08 JUNMONDAY2026 5:14:51 PM
Nari

भारतीय थाली बढ़ा रही है डायबिटीज का खतरा! किन लोगों के लिए सही नहीं है दाल-रोटी

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 08 Jun, 2026 03:01 PM
भारतीय थाली बढ़ा रही है डायबिटीज का खतरा! किन लोगों के लिए सही नहीं है दाल-रोटी

नारी डेस्क:  भारतीय खाने की पहचान उसकी संतुलित और स्वादिष्ट थाली से होती है। दाल, रोटी, चावल, सब्जी और सलाद से सजी थाली सदियों से हमारे खानपान का हिस्सा रही है। लेकिन बदलती जीवनशैली और तेजी से बढ़ रहे डायबिटीज के मामलों के बीच अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या पारंपरिक भारतीय थाली भी ब्लड शुगर बढ़ाने का कारण बन सकती है विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या भारतीय थाली में नहीं, बल्कि उसे खाने के तरीके और मात्रा में छिपी हुई है। अगर सही संतुलन न रखा जाए तो यही थाली कुछ लोगों के लिए स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों की वजह बन सकती है।

क्या सच में डायबिटीज बढ़ा सकती है भारतीय थाली

भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में डॉक्टर और डाइट एक्सपर्ट अब खानपान की आदतों पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार दाल, रोटी और चावल अपने आप में नुकसानदायक नहीं हैं। ये सभी संतुलित आहार का हिस्सा हैं। परेशानी तब शुरू होती है जब एक ही समय में जरूरत से ज्यादा कार्बोहाइड्रेट का सेवन किया जाता है और थाली में प्रोटीन व फाइबर की मात्रा कम रह जाती है।

PunjabKesari

भारतीय थाली में कहां हो रही है सबसे बड़ी गलती?

अक्सर देखा जाता है कि लोग एक ही भोजन में दो-तीन रोटियां, एक कटोरी चावल, आलू वाली सब्जी और कभी-कभी मिठाई भी खा लेते हैं। यानी एक ही प्लेट में कई कार्बोहाइड्रेट स्रोत शामिल हो जाते हैं। जब शरीर को एक साथ इतनी अधिक मात्रा में कार्ब्स मिलते हैं, तो ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है। लंबे समय तक यही आदत बनी रहे तो मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और डायबिटीज जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।

किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ लोगों को अपनी थाली पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इनमें शामिल हैं

प्रीडायबिटीज से जूझ रहे लोग

डायबिटीज के मरीज

मोटापे से परेशान लोग

हाई ब्लड प्रेशर वाले व्यक्ति

इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या वाले लोग

इन लोगों के लिए भोजन में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा नियंत्रित रखना बेहद जरूरी माना जाता है।

PunjabKesari

ये भी पढ़ें:  सप्लीमेंट्स को टक्कर देते हैं ये 5 देसी Foods, 70 की उम्र में भी रहेंगे जवान, मिलते हैं कई फायदे

प्रोटीन और फाइबर की कमी बन रही बड़ी समस्या

आजकल अधिकांश लोगों की थाली में कार्बोहाइड्रेट तो भरपूर होता है, लेकिन प्रोटीन और फाइबर पर्याप्त मात्रा में नहीं होते। कई लोग रोटी और चावल तो भरपेट खाते हैं, लेकिन दाल, पनीर, दही, अंडे, मछली या अन्य प्रोटीन युक्त चीजें कम मात्रा में लेते हैं। वहीं हरी सब्जियां और सलाद को सिर्फ औपचारिकता समझकर खाया जाता है। यही असंतुलन धीरे-धीरे स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है।

बदलती लाइफस्टाइल भी है जिम्मेदार

कुछ दशक पहले लोगों की दिनचर्या काफी सक्रिय हुआ करती थी। खेतों में काम करना, पैदल चलना और शारीरिक श्रम करना आम बात थी। ऐसे में शरीर अतिरिक्त कैलोरी को आसानी से खर्च कर देता था। लेकिन आज की जीवनशैली काफी बदल चुकी है। घंटों ऑफिस में बैठकर काम करना, कम शारीरिक गतिविधि और प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता सेवन शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है। ऐसे में भोजन का सही संतुलन पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।

क्या दाल-रोटी और चावल खाना छोड़ देना चाहिए

इस सवाल का जवाब है बिल्कुल नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि दाल, रोटी और चावल भारतीय आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इन्हें पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है। बल्कि इन्हें सही मात्रा और संतुलन के साथ खाने की जरूरत है। अगर थाली में पर्याप्त मात्रा में सलाद, हरी सब्जियां, दाल, दही और अन्य प्रोटीन स्रोत शामिल किए जाएं, तो भोजन अधिक संतुलित और स्वास्थ्यवर्धक बन सकता है।

PunjabKesari

स्वस्थ भारतीय थाली कैसी होनी चाहिए

एक संतुलित थाली में आधी प्लेट सब्जियां और सलाद एक चौथाई हिस्सा प्रोटीन (दाल, पनीर, दही, अंडे आदि) एक चौथाई हिस्सा कार्बोहाइड्रेट (रोटी या चावल) शामिल होना चाहिए। इस तरह का संतुलन ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है और लंबे समय तक बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
 
 
 

Related News