसकी ताकत, आकार और बदलता रूप इसे भारत की सबसे अनोखी और महत्वपूर्ण नदियों में शामिल करता है।